Monday, August 8, 2022
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tuberculosis in india aiims and world health organization module: नाखून और बाल को छोड़कर किसी भी अंग में हो सकती है टीबी : डॉक्टर


नई दिल्ली: फेफड़े के अलावा दूसरे अंगों में होने वाली टीबी की जांच और इलाज के लिए एम्स (Delhi AIIMS) ने एक मॉड्यूल तैयार किया है। इसकी मदद से पूरे देश में हर प्रकार की टीबी की जांच और इलाज की गाइडलाइंस तैयार होगी। एम्स के मेडिसिन डिपार्टमेंट ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साथ मिलकर यह मॉड्यूल तैयार किया है। इसके तहत डॉक्टरों को ट्रेनिंग दी जाएगी। यह मॉड्यूल पूरे देश में लॉन्च किया जाएगा।

फेफड़े के अलावा कई अंगों में टीबी
एम्स के मेडिसिन विभाग के डॉ. नीरज निश्चल ने बताया कि फेफड़े के अलावा भी कई अंगों में टीबी होती है, जिसे एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी कहा जाता है। नाखून और बाल को छोड़कर शरीर के किसी भी अंग में टीबी हो सकती है। मगर, इसको लेकर गंभीरता की कमी है। ऐसे मरीजों की समय पर जांच नहीं हो पाती है। बीमारी का समय पर इलाज न होने से इतनी गंभीर हो जाती है कि बाद में टीबी की दवा से वह ठीक नहीं होती। उसे ठीक करने के लिए दूसरे तरीके की जरूरत होती है।

2025 में टीबी को हराएगा भारत!

डॉ. नीरज ने कहा कि लंग्स में टीबी के अलावा लंग्स में पानी, लिम्फनोड में टीबी, आंत में टीबी, बोन टीबी, पेट, लिवर, ब्रेन में टीबी हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस ओर ध्यान ही नहीं जाता है। 2025 में टीबी के खिलाफ जीत का लक्ष्य है।

42% एक्स्ट्रा पल्मोनरी टीबी के मरीज
इकनॉमिक सर्वे के अनुसार, दिल्ली में 2019 में 79828 मरीजों का पब्लिक सेक्टर और 28088 का प्राइवेट सेक्टर में इलाज किया जा रहा था। उनमें से 58 प्रतिशत पल्मोनरी टीबी के मरीज थे और 42 प्रतिशत एक्स्ट्रा पल्मोनरी के मरीज थे। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह डेटा पर्याप्त नहीं है। कई मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें एकसाथ कई अंगों में टीबी होती है।

कोविड के साथ टीबी के 190 मरीजों का इलाज

एलएनजेपी के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि पिछले साल अस्पताल में कुल 766 टीबी के मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया। इसके अलावा 5,671 मरीजों का इलाज ओपीडी बेसिस पर किया गया। उनमें से 2603 टीबी के नए मरीज थे और 3068 टीबी के पुराने मरीज थे। उन्होंने कहा कि कोविड काल में टीबी एक चुनौती थी, लेकिन अस्पताल ने इस पर अच्छा काम किया और 190 मरीज ऐसे थे, जिन्हें कोविड के साथ साथ टीबी भी थी। उनका इलाज किया गया।

देरी से पहुंच रहे मरीज
फोर्टिस शालीमार बाग के पल्मोनोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. विकास मौर्या ने कहा कि टीबी के मरीजों में करीब 25-30 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। कोविड की वजह से जांच में हुई देरी इसका कारण है। कोविड की वजह से मरीजों की इम्युनिटी भी कमजोर हुई है। इलाज के लिए एंटी-इंफ्लेमेट्री दवाओं के इस्तेमाल की वजह से भी टीबी के मामले फिर से सक्रिय हुए हैं।



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