Sunday, June 26, 2022
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rare surgery of shivangini gohain: Rare Surgery Of Shivangini Gohain, गले में लगा था तीर, 3.5 घंटे की सर्जरी, 6 महीने बाद असम की टीनेजर आर्चर शिवांगिनी ने फिर लगाया निशाना


विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: प्रैक्टिस के दौरान गले में तीर लगने से बुरी तरह घायल हुईं शिवांगिनी गोहेन एक बार फिर से आर्चरी के मैदान में लौट आईं हैं। जनवरी 2020 में प्रैक्टिस के दौरान गले में तीर लगने से शिवांगिनी बुरी तरह जख्मी हो गईं थीं, हालत इतनी खराब थी कि उन्हें एयरलिफ्ट कर असम से दिल्ली के एम्स ट्रामा सेंटर में शिफ्ट करना पड़ा था। डॉक्टरों की टीम ने उनकी सर्जरी कर उन्हें नया जीवन दिया और अब शिवांगिनी फिर से खेल के मैदान में उतर चुकी हैं। हालांकि, शिवांगिनी के सामने अब अपने खेल को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद की जरूरत है, उन्हें बो किट के लिए मदद चाहिए। एम्स के डॉक्टर ने सोशल मीडिया पर मदद की गुहार लगाई तो कई लोग सामने आकर उनकी किट का खर्च उठाने के लिए तैयार भी हो गए हैं।

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स्पाइन कॉड से 0.5 एमएम दूर था : शिवांगिनी का इलाज करने वाले एम्स ट्रॉमा सेंटर के न्यूरो सर्जन डॉ. दीपक गुप्ता ने बताया कि 6 जनवरी 2020 को शिवांगिनी खेलो इंडिया गेम्स के तहत असम के डिब्रूगढ़ में प्रैक्टिस कर रहीं थीं। प्रैक्टिस के दौरान एक अन्य खिलाड़ी का तीर उनके गले में लग गया था। असम के डॉक्टरों ने कोशिश की, लेकिन वो इसे निकाल नहीं पाए। 8 जनवरी की रात को उन्हें एम्स ट्रॉमा सेंटर में शिफ्ट किया गया था। तीर उनकी गर्दन में घुस कर दो हड्डी के बीच में फंसा हुआ था। सर्वाइकल और थोरोसिक जंक्शन के बीच में यानी C7 और D1 के बीच में दाएं से बाएं तरफ गया था। यह स्पाइन कॉड से 0.5 एमएम दूर था। अगर इसमें छू जाता तो बच्ची पूरी जिंदगी अपाहिज हो सकती थी।

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जटिल सर्जरी में निकाला गया तीर: डॉ. दीपक ने कहा कि सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी, क्योंकि सर्जरी के दौरान भी अगर थोड़ी सी गलती होती तो तीर स्पाइनल कॉड को डैमेज कर सकता था। साढ़े तीन घंटे की सर्जरी में यह तीर निकाला गया था। तीर से लंग्स के बाहर की झिल्ली पर असर हुआ था, जिसे मैनेज कर लिया गया। उन्होंने कहा कि जिस रात उसे लाया गया था, उसके दूसरे दिन ही सर्जरी की गई थी। अच्छी बात यह हुई कि उसकी रिकवरी बेहतर हुई और 6 महीने बाद ही उन्होंने प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। डॉक्टर ने बताया कि उनके सामने अपने गेम्स को आगे बढ़ाने में आर्थिक मदद की जरूरत थी। उनकी मां ने निवेदन किया कि उसके पास बो किट नहीं है, जो था वह टूट गया है। हमने इसको लेकर सोशल मीडिया में बात रखी तो कई लोग सामने आकर मदद के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्लेयर को मदद करना संतोषजनक है।

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ठीक होने के बाद जीते कई मेडल: शिवांगिनी गोहेन असम से हैं। जब वह घायल हुईं थी तो स्पोर्ट्स ऑर्थिरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने उसके इलाज का खर्च वहन किया था। शिवांगिनी स्कूल गेम्स फेरेशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित 65वें स्कूल गेस्म आर्चरी चैंपियनशिप में असम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। यह चैंपियनशिप आंध्र प्रदेश में आयोजित हुई थी। शिवांगिनी ने 9 साल की उम्र से खेलना शुरू किया था। 12 साल की उम्र में उन्हें चोट लगी थी, अब वह 14 साल की हैं। पिछले 2 साल में उन्होंने कई स्टेट मेडल जीते हैं।



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