Sunday, August 14, 2022
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Tuberculosis, यूट्रस में लग जाए ये बीमारी तो कभी मां नहीं बन पाती है औरत, इलाज के बाद भी रहती है इनफर्टिलिटी – causes symptoms and treatment for genital or uterus tuberculosis in woman


फीमेल जेनाइटल ट्यूबरक्‍यूलोसिस (genital tuberculosis) एक बैक्‍टीरियल इंफेक्‍शन है जो महिलाओं के प्रजनन तंत्र में होता है। अक्‍सर इसका संबंध महिलाओं में इनफर्टिलिटी से होता है। इस बीमारी के शुरुआती स्‍टेज में कोई लक्षण नहीं दिखता है और इसका सबसे आम कारण माइक्रोबैक्‍टीरियम के फेफड़ों से प्रजनन मार्ग में आना है।

गर्भाशय में ट्यूबरक्‍यूलोसिस सबसे पहले फैलोपियन ट्यूब में आता है और यहां पर यह ट्यूबों को ब्‍लॉक कर सकता है या गर्भाशय और ओवरी में फैल सकता है। कुछ दुर्लभ मामलों में यह बीमारी गर्भाशय ग्रीवा, योनि और वल्‍वा तक पहुंच जाता है। गर्भाशय में ट्यूबरक्‍यूलोसिस को जेनाइटल ट्यूबरक्‍यूलोसिस भी कहा जाता है। भारत में इनफर्टिलिटी का एक बड़ा कारण जेनाइटल ट्यूबरक्‍यूलोसिस भी है जिसमें बिना कोई लक्षण दिखे यह बीमारी 10 से 20 सालों तक बनी रहती है। इनफर्टिलिटी की जांच करवाने पर डॉक्‍टर को इस बीमारी का पता चलता है।

यह पाया गया है कि लगभग सभी मामलों में फैलोपियन ट्यूब प्रभावित होती हैं, इसके बाद 50% में एंडोमेट्रियम (गर्भाशय की परत), 20% अंडाशय, 5% गर्भाशय ग्रीवा और योनि और पल्‍मोनरी टीबी से प्रभावित 1% से कम महिलाओं में वल्‍वा टीबी होता है।

आगे जानिए जेनाइटल टीबी के लक्षण और इससे जुड़ी अतिरिक्‍त जानकारी के बारे में।

​लक्षण क्‍या हैं

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इसमें सेक्‍स के दौरान दर्द, मासिक चक्र के समय दर्द और पेल्विक हिस्‍से में दर्द रहता है। इसके अलावा पेट के निचले हिस्‍से में दर्द, असहजता और पीठ दर्द रहता है। कुछ लोगों में जिस हिस्‍से पर टीबी होता है, वहां की स्किन, यौन अंग, गर्भाशय ग्रीवा या योनि पर घाव होने लगते हैं। इस स्थिति में महिला के लिए नैचुरली कंसीव करने के चांसेस बहुत कम होते हैं।

फोटो साभार : TOI

​क्‍या इससे मिसकैरेज हो सकता है

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ऐसा कम ही देखा गया है जब जेनाइटल टीबी की वजह से महिला का मिसकैरेज हुआ हो। टीबी की गंभीर प्रूसति जटिलताओं में से एक गर्भपात भी है।

​प्रेग्‍नेंसी में टीबी हो जाए तो

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अगर किसी महिला को प्रेग्‍नेंसी में टीबी हो गया है तो उसे सबसे पहले अपना चेकअप करवाना चाहिए। टीबी का इलाज ना करवाने से बच्‍चे का जन्‍म के समय वजन कम हो सकता है या उसे जन्‍म के समय टीबी जकड़ सकता है। मां का स्‍ट्रेस लेवल इससे काफी बढ़ सकता है। इलाज से पहले असली स्थिति को समझना अहम होता है। लेटेंट या एक्टिव टीबी के आधार पर ट्रीटमेंट का समय निर्भर करता है।

फोटो साभार : TOI

​प्रेगनेंट होने के चांसेस

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आपको जानकर दुख होगा कि जेनाइटल टीबी से ग्रस्‍त महिलाओं के प्रेगनेंट होने के चांसेस बहुत कम होते हैं और इलाज के बाद भी इसकी संभावना काफी कम रहती है। लेकिन आप आईवीएफ जैसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट की मदद ले सकती हैं।

ncbi के मुताबिक जेनाइटल टीबी महिलाओं में बांझपन का एक प्रमुख कारण है और आम तौर पर संक्रमण की प्रकृति और नैदानिक चुनौतियों की वजह से इसके इलाज में कई मुश्किलें आती हैं।

फोटो साभार : TOI



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