Watery Eyes, इन 5 वजहों से बिना रोए ही बेबी की आंखों से आ सकता है पानी, कुछ तो घर पर ही ठीक कर लेंगे आप – watery eyes causes in babies


नन्‍हे शिशु की देखभाल पूरी तरह से मां-बाप की जिम्‍मेदारी होती है। शिशु बोलकर अपनी तकलीफ नहीं बता सकता है इसलिए पैरेंट्स को ही अपने बच्‍चे की हर जरूरत और तकलीफ को उसके बिना बोल समझने की समझ होनी चाहिए। आपने देखा होगा कि कुछ बच्‍चों की आंखों से पानी निकलता जबकि वो रो रहे नहीं होते हैं। कुछ बच्‍चों में वॉटरी आइज की प्रॉब्‍लम होती है।

कई स्थितियों और कारकों से शिशुओं की आंखों से पानी आ सकता है। अधिकांश कारणों का समाधान माता-पिता घर पर की कर सकते हैं, जबकि कुछ चिकित्सा स्थिति के कारण हो सकते हैं। इस पोस्ट में बताया गया है कि बच्चे की आंखों में पानी क्यों आता है और ऐसे में माता-पिता को क्या करना चाहिए।

क्‍यों आता है आंखों से पानी

वयस्कों की तुलना में शिशुओं और बच्चों को हर साल ज्‍यादा जुकाम होता है। आंखों में पानी आने के प्रमुख कारणों में से एक सामान्य सर्दी-जुकाम है। सामान्य सर्दी के दौरान, सफेद रक्त कोशिकाएं संक्रमण से लड़ती हैं और ऐसे पदार्थ उत्पन्न करती हैं जो नाक के म्यूकोसा की सूजन का कारण बनते हैं।

ये इस हिस्‍से में रक्त वाहिकाओं को भी चौड़ा करती हैं, जिसके परिणामस्वरूप नाक में कंजेशन या नाक बहने लगती है। टिअर डक्‍ट में भी इसी तरह की प्रक्रिया होती है, जिससे आंख से नाक तक आंसू आ जाते हैं। इससे डक्ट बंद हो जाता है और इस तरह आंखों में आंसू आ जाते हैं।

​आंखों में इंफेक्‍शन

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आंख में इंफेशन होने का पहला लक्षण है आंख से आंसू आना। कई आई इंफेक्‍शन से शिशुओं में आंखों में पानी आ सकता है, जिनमें से एक सबसे आम संक्रमण कंजक्टिवाइटिस है। इस संक्रमण में आंखों से पानी आ सकता है। इसके अन्‍य लक्षण हैं लालिमा और आंखों में लगातार जलन होना।

फोटो साभार : TOI

​एलर्जी

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यदि आपके शिशु को एलर्जी है, तो उसकी आंखों में पानी आना इसका एक लक्षण हो सकता है। शिशुओं को हवा में पराग से लेकर घर के पेट के फर तक किसी भी चीज से एलर्जी हो सकती है। त्वचा में पित्ती और चेहरे पर सूजन जैसे अन्य लक्षणों के साथ आंखों से पानी आने का मतलब है कि बच्‍चे को एलर्जी हुई है।

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​टिअर डक्‍ट का ब्‍लॉक होना

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आंख के ऊपर स्थित लैक्रिमल ग्रंथि द्वारा आंसू उत्पन्न होते हैं। एक बार जब आंसू आंख की सतह से होकर चले जाते हैं, तो वे आंख के भीतरी कोने में दो छोटे छिद्रों में प्रवेश कर जाते हैं। प्रत्येक छेद एक डक्ट की ओर जाता है। दो नलिकाएं एक बड़ी ट्यूब में प्रवेश करती हैं, जो आंसू वाहिनी है, जिसे नासोलैक्रिमल डक्ट भी कहा जाता है। इस प्रकार आंसू वाहिनी आंख से अतिरिक्त आंसू को नासिका गुहा में निकालने का काम करती है।

टिअर डक्‍ट में रुकावट आंसुओं को नाक गुहा में जाने से रोक सकती है। आंखों में ज्यादा आंसू आने से उसमें पानी आ सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑप्थल्मोलॉजी के अनुसार, लगभग 20% नवजात शिशुओं की जन्म के समय आंसू नलिकाएं ब्‍लॉक होती हैं।

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​श्‍वसन मार्ग में इंफेक्‍शन

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नाक बहने के साथ-साथ आंख से पानी आना, एक सामान्य सर्दी जैसे ऊपरी श्वसन संक्रमण के लक्षणों में से है। अन्य संक्रमण जो ऊपरी श्वसन प्रणाली को प्रभावित करते हैं, विशेष रूप से नासिका गुहा, भी शिशुओं में आंखों से पानी आने का कारण बन सकता है

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​डॉक्‍टर को कब दिखाएं

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आंख के ऊतकों में लाली और सूजन, आंख से मवाद या पीले रंग का स्त्राव होना, आंखों पर चिपचिपाहट रहना, पलकों की सूजन, नाक, गले या चेहरे के किसी हिस्से में सूजन, चिड़चिड़ापन और रोने की वजह से सोना या खाना ना खा पाना, बुखार, ठीक से भोजन न करना, कम एक्टिव रहने जैसे लक्षण दिखने पर आपको बच्‍चे को डॉक्‍टर को दिखाना चाहिए।

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