Monday, June 27, 2022
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yoga mudra for kidney problem: international day of yoga 2022 ayurveda expert shared some yoga pose which helps to prevent and cure kidney and liver problems – Yoga Day 2022: पास भी नहीं भटकेगी लीवर-किडनी की दिक्कतें, बस कर लें आयुर्वेद एक्सपर्ट द्वारा बताए ये 6 योगासन


स्वस्थ्य शरीर के लिए संतुलित दिनचर्या का होना बहुत जरूरी होता है। जिसमें पोषक तत्व से भरपूर खाने के साथ नियमित शारीरिक गतिविधियों का होना शामिल है। हम शरीर के बाहरी खूबसूरती के लिए तो जिम में बहुत पसीना बहाते हैं लेकिन आंतरिक अंगों के लिए कुछ नहीं करते हैं। ऐसे में कई बार हष्ट-पुष्ट दिखने वाला शरीर भी गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाता है। दरअसर, गर्मी में किडनी संबंधित परेशानियां लोगों काफी बढ़ जाती है इसलिए आज हम आयुर्वेद डॉक्टर द्वारा सुझाए कुछ योग मुद्रा आपको बता रहे हैं।

आयुर्वेद डॉक्टर नीतिका कोहली ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर कर किडनी को हेल्दी रखने वाले कुछ योग बताए हैं। वह कहती हैं कि हालांकि शरीर के सभी हिस्सों पर ध्यान देना जरूरी है, लेकिन अक्सर लोग किडनी के तरफ विशेष ध्यान नहीं देते हैं। ऐसे में ये योग मुद्रा आपके किडनी सेहतमंद रखने में मदद कर सकता है।

ये योगासन किडनी को बनाते हैं सेहतमंद

​पश्चिमोत्तानासन

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आयुर्वेद विशेषज्ञ बताती हैं कि यह आसन किडनी को बेहतर ढंग से काम करने के लिए प्रोत्साहित करता है। साथ ही पाचन क्रिया में सुधार और मासिक धर्म के दर्द से राहत पहुंचाने का काम भी करता है।

कैसे करें- जमीन पर दोनों पैरों को एकदम सीधे फैलाकर बैठ जाएं। दोनों पैरों के बीच में दूरी न हो और जितना संभव हो पैरों को सीधे रखें। इसके साथ ही गर्दन, सिर और रीढ़ की हड्डी को भी सीधा रखें। अपनी दोनों हथेलियों को दोनों घुटनों पर रखें।अब अपने सिर और धड़ को आगे की ओर झुकाएं और अपने घुटनों को बिना मोड़े हाथों की उंगलियों से पैरों की उंगलियों को छूने की कोशिश करें। ऐसा करते हुए गहरी सांस लें और छोड़ें। अपने सिरसे दोनों घुटनों को और कोहनी से जमीन को छूने की कोशिश करें। फिर सामान्य मुद्रा में आ जाए और आराम से सांस लें। इस आसन को 3 से 4 बार दोहराएं।

​अर्धमत्स्येन्द्रासन

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आयुर्वेद विशेषज्ञ बताती हैं कि अर्धमत्स्येन्द्रासन किडनी और लीवर को दुरूस्त करने का काम करता है। साथ ही यह आसन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने का काम भी करती है।

कैसे करें- इस योग मुद्रा को करने के लिए रीढ़ की हड्डी को सीधी रखते हुए पैरा का सामने फैलाकर बैठ जाएं। बाएँ पैर को मोड़ें और इस पैर की एड़ी को दाहिने कूल्हे के पास रखें। दाहिने पैर को बाएँ घुटने के ऊपर रखें। बाएँ हाथ को दाहिने घुटने पर रखें और दाहिना हाथ पीछे रखें। ध्यान रहे कि कमर, कन्धों गर्दन सीधे रेखा में हो। फिर इसे शरीर को दाहिनी तरफ से मोड़ते हुए कंधे के ऊपर देखें। गहरी साधारण साँस लेते और छोड़ते हुए, पहले दाहिने हाथ को ढीला छोड़े,फिर कमर,फिर छाती और अंत में गर्दन को। आराम से सीधे बैठ जाएँ। यह सारे स्टेप्स को फिर दूसरी तरफ भी दोहरायें।

​भुजंगासन

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आयुर्वेद विशेषज्ञ नीतिका बताती हैं कि इस आसन को शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार के लिए भी जाना जाता है। साथ ही इस आसन को करने से आपके पेट के नीचले भाग के अंगों को प्रोत्साहित करती है। और तनाव और मतली की समस्या से भी राहत दिलाता है।

कैसे करें- अपने दोनो पैरो पर सीधी रीढ़ की हड्डी को रखते हुए बैठ जाइए। इसके बाद सांस अंदर लेते हुए दोनो हाथ को ऊपर उठाएं। अब सामने की ओर झुकते हुए दोनों हाथों को आगे समानांतर फैलाएं और सांस छोड़ते हुए हथेलियों को जमीन पर टिका दें। फिर सीने को जमीन की ओर धीरे-धीरे तब तक लेते जाएं, जब तक वह हाथों की सीध में न आ जाए। फिर हाथों को सीधा करते हुए तथा पेट को जमीन से लगाते हुए सीने को आगे और ऊपर की ओर करें। अब इस स्थिति में पीठ को धनुषाकार बनाते हुए सिर को आगे की ओर झुकाते हुए जमीन पर टिका दें। कुछ देर तक इसी स्थिति में रहें। अब सांस छोड़ते हुए, अपने सिर को ऊपर उठाएं। हथेलियों को उठाएं। जांघों और भुजाओं को सीधा करते हुए धीरे-धीरे पीठ को ऊपर की और उठाते हुए सिर और पूरे शरीर को पीछे ले जाते हुए वापस पहले वाली मुद्रा में वापस आ जाएं।

​सेतु बंधासन

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आयुर्वेद विशेषज्ञ नीतिका के अनुसार यह आसन शरीर के तनाव को कम करने के साथ ही ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने का भी काम करती है। यह आसान पाचन तंत्र के साथ पेट के नीचले भाग के अंगों को प्रोत्साहित करती है।

कैसे करें- सबसे पहले जमीन पर पैर फैला कर सीधे लेट जाएं। पंजे ऊपर और हाथ शरीर से चिपके हों। अब हाथों को कमर के बगल में रखें। और पैरों को मोड़ लें। इस दौरान शरीर सीधा होना चाहिए। और सिर जरा सा भी मुड़ा हुआ न हो। हाथ से कमर को थोड़ा उठाएं। ध्यान रहे कोहनी जमीन पर ही रहे। वहीं पैरों को फैला लें। कंधे जमीन को छूते हुए होने चाहिए। आसन से बाहर निकलने के लिए सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे रीढ़ को नीचे लाएं।

​नौकासन

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आयुर्वेद विशेषज्ञ बताती हैं कि नौकासन पेट और इससे नीचले तरफ के अंगों को एक्टिव बनाता है। साथ ही पाचन क्रिया में सुधार और तनाव को कम करने में भी मदद करता है।

कैसे करें- इस आसन को करने के लिए पहले दंडासन में बैठ जाएं। फिर पैरों को फैला लें। कमर से ऊपर का हिस्सा सीधा और हाथों को कमर के पीछे जमीन पर टिका दें। पीठ को पीछे की ओर झुकाएं। हाथों की कोहनियों को मोड़ लें और पैरों को भी घुटने से मोड़ लें। सिर्फ कूल्हे और हाथ-पैर के पंजे जमीन से छूएं। अब पैर को हवा में ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रहें कि घुटने सीधे हों और शरीर पीछे की ओर झुका रहे। हाथों को घुटनों की सीध में फैला लें। अगर इसमें दिक्कत हो तो पीठ को पीछे जमीन पर टिका भी सकते हैं। वी के आकार में शरीर को ले जाएं।

​सलंब भुजंगासन

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आयुर्वेद विशेषज्ञ बताती हैं कि यह आसन आपके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली में सुधार के साथ पेट और इसके निचले अंगों को एक्टिव बनाता है।

कैसे करें- यह योगासन करने के लिए आपको पहले पेट के बल लेटकर पैर के दोनों पंजो को समान्तर रखें और माथे को जमीन पर टिकाना होगा। ध्यान रखें कि हाथ तने हुए हो और हथेलियाँ ज़मीन की ओर तथा भुजाऐं ज़मीन को छूती रहें। एक गहरी श्वास लें और नाभि से उपरी भाग को ऊपर की ओर उठाएं। भुजाओं की सहायता से धड़ को जमीन से दूर पीछे की ओर खींचें। सजगता के साथ श्वास लेते और छोडते रहें और धीरे-धीरे रीढ़ की हड्डी के हर हिस्से पर ध्यान ले जाएं। आसन से बाहर निकलने के लिए श्वास छोडते हुए, अपने पेट, छाती और फिर सिर को धीरे-धीरे जमीन की ओर नीचे लाएं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।





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