palika bazar infamous market: ​दुनिया के लिए रहे ‘कुख्यात’ पर दिल्ली का हमेशा फेवरेट रहेगा पालिका बाजार, List Of 5 Infamous Markets Of India, Palika Bazar Infamous Market


भले ही दिल्ली के पालिका बाजार सहित पांच भारतीय बाजारों को अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) ने दुनिया के कुख्यात बाजारों की सूची में शामिल किया हो, लेकिन राजधानी का यह बेहद पसंदीदा बाजार है। कनॉट प्लेस के आउटर सर्कल में स्थित पालिका बाजार में एक समय में करीब 15 हजार तक लोग जा सकते हैं। इसका मेन गेट सेंट्रल पार्क के सामने है। प्रवेश के लिए सीढ़ियों का प्रयोग होता है। पालिका बाजार में साल 2000 तक लगभग सभी दुकानों में विडियो और ऑडियो कैसेट बिका करते थे। अब इन दुकानों में आपको इलेक्ट्रॉनिक का सामान और गारमेंट्स मिलते हैं। आपको पालिका बाजार जैसी मार्केट शायद ही कहीं मिले। यहां पर दुकानदार अपने ट्रेड बदलते रहे हैं। आमतौर पर होता यह है कि किसी भी बाजार में बहुत कम दुकानदार अपने ट्रेड को बदलते हैं। यहां हर दूसरी-तीसरी दुकान ने अपने ट्रेड को बदला है। यहां आपको कुछ इस तरह के दुकानदार भी मिलेंगे जो कभी कैसेट किंग माने जाते थे। वे अब स्नैक शॉप चला रहे हैं। उन्होंने कुछ साल तक गारमेंट का भी काम किया है।

​कौन नाखुश था पालिका बाजार बनने से

navbharat times

दिल्ली में मॉल कल्चर के दस्तक देने से बहुत पहले पालिका बाजार में जाकर शॉपिंग करने का फैशन हुआ करता था। यह भूमिगत और वातानुकूलित था, इसलिए यहां घूमने का दिल्ली मौका नहीं छोड़ती थी। यह 1978 के अंत में बनकर तैयार हुआ था। इसका श्रीगणेश हुआ 1979 के शुरू में। पालिका बाजार ने सस्ते आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान, रेडिमेड कपड़ों और फुट वियर की सफल मार्केट के रूप में अपनी तुरंत पहचान बना ली थी। दिल्ली के पुराने लोगों को याद होगा कि देश में 1975 में इमरजेंसी लगने के बाद कनॉट प्लेस में एक और बाजार खोलने का निर्णय हुआ। इस फैसले से बहुत से लोग नाखुश थे क्योंकि यहां पर पहले से ही कनॉट प्लेस के अलावा जनपथ, मोहन सिंह प्लेस, शंकर मार्केट, सुपर बाजार थे ही। पालिका बाजार का निर्माण नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) ने किया था।

​पालिका शॉपिंग के जरूर जाते थे लालू यादव

navbharat times

लालू प्रसाद यादव पहली बार लोकसभा के लिए 1977 में निर्वाचित हुए थे। वह दिल्ली में रहने लगे। कम-से- कम जब संसद का सत्र चलता तो वह दिल्ली में ही रहते। कहते हैं, वह जब यहां से वापस पटना जाते तो अपने मित्रों के साथ पालिका बाजार शॉपिंग के लिए अवश्य पहुंचते। वहां से राबड़ी देवी और बच्चों के लिए कपड़े और घर का दूसरा सामान खरीदते। लालू यादव पालिका बाजार को ठंडी मार्केट कहते थे।

​ठंडी मार्केट पालिका बाजार

navbharat times

जब पालिका बाजार शुरू हुआ तो यह पूरी तरह से एयर कंडीशंड मार्केट थी। उस समय का भारत बहुत अलग था। देश बिजली की किल्लत झेलता था और बाजार एयर कंडीशंड नहीं होते थे। इस वजह से पालिका बाजार को कुछ लोग ठंडी मार्केट भी कहते थे। यहां सबसे पहले पंचकुइयां रोड के दुकानदारों, जिनकी दुकानें कनॉट प्लेस से सुचेता कृपलानी अस्पताल तक थीं, को स्पेस दिए गए थे। जहां पर पालिका बाजार बना वहां पर थिएटर कम्युनिकेशन बिल्डिंग थी। इसमें बहुत से स्वयंसेवी संस्थाओं के दफ्तर चलते थे। इसके साथ ही कॉफी हाउस भी था।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: