politics over hijab controversy: एडिटः हिजाब की आड़ में, परदे के पीछे राजनीति की रस्सकाशी, opinion over hijab controversy and politics


कर्नाटक के उडुपी में हिजाब पहनने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ते हुए यहां तक पहुंच गया कि मंगलवार को राज्य भर के स्कूल, कॉलेज तीन दिनों के लिए बंद करने पड़े। विवाद पिछले महीने तब शुरू हुआ, जब उडुपी के एक कॉलेज में छह लड़कियों को अंदर जाने से इस आधार पर रोक दिया गया कि वे हिजाब पहने हुए हैं। विवाद में अगला मोड़ तब आया, जब कुछ लड़के भगवा गमछा डालकर आ गए। उनका कहना था कि अगर लड़कियों को हिजाब पहनने दिया गया तो हम भी भगवा गमछा डालेंगे। इसके बाद यह मामला आसपास के इलाकों में भी फैल गया और तनाव बढ़ने लगा। बहरहाल, ध्यान देने की बात है कि एक शहर के एक कॉलेज का छोटा सा मामला जो थोड़ी सी समझदारी से सुलझाया जा सकता था, न केवल एक महीने तक जारी रहा बल्कि फैलते हुए पूरे राज्य में इतने बड़े बवाल का कारण बन गया। इस मामले पर अब न केवल हाईकोर्ट सुनवाई कर रहा है बल्कि राज्य सरकार भी नियम-कानूनों का हवाला दे रही है, लेकिन कुछ समय पहले तक उस पूरे इलाके में तो क्या उस कॉलेज में भी हिजाब को लेकर कोई विवाद नहीं था। अचानक ऐसा क्या हो गया कि बीजेपी विधायक की अगुआई में चलने वाले उस कॉलेज में मुस्लिम लड़कियों को हिजाब पहनने से रोकने का नियम लागू करना अनिवार्य हो गया? फिर यह सवाल भी है कि जो विवाद कुछ लड़कियों औऱ कॉलेज प्रशासन के बीच था, उसने राजनीतिक रंग कैसे ले लिया?

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कर्नाटक में क्‍या है हिजाब विवाद जिसे लेकर बढ़ गया है सियासी पारा, क्‍यों हिंदू छात्राएं स्‍कार्फ में जा रहीं कॉलेज?

साफ है कि यह विवाद जितना स्वतःस्फूर्त लगता है, उतना है नहीं। परदे के पीछे से इसमें राजनीति अहम भूमिका निभा रही है। इस इलाके में बीजेपी और पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के बीच चलने वाली रस्साकशी ही इस विवाद के मूल में है। हिजाब के समर्थन और विरोध में प्रदर्शन करे रहे लड़के-लड़कियों को एसडीपीआई की स्टूडेंट विंग सीएफआई और बीजेपी की स्टूडेंट विंग एबीवीपी का समर्थन हासिल है। मगर दोनों के बीच राजनीतिक वर्चस्व की इस लड़ाई का नतीजा यह हुआ है कि जिन बच्चों को आपस में मिल-जुलकर पढ़ाई पर ध्यान लगाना चाहिए था वे पहनावे के आधार पर एक-दूसरे को अपने विरोधी और दुश्मन की तरह देख रहे हैं। यह स्थिति न केवल शैक्षिक सत्र के लिए नुकसानदेह है बल्कि स्कूल-कॉलेजों के माहौल को लंबे समय तक के लिए दूषित कर सकती है। हालांकि मामला कोर्ट में भी है और जैसा कि हाईकोर्ट ने कहा है, इसके कानूनी पहलुओं पर बड़ी बेंच सुनवाई करेगी, लेकिन इस बीच सरकार और कॉलेज प्रशासन को अपने स्तर पर मामला जल्द से जल्द सुलझाने की कोशिश जरूर करनी चाहिए।

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परदे के पीछे राजनीति की रस्सकाशी

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