Monday, June 27, 2022
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Pragati Maidan Tunnel Map Underpass Locations All Details, Reach Noida-Ghaziabad To India Gate In Minutes : नोएडा-गाजियाबाद से इंडिया गेट अब मिनटों में, प्रगति मैदान की सुरंग का पूरा नक्शा समझिए


दिल्‍ली-एनसीआर के लोगों को लंबे वक्‍त से जिसका इंतजार था, आखिर वह घड़ी आ ही गई। प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड ट्रांजिट कॉरिडोर सोमवार से आम जनता के लिए खुल गया। इस कॉरिडोर के तहत 1.36 किलोमीटर लंबी, 6 लेन वाली अंडरग्राउंड टनल और छह अंडरपास बनाए गए हैं। इससे भैरों मार्ग पर ट्रैफिक का लोड कम होगा। साथ ही, यह कॉरिडोर रिंग रोड और गाजियाबाद, नोएडा जैसे NCR के शहरों को दिल्‍ली-मेरठ एक्‍सप्रेसवे के जरिए इंडिया गेट से जोड़ेगा। अधिकारियों के अनुसार, पहले दिन ट्रांजिट रूट सुबह 9.30 बजे से लेकर रात 8 बजे तक खुला रहेगा। दूसरे दिन से समयसीमा बढ़ा दी जाएगी।

अंडरपास कहां बने हैं? फायदा किनको होगा?

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  1. काका नगर यू-टर्न अंडरपास 440 मीटर
  2. सुंदर नगर यू-टर्न अंडर पास 440 मीटर
  3. पुराना किला के पास अंडरपास 380 मीटर
  4. नैशनल स्पोर्ट्स क्लब के पास अंडरपास 1032 मीटर
  5. भैरो मार्ग-रिंग रोड टी-जंक्शन अंडरपास 540 मीटर
  6. सुप्रीम कोर्ट के पास अंडपास 474 मीटर

आईटीपीओ चयेरमैन और एमडी एलसी गोयल के अनुसार मेन टनल और 6 अंडरपास निर्माण पर ही 923 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। पांच अंडरपास और मेन टनल का काम पूरा हो चुका है लेकिन, भैरो मार्ग-रिंग रोड टीजंक्शन पर जो 540 मीटर लंबा अंडरपास बन रहा है, उसे पूरा करने में अभी वक्त लगेगा। उनका कहना है कि इस अंडरपास के पूरा होने में करीब 2-3 महीने का वक्त लग सकता है।

5 मिनट में पहुंच जाएंगे इस पार से उस पार

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करीब डेढ़ किमी लंबी यह टनल रोड दिल्ली में अपनी तरह की पहली और सबसे अनूठी रोड है, जो ट्रैफिक के लिहाज से बेहद व्यस्त इस इलाके से गुजरने वाले लोगों को बड़ी राहत देगी। आमतौर पर पीक टाइम के दौरान रिंग रोड से भैरों रोड और मथुरा रोड होते हुए इंडिया गेट तक पहुंचने में 15 से 20 मिनट या कभी उससे अधिक समय भी लग जाता है। वहीं, ऑफ पीक आवर्स में भी 10 से 15 मिनट का समय लग ही जाता है, लेकिन इस टनल रोड के जरिए लोग महज 5 मिनट के अंदर ही रिंग रोड से सीधे इंडिया गेट पहुंच सकेंगे।

भैरों रोड क्रॉसिंग से आगे इस टनल में एंट्री करने के बाद लोग सीधे पुराना किला रोड पर पटियाला हाउस के बाहर निकलेंगे और वहां से इंडिया गेट पहुंच सकेंगे। इसी तरह इंडिया गेट से आने वाले लोग पुराना किला रोड से इस टनल में एंट्री करके सीधे रिंग रोड पर निकलकर राजघाट, सराय काले खां, मयूर विहार, नोएडा और गाजियाबाद की तरफ जा सकेंगे। मथुरा रोड पर भगवानदास रोड की क्रॉसिंग की तरफ से टनल में एंट्री करने के बाद तो और भी कम समय में लोग रिंग रोड पर पहुंच सकेंगे।

सुरक्षा के लिए टनल में क्‍या इंतजाम?

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मथुरा रोड और रिंग रोड के बीच प्रगति मैदान के नीचे बनाई गई टनल में सेफ्टी के लिए भी कई तरह के इंतजाम करने का दावा किया गया है। लगभग 1.4 किमी लंबी इस टनल में स्मार्ट फायर मैनेजमेंट, वेंटिलेशन और ऑटोमैटिक जल निकासी सिस्टम आदि का प्रावधान किया गया है।

VIDEO: पीएम मोदी ने किया प्रगति मैदान टनल का उद्घाटन

Pragati Maidan Tunnel का उद्घाटन, पीएम मोदी ने इशारों-इशारों में किसके लिए बोली ये बात?

आर्ट वर्क में दिखेगी भारत के हर कोने की झलक

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प्रगति मैदान के नीचे बनाई गई टनल रोड न केवल लोगों को जाम से बचाएगी, बल्कि यहां से गुजरने वाले लोगों को एक सुखद अहसास भी दिलाएगी। टनल का ऐसा कोई कोना नहीं है, जिसे खूबसूरत आर्ट वर्क से सजाया न गया हो। दीवारों पर अलग-अलग रंगों से उकेरी गई तस्वीरों के अलावा मेटल के आर्ट वर्क और एमएस म्यूरल आर्ट वर्क से भी इस टनल को सजाया गया है। पूरी टनल में 4 हजार से अधिक आर्ट फ्रेम्स लगाए गए हैं। प्रत्येक फ्रेम करीब 2 मीटर लंबे और एक मीटर चौड़े हैं। मेटल आर्ट वर्क में इस तरह के मटीरियल का इस्तेमाल किया गया है, जो पूरी तरह मेंटिनेंस फ्री हैं और जल्दी खराब नहीं होंगे। टनल की साइड की दीवार और बीच के हिस्से को मिला लें तो 3 किमी से ज्यादा लंबे एरिया में ये आर्ट वर्क लगाए गए हैं।

जाम के साथ ही पॉल्यूशन भी होगा कम

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प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड रोड प्रोजेक्‍ट न सिर्फ ट्रैफिक का दबाव कम करेगा बल्कि यह प्रोजक्ट कार्बन उत्सर्जन को भी कम करेगा। यह दावा द एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी) ने एक रिपोर्ट में किया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यह प्रोजक्ट पर्यावरण के लिहाज से भी काफी बेहतर है और आने वाले समय में इसके सुखद नतीजे देखने को मिलेंगे।

प्रगति मैदान इंटीग्रेटेड रोड प्रोजेक्‍ट के और क्या हैं फायदे?

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  • जाम खत्म होगा, चोकिंग पाइंट कम होंगे और ट्रैफिक स्मूथ हो पाएगा।
  • सबसे अहम आसपास के इलाकों से प्रदूषण का लोड कम होगा।
  • ट्रैफिक सिग्नल पर वेटिंग टाइम भी कम होगा।
  • पेट्रोल की खपत कम होने के साथ ड्राइविंग स्ट्रेस कम होगा और सेहत में सुधार होगा।
  • प्रोजेक्‍ट की डीपीआर के अनुसार चयनित स्ट्रैच से कुल 1,14,000 गाड़ियां प्रतिदिन गुजरती हैं। ऐसे में हर गाड़ी की औसत ऑक्युपेसी 2.15 होगी।

कितना कार्बन उत्सर्जन कम होगा?

  • प्रोजेक्‍ट से गुजरने वाली हर गाड़ी को चयनित स्ट्रैच से गुजरने पर करीब आठ मिनट का समय लगेगा।
  • ऐसे में हर कार 600 मिलीलीटर प्रति वीइकल प्रति ऑवर ईंधन बचाएगी। यानी एक साल में 5490240 लीटर ईंधन की बचत होगी।
  • इतना इधन जलने पर हर साल 12400 टन कार्बन उत्सर्जन होता है। ऐसे में इस कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी।
  • दिल्ली ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के अनुसार हर साल करीब 4 प्रतिशत ट्रैफिक बढ़ रहा है। ऐसे में 2022 तक इस प्रोजेक्‍ट की वजह से 16400 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा।
  • कार्बन रिडक्शन प्राइस इस समय इंटरनैशनल मार्केट मे काफी अहम है। कार्बन उत्सर्जन में एक टन की कमी 4 यूएस डॉलर के बराबर अनुमानित है। ऐसे में यह प्रोजेक्‍ट सालाना 70 लाख रुपये रेवेन्यू का लाभ भी करवाएगा।



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