Tuesday, June 28, 2022
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Uttar Pradesh Ambulance: UP News: कागजों में मिली एंबुलेंस, अस्पताल भी पहुंचाया… केस बढ़ने पर अफसरों ने शुरू की पड़ताल तो खुलने लगी पोल – fraud corruption in govt ambulance service entry in uttar pradesh districts enquiry news


लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर और बहराइच के ये केस बानगी भर हैं। सरकारी ऐंबुलेंस सेवा 102 की कई जिलों की लॉगबुक में ऐसी ढेरों फर्जी एंट्रीज दर्ज हैं। यूपी के जिलों की 118 स्वास्थ्य इकाइयों से जुडीं इन ऐंबुलेंस के फेरों में अप्रैल 2021 की तुलना में अप्रैल 2022 में 50 प्रतिशत तक की वृद्धि दिखी तो अफसरों के कान खड़े हो गए।

इस गैरतार्किक बढ़ोतरी के मद्देनजर शासन ने 102 ऐंबुलेंस सेवा की लॉग बुकों के आंकड़ों की जांच करने के आदेश जिलों के सीएमओ को दिए। सतर्कतावश ऐंबुलेंस सेवा 108 के फेरों की जांच करने के आदेश भी मंडलीय अपर निदेशकों को दिए गए। ऐंबुलेंस सेवा 102 की जांच के आदेश राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने तो ऐंबुलेंस सेवा 108 के फेरे सत्यापित करने के आदेश डीजी हेल्थ ने डॉक्टर वेदब्रत सिंह ने जारी किए हैं।

अंबेडकरनगर महरुआ गांव की राधा और सुगौती गांव की रहने वाली जाह्नवी का नाम ऐंबुलेस सेवा की लॉगबुक में दर्ज है। 25 मार्च की एंट्री में दिखाया गया है कि दोनों को कटेहरी सीएचसी तक ऐंबुलेंस से पहुंचाया गया। चिकित्सा विभाग ने इनसे फोन पर बात की तो पता चला कि ये दोनों कभी ऐंबुलेंस से अस्पताल गई ही नहीं।

केस-1


अंबेडकरनगर में जब स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने लॉगबुक देखी तो सामने आया कि कई ऐंबुलेंस ऐसी हैं जो दिन में 19-20 फेरे तक लगा रही हैं। जबकि गांवों से जिला अस्पताल तक एक फेरा लगाने में कम से कम तीन घंटे लगते हैं। ऐसे में 24 घंटों में अधिकतम 8 फेरे ही संभव हैं। अधिकारियों ने ज्यादा फेरे लगाने वाली ऐंबुलेंसों को चिह्नित करके उनकी लॉगबुक में दर्ज एंट्री का सत्यापन शुरू करवा दिया है।

बहराइच के पयागपुर ब्लॉक के कुशभवनापुर गांव में रहने वाली पिंकल शुक्ला का नाम भी ऐंबुलेंस सेवा के लॉगबुक में दर्ज है। तीन महीने पहले की इस एंट्री में दिखाया गया है कि गर्भवती पिंकल को ऐंबुलेंस से सरकारी अस्पताल तक ले जाया गया। फोन करने पर पता चला कि पिकंल के परिवारीजन उन्हें निजी गाड़ी से अस्पताल ले गए थे।

केस-2

लखीमपुर में जांच का आदेश पहुंचा तो यहां के ऐंबुलेंस कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष पवन शुक्ल ने सीएमओ डॉक्टर शैलेंद्र भटनागर को ज्ञापन देकर पारदर्शी जांच करवाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐंबुलेंस सेवा देने वाली कंपनी अपने कर्मचारियों को रोजाना 30 से 40 केस का टारगेट देती है।

टारगेट पूरा करने के लिए फर्जी रेकॉर्ड भरवाए जाते हैं। टारगेट पूरा न करने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया जाता है। फिलहाल जिले में लॉगबुक की एंट्रीज की जांच की जा रही है। वहीं, कई जिले ऐसे भी हैं जहां सिर्फ कमिटियां बनी हैं, जांच नहीं शुरू हुई है।



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