why yami gautam silent on recent issues: Exclusive: Why Yami Gautam remained silent on recent issues? says this is a democracy there is a right speak or not – Exclusive: क्यों हालिया मुद्दों पर यामी गौतम रहीं चुप? बोलीं- ये लोकतंत्र हैं यहां कहने के साथ न बोलने का भी अधिकार है

ऐक्ट्रेस यामी गौतम को बॉलिवुड में दस साल हो चुके हैं। उन्होंने इस पारी की शुरुआत साल 2012 में आई ‘विक्की डोनर’ फिल्म से की। इस एक दशक में 33 वर्षीय यामी गौतम ने ‘बदलापुर’, ‘सनम रे’, ‘काबिल’, ‘उरी-द सर्जिकल स्ट्राइक’, ‘बाला’ और ‘भूत पुलिस’ जैसी फिल्में कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी हालिया फिल्म ‘ए थर्सडे’ है जो साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म के जरिए निर्देशक बेहजाद खंबाटा ने सिस्टम की विफलता, रेप घटनाएं और महिला हिंसाओं के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की है। इस फिल्म की मुख्य नायिका ऐक्ट्रेस यामी गौतम हैं जिन्होंने अपने अभिनय से सभी का ध्यान खींचा है। नवभारत टाइम्स के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में यामी गौतम ने कई विषयों पर बातचीत की। पढ़िए इस इंटरव्यू के प्रमुख अंश को।

फिल्म का सबसे अहम किरदार जब आपको मिला तो आपका क्या रिएक्शन था?

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मेरा मानना है कि फिल्म सभी किरदारों से बनती है। ये नेहा धूपिया, डिंपल कपाड़िया, अनुज कुलकर्णी, करणवीर शर्मा और तमाम बच्चों के समेत सभी कलाकारों की मेहनत है। जब ये कहानी मेरे पास आई तो काफी समय तक ये स्क्रिप्ट मेरे पास रही। जब मैंने ये कहानी पढ़ी तो मैंने डायरेक्टर बेहजाद को फोन किया और कहा कि मैं निश्चिततौर पर इस फिल्म को करना चाहती हूं। ये बहुत चैलेंजिंग रही है। जब भी आप भी कोई महत्वपूर्ण बात को कहना चाहते हैं तो वह चुनौतिपूर्ण ही होता है। जब मैंने इस चुनौती को स्वीकार किया तो मुझे एहसास हुआ कि ये वाकई बहुत मुश्किलों से भरा था।

‘ए थर्सडे’ क्यों एक जरूरी फिल्म है?

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इस फिल्म की सबसे अच्छी बात मुझे इसका सार लगा, जो बताती है कि ये फिल्म क्या कहना चाहती है और क्यों महत्वपूर्ण है। इस फिल्म की खासियत ये रही कि ये महज साइकोलॉजिकल थ्रिलर ड्रामा ही नहीं बल्कि इसके प्रमुख केंद्र से लोग खुद को कनेक्ट पाए है।

पिछले कुछ समय से अभिनेत्रियों पर आधारित फिल्में आ रही हैं। इस फ़िल्म की दारोमदारी पूरी तरह आपके कंधों पर हैं इसे किस तरह देखती हैं?
पहले भी मेरे पास इस तरह के कुछ रोल्स आए थे लेकिन ‘ए थर्सडे’ एक ऐसी स्क्रिप्ट थी जिसे मैं अपने कंधों पर लेने के लिए पूरी तरह से तैयारी थी। आजकल अलग-अलग विषयों पर फिल्में बनाई जा रही हैं। न सिर्फ महिलाओं की स्थिति पर बल्कि उनकी चुनौतियों से लेकर और भी दूसरे कई विषयों को कवर किया जा रहा है। इस तरह की फिल्में देखने के लिए लोग एकदम तैयार हैं।

आप मेल ऐक्टर हो, फीमेल ऐक्टर हो, बड़े सुपरस्टार हो या फिर आपकी नई शुरुआत हो, अगर आप अच्छी फिल्म या स्क्रिप्ट का हिस्सा बनते हैं तो लोग आपके काम को जरूर पसंद करते हैं। मुझे लगता है कि बस ऐसे ही अच्छी फिल्में बनती रहनी चाहिए और अच्छी परफॉर्मेंस होती रहनी चाहिए। मुझे कुछ लोगों ने कहा कि ये फिल्म मेरे लिए टर्निंग प्वाइंट है। मैं चाहती हूं कि हर फिल्म कलाकार के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हो।

यह फिल्म महिला हिंसा पर बात करती है। आप कह रही हैं कि इस तरह फिल्में बनती रहनी चाहिए लेकिन आप इन विषयों पर असल जिंदगी में इतनी मुखर नहीं रही हैं?

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इसके पीछे कारण है। अक्सर ऐक्टर या पब्लिक फीगर की बातों को मोड़-तरोड़कर कर पेश किया जाता रहा है। हम भी इंसान ही हैं। जहां बोलने की जरूरत होगी वहां मैं बोलूंगी। किसी विषय पर मेरी जानकारी और जरूरत के हिसाब से मैं अपनी आवाज उठाऊंगी। आप मीडिया से हैं, आप जानते हैं कि कोई बोलता कुछ है, लोग समझते कुछ हैं और फिर तीसरे से पूछते हैं कि क्या मामला है। ऐसे में बात का अर्थ ही बदल जाता है। यही एक कारण है कि आजकल पब्लिक फिगर्स बहुत सारे मामलों पर रिएक्ट करना नहीं चाहते हैं। हम ऐसा कई दफा देख चुके हैं कि कैसे अर्थ का अनर्थ हो जाता है।

किसी भी विषय पर बात करने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी आपके पास होनी चाहिए। आजकल हर किसी के पास माध्यम है और वह अपनी बात रख सकते हैं। मेरे पास फिल्में हैं और यही एक जरिया है जिसके जरिए मैं अपनी बात रखूं। अगर मेरी फिल्मों के जरिए आपतक मेरी बात नहीं पहुंच रही तो और क्या ही जरिया होगा। मेरे पास बस यही एक माध्यम है। जहां मुझे लगेगा कि मुझे बात करनी है और अपनी बात कैसे रखनी चाहिए तो मैं जरूर व्यक्त करूंगी। ये एक लोकतंत्र है। यहां अपनी बात कहने के साथ-साथ अपने विचार को रिजर्व रखने का भी उतना ही अधिकार है।

आईएएस बनने की चाह रखने वाली यामी गौतम कैसे ऐक्टर बन गईं?

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मैंने लॉ की पढ़ाई की है। मैं बहुत रिजर्व और शर्मिली रही हूं। मेरी मां, बहनें और दोस्त शुरू से जानते हैं कि मिमिक्री और ऐसी कुछ बातें जिस पर आपको विश्वास नहीं होगा कि मुझे क्या-क्या करना अच्छा लगता था। मेरा शुरू से ही ऐक्टिंग की ओर झुकाव रहा है। मैं एक मिडिल क्लास फैमिली से आती हूं और मुंबई जैसे शहर आने से पहले मुझे दस बार सोचना पड़ा था। मेरा काम ही हमेशा से मेरी आवाज रही है। मुझे अचानक ये मौका मिला, मैंने इससे पहले कभी सोचा नहीं था कि मैं ऐक्टर बनूंगी। ये बिल्कुल भी प्लान नहीं था। सब कुछ अचानक हो गया।

मौजूदा समय में आप किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं?

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फिलहाल मेरे पास कई फिल्में हैं। अभिषेक बच्चन के साथ मैं ‘दसवीं’ में आईपीएस ऑफिसर का किरदार निभा रही हूं। इसके अलावा ‘लॉस्ट’ भी है, जोकि मेरे लिए बहुत खास फिल्म है। जिसमें मैं एक जर्नलिस्ट का किरदार निभा रही हूं। इसके अलावा ‘ओह माय गॉड 2’ और एक अन्य फिल्म है जिस पर भी मैं काम कर रही हूं और जल्द ही फैंस के साथ जानकारी शेयर करूंगी।

कुल मिलाकर मैं ये कहना चाहती हूं कि जिस तरह के किरदार, खास तौर पर पिछले साल से मैंने निभाए हैं, बतौर ऐक्टर मेरे लिए ये इच्छाएं पूरी होने जैसा है। ऐसा लगता है कि इतने सालों की मेहनत रंग लाई है। ‘ए थर्सडे’ को लेकर मेरे पैरेंट्स ने एक बात कही कि एक वक्त जरूर आता है, जब आपको मेहनत का फल जरूर मिलता ही है।

आपका ओटीटी का अनुभव कैसा रहा?

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मैं ऐक्टर हूं, बड़े पर्दे पर देखिए या ओटीटी पर, मेरा काम ऐक्टिंग करना है। वक्त आपको किसी भी परिस्थिति में ढलना सीखा देता है। ओटीटी नहीं होता तो कलाकारों, प्रड्यूसर से लेकर अन्य विभागों के आर्टिस्ट को बहुत नुकसान होता। ओटीटी के जरिए एक नया माध्यम खुल गया है। जिसकी अलग पहचान और अपनी ऑडिंयस है। आज के वक्त में दर्शकों को थिएटर तक ले जाना आसान नहीं होगा। हम कलाकारों को अब ज्यादा मेहनत करनी होगी ताकि दर्शक थिएटर पहुंचे। ये बहुत चुनौतिपूर्ण और कठिन होने वाला है। दो साल में ये एक आदत बन चुकी है कि घर पर बैठकर आसानी से फिल्म देखें। इसमें वक्त लगेगा। खैर हम दोनों प्लेटफॉर्म्स पर एक साथ में काम कर सकते हैं।

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