rivalry between Mukesh Ambani and Gautam Adani is about to get intense know why: ग्रीन एनर्जी के बाद पेट्रोकेमिकल में भी होगी मुकेश अंबानी और गौतम अडानी की जंग!


नई दिल्ली: भारत और एशिया के दो सबसे बड़े रईसों मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) और गौतम अडानी (Gautam Adani) में पिछले कई साल से एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ मची हुई है। अंबानी ने जहां टेलिकॉम (telecom) और रिटेल (retail) में अपना दबदबा स्थापित किया है जबकि अडानी ने ट्रांसपोर्ट (transport) और एनर्जी डिस्ट्रीब्यूशन (energy distribution) में झंडे गाड़े हैं। अंबानी और अडानी अब कई क्षेत्रों में तेजी से अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं जिससे उनमें प्रतिद्वंद्विता बढ़ना तय है।

ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात के उद्योगपतियों अंबानी और अडानी का राजनीति से करीबी रिश्ता रहा है जिससे सत्ता के गलियारों में भी इस प्रतिद्वंद्विता की गूंज सुनाई देना तय है। अडानी सऊदी अरब की दिग्गज तेल कंपनी सऊदी अरामको (Saudi Aramco) के साथ हाथ मिलाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। यह कंपनी अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के तेल कारोबार में निवेश की संभावनाएं तलाश रही थी। दोनों कंपनियों के बीच दो साल तक बातचीत भी चली थी लेकिन पिछले साल नवंबर में यह टूट गई।

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पेट्रोकेमिकल बिजनस
रिलायंस के पास पेट्रोकेमिकल का बड़ा कारोबार है। कंपनी का गुजरात के जामनगर में दुनिया का सबसे बड़ा रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स है। यह कंपनी साथ ही पॉलीमर्स, पॉलीस्टर और फाइबर इंटरमीडिएट्स बनाने वाली बड़ी कंपनी है। यही वजह है कि अरामको की स्कीम में यह फिट बैठती है। लेकिन अडानी भी पेट्रोकेमिकल में उतरने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए वह मुंद्रा पोर्ट के करीब चार अरब डॉलर के निवेश से एक्रिलिक्स कॉम्प्लेक्स बनाना चाहते हैं। इसके लिए उन्होंने BASF SE, Borealis AG और Abu Dhabi National Oil Co. यानी Adnoc के साथ हाथ मिलाया था।

लेकिन कोविड-19 महामारी (Covid-19) के कारण उनकी यह योजना आगे नहीं बढ़ पाई। यह पहला मौका नहीं था जब अडानी को पेट्रोकेमिकल योजना से हाथ पीछे खींचने पड़े। इससे पहले भी उन्होंने ताइवान की CPC Corp. के साथ भी इस दिशा में कोशिश की थी लेकिन यह योजना भी परवान नहीं चढ़ पाई। अडानी के पास कोयले का बड़ा बिजनस है लेकिन वह जानते हैं कि भविष्य ग्रीन एनर्जी का है। यह वजह है कि उन्होंने ग्रीन एनर्जी पर बड़ा दांव खेला है।

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अंबानी-अडानी का टकराव
पिछले साल अडानी ने जब पेट्रोकेमिकल्स के लिए नई कंपनी बनाई तो यह साफ हो गया था कि अंबानी के साथ उनका मुकाबला तय है। माना जा रहा है कि अरामको भारत में एक रिफाइनरी चाहती है। अडानी के साथ हाथ मिलाकर वह अपने इस सपने को पूरा कर सकती है। इससे अंबानी और अडानी सीधे तौर पर पेट्रोकेमिकल के क्षेत्र में आमने-सामने आ जाएंगे। यह पहला मौका नहीं है जब अडानी और अंबानी किसी बिजनस में आमने-सामने आए हैं।

पिछले साल जून में अंबानी ने ग्रीन एनर्जी के कारोबार में उतरने की घोषणा की थी। इसके बाद उनकी कंपनी ने अपने इस कारोबार को बढ़ाने के लिए एक के बाद एक कई कंपनियों का अधिग्रहण किया। रिलायंस ने जामनगर में चार गीगा फैक्ट्रीज बनाने की योजना बनाई है। इनमें से एक सोलर पैनल के लिए, दूसरी बैटरीज के लिए, तीसरी ग्रीन हाइड्रोजन के लिए और चौथी फ्यूल सेल के लिए है। अब तक इस कारोबार में अडानी का ही दबदबा रहा है जो 2030 तक दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी बनाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

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