up pashupalan vibhag fraud: विधानभवन में साजिश, लपेटे में DIG… पशुपालन विभाग में 9 करोड़ की ठगी ने उड़ा दी थी योगी सरकार की नींद – uttar pradesh pashupalan vibhag scam what happened know whole story


लखनऊः उत्तर प्रदेश के पशुपालन विभाग में 3 साल पहले करोड़ों की ठगी मामले ने राज्य की सरकार को हिलाकर रख दिया था। मामले में पशुधन राज्य मंत्री के प्रधान निजी सचिव से लेकर आईपीएस अधिकारी तक लपेटे में आए थे। 9 करोड़ 72 लाख रुपये की ठगी के इस मामले में निलंबित डीआईजी अरविंद सेन समेत 21 आरोपियों के खिलाफ नई सरकार के गठन से पहले ही ऐक्शन लिया गया है। सभी पर गैंगस्टर ऐक्ट लगाया गया है। ऐसे में एक बार फिर से यह मामला चर्चा में आ गया है। आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या था?

क्या था मामला
बात साल 2018 की है। मध्य प्रदेश के एक व्यापारी मंजीत भाटिया ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में करोड़ों की ठगी का एक केस दर्ज कराया था। यह केस दर्ज होने के बाद सियासी महकमे लेकर अफसरशाही तक में हड़कंप मच गया। मामला पशुधन विभाग से जुड़ा हुआ था। भाटिया ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि पशुधन विभाग में 214 करोड़ रुपये के टेंडर के लिए उनसे 9 करोड़ 72 लाख के कमीशन की मांग की गई थी।

तीन फीसदी कमीशन
भाटिया ने बताया कि उनसे कमीशन के तौर पर तीन फीसदी टेंडर के एवज में मांगी गई थी। इसमें से एक करोड़ रुपये का उन्होंने भुगतान भी किया था। इसके बाद अगस्त 2018 को उन्हें विधानसभा सचिवालय में बुलाया गया। यहां सरकारी कार्यालय में आजमगढ़ के रहने वाले आशीष राय ने भाटिया से एके मित्तल बनकर मुलाकात की थी। राय ने भाटिया को इस दौरान फर्जी वर्क ऑर्डर की कॉपी भी दे दी। इसके बाद भी उनसे करोड़ों रुपये वसूले गए।

मामले में तत्कालीन पशुधन राज्यमंत्री जय प्रकाश निषाद के प्रधान निजी सचिव रजनीश दीक्षित और निजी सचिव धीरज देव समेत कई लोग शामिल थे। आरोप है कि सभी ने मिलकर भाटिया से पैसे वसूले और उन्हें फर्जी टेंडर लेटर थमा दिया। इस बात की जानकारी होते ही भाटिया ने उनसे अपने पैसे वापस मांगे। इस पर आरोपियों ने उन्हें धमकाते हुए पैसे वापस करने से मना कर दिया। परेशान होकर भाटिया ने मामले की शिकायत पुलिस में कर दी। तब जाकर मामला खुला।

जून 2020 में दर्ज हुई थी एफआईआर
पुलिस ने मामले की जांच की और आरोप सही पाए। इसके बाद 13 जून 2020 को हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज किया गया। मामले में आशीष राय, मोंटी गुजर रूपक राय, संतोष मिश्रा, एके राजीव, अमित मिश्रा, उमाशंकर तिवारी, रजनीश दीक्षित, डीबी सिंह, अरुण राय, अनिल राय, धीरज कुमार और उमेश मिश्र के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं में रिपोर्ट दर्ज करवाई गई थी। इस मामले की विवेचना एसीपी गोमतीनगर को दी गई थी।

इस मामले की विवेचना में निलंबित डीआईजी अरविंद सेन और अन्य लोगों का नाम भी प्रकाश में आया था। 21 माह में की गई जांच में 21 लोग आरोपित पाए गए थे। अरविंद सेन पर आरोप है कि एसपी सीबीसीआईडी रहते हुए उन्होंने भाटिया को अपने दफ्तर में बुलाकर धमकाया था। मामले में अरविंद सेन का नाम जब सामने आया तो उन पर तत्काल ऐक्शन लिया गया और उन्हें निलंबित कर दिया गया। सभी आरोपियों पर अब गैंगस्टर ऐक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी।



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