russia and ukraine crisis: रूस-यूक्रेनः मौजूदा हालात में युद्ध की नौबत आना किसी भी पक्ष के लिए अच्छा नहीं है, opinion on russia and ukraine conflict


यूक्रेन को लेकर रूस और नाटो में टकराव की आशंकाओं के बीच अचानक एक बड़ी कूटनीतिक पहल करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों सोमवार को मॉस्को पहुंचे। लगभग उसी समय जर्मन चांसलर ओलफ शोल्ज ने वॉशिंग्टन जाकर अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से मुलाकात की। जर्मन चांसलर के अमेरिका दौरे का मकसद हालांकि इस धारणा को गलत साबित करना था कि यूक्रेन के मसले पर नाटो में किसी तरह का आंतरिक मतभेद है या यह कि जर्मनी इस मसले पर आगे बढ़ने में हिचक रहा है। मुलाकात के बाद बाइडन और शोल्ज दोनों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा भी कि इस मसले पर वे सब एक साथ हैं। मगर इस एकता प्रदर्शन के बावजूद सबका ध्यान मॉस्को में हो रही पूतिन और मैक्रों की मुलाकात पर ही लगा रहा। यूक्रेन सीमा पर एक लाख तीस हजार सैनिकों का जमावड़ा करने के बावजूद रूस बार-बार कह रहा है कि यूक्रेन में सैन्य दखल देने का उसका कोई इरादा नहीं है। अमेरिका और यूरोपीय देशों की दलील है कि अगर यह सच है तो वह अपने सैनिकों को सीमा पर से हटा ले, मगर रूस इसके लिए तैयार नहीं। उससे पहले वह यह वादा चाहता है कि यूक्रेन व अन्य पूर्व सोवियत राष्ट्रों को नाटो में शामिल नहीं किया जाएगा। ऐसा कोई आश्वासन देने को अमेरिका और यूरोपीय देश राजी नहीं हैं। लिहाजा पिछले कई दिनों से तनावपूर्ण गतिरोध की यह स्थिति बनी हुई है। हालांकि मौजूदा हालात में युद्ध की नौबत आना किसी भी पक्ष के लिए अच्छा नहीं है।

रूस से गैस सप्लाई बाधित होना जहां जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों को भारी पड़ेगा, वहीं चीन को अलग-थलग करने की अमेरिका की रणनीति भी इससे प्रभावित होगी। यह जरूर है कि घरेलू राजनीतिक मजबूरियों के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति अभी रूस के सामने किसी भी रूप में झुकते हुए दिखने का रिस्क नहीं उठा सकते। अफगानिस्तान से सेना की वापसी का फैसला पहले ही उनकी छवि को खासा नुकसान पहुंचा चुका है। ऐसे माहौल में उपयुक्त कूटनीतिक पहल सबके लिए राहत साबित हो सकती है। ध्यान रहे, मॉस्को के लिए उड़ान भरने से पहले मैक्रों की पूतिन से फोन पर तीन बातचीत हो चुकी है। उनकी जो बाइडन से भी लंबी बात हुई है। इसके बावजूद मुलाकात से पहले दोनों पक्षों ने साफ कर दिया था कि इस बैठक से तत्काल किसी हल की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। मुलाकात के बाद दोनों के बीच हुई बातचीत का कोई ब्यौरा अभी सामने नहीं आया है, लेकिन किसी पक्ष ने निराशा भी नहीं जताई है। मैक्रों ने यह जरूर कहा है कि अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण हैं। इससे लगता है कि दोनों पक्षों में कुछ बातों को लेकर सहमति जरूर बनी है, लेकिन इस पर अभी बहुत काम करना बाकी है। उम्मीद की जाए कि बातचीत की यह पहल आगे विस्तृत बातचीत की ऐसी जमीन तैयार करेगी, जिस पर खड़े होकर सहमति के पुल तैयार करना मुश्किल नहीं होगा।

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