Monday, August 15, 2022
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patanjali ruchi soya: बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि के मालिकाना हक वाली रुचि सोया का एफपीओ आज से खुल गया है, इसके शेयर की कीमत 615-650 रुपये रखी गई है : Baba Ramdev Patanjali Ruchi Soya FPO opens for subscription, share price is set to rs. 615-650


मुंबई: पतंजलि (Patanjali) आयुर्वेद समूह के नियंत्रण वाली रुचि सोया इंडस्ट्रीज का एफपीओ (Ruchi Soya FPO) खुल चुका है। रुचि सोया के चेयरमैन आचार्य बालकृष्ण और गैर-कार्यकारी चेयरमैन बाबा रामदेव (Baba Ramdev) हैं। रुचि सोया का एफपीओ करीब 4300 करोड़ रुपये (Ruchi Soya Share Price) का है। इस एफपीओ के जरिए रुचि सोया में अभी करीब 98.9 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी पतंजलि 18-19 फीसदी तक की हिस्सेदारी बेच देगी।

कितने रुपये का मिल रहा है शेयर?

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रुचि सोया ने एफपीओ के लिए मूल्य दायरा 615-650 रुपये रखा है। कंपनी का एफपीओ 24 मार्च को खुल गया है और 28 मार्च को बंद होगा। नियम के मुताबिक शेयर बाजार में लिस्ट कंपनी को कुछ समय के अंदर-अंदर 25 फीसदी तक की हिस्सेदारी पब्लिक को देनी होती है। ऐसे में इस एफपीओ के बाद कंपनी नियम के मुताबिक अपनी हिस्सेदारी को 75 फीसदी तक लाने के लिए 6-7 फीसदी दिसंबर 2022 तक बेच देगी।

क्या होगा जमा हुए पैसों का?

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बाबा रामदेव ने कहा है कि रुचि सोया इस हिस्सेदारी बिक्री से जुटाई जाने वाली राशि में से 3,300 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने और शेष का अन्य कंपनी कामकाज के लिए करेगी। रुचि सोया के अधिग्रहण के बाद से ही पतंजलि ने इसे जिंसों के कारोबार से जुड़ी कंपनी की जगह ब्रांडेड कंपनी के तौर पर पेश किया है। इसके अलावा यह अपने सभी खाद्य उत्पादों एवं गैर-खाद्य उत्पादों को अलग श्रेणियों में उतारने की प्रक्रिया में है। रामदेव ने कहा कि रुचि और पतंजलि दोनों को वैश्विक स्तर का खाद्य ब्रांड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। रुचि सोया देश की अग्रणी खाद्य तेल कंपनी है। इसके अलावा सोया उत्पादों की पेशकश में भी वह एक बड़ा नाम है।

दिसंबर 2018 में किया था रुचि सोया का अधिग्रहण

-2018-

पतंजलि ने दिवालिया हो चुकी रुचि सोया के लिए बोली दिसंबर, 2018 में जीती थी। इस सौदे के तहत पतंजलि को रुचि सोया पर बकाया 4,350 करोड़ रुपये के कर्ज का निपटान करना था। इसके लिए उसे 1,100 करोड़ रुपये की इक्विटी और कर्ज के जरिये 3,250 करोड़ रुपये लगाने थे। दिसंबर, 2017 में रुचि सोया के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू की गई थी। उस पर एसबीआई और अन्य बैंकों के कुल 9,345 करोड़ रुपये बकाया थे। लेकिन कर्ज समाधान प्रक्रिया के तहत बैंकों को 60 प्रतिशत से अधिक का नुकसान (हेयरकट) उठाना पड़ा था।

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