Opinion: ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में अक्षय कुमार पर चढ़ा बाला का भूत और संजय दत्त पर हावी है ‘मुन्नाभाई’, डायरेक्टर साहब ने ये क्या बनाया – 8 reasons why akshay kumar film samrat prithviraj flop at box office opinion

अक्षय कुमार की फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ अमेजन प्राइम ओटीटी पर रिलीज़ चुकी है, जिसे फ्री में अपने घर में बैठकर देखा जा सकता है, लेकिन हमारी सलाह मानिए- प्लीज़ ये गलती मत कीजिएगा। सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई डायरेक्‍टर चंद्रप्रकाश द्व‍िवेदी की फिल्म को देखकर लोगों ने सिर पीटा और उसी का नतीजा रहा कि फिल्म देशभर में बॉक्स ऑफिस पर महज 68 करोड़ की कमाई करते-करते पस्त हो गई। अब यह ओटीटी पर आ चुकी है, आप चाहें तो इसे घर में बैठकर देख भी सकते हैं, लेकिन इसे हुए पृथ्वीराज की असली कहानियां जो आपने बचपन में सुनी हैं और पढ़ी हैं, उसे याद करें या न करें लेकिन उन लोगों का बलिदान जरूर याद करेंगे जिन्होंने इस फिल्म के लिए अपने हजारों रुपये महंगे टिकट पर खर्च किए होंगे। ‘सम्राट पृथ्वीराज’ को इस तरह बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिरते देख सभी हैरान हुए और डायरेक्टर साहब ने फटाफट इसकी वजह भी बता दी। उन्होंने, अक्षय कुमार से जुड़े सारी घटनाओं को याद किया और उनके पान-मसाला विज्ञापन पर बवाल से लेकर, श‍िवलिंग पर दूध चढ़ाने वाले ऐक्टर के बयान को अपनी इस डिजास्टर फिल्म के पिटने की वजह बना डाली। चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने जिस स्तर पर फिल्म पिटने की वजह पर रिसर्च किया है, काश कि उतना इस फिल्म की कहानी के लिए भी कर लेते।

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चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने तो इतनी वजहें सोच लीं जितना लोगों ने न सोचा था
चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने अपनी फिल्म के लिए इतिहास का वो किरदार चुना जिनकी वीरगाथा पढ़ते हुए हम पले-बढ़े हैं। देश के हिन्दू राजाओं में से एक पृथ्वीराज के साहस और वीरता की वो कहानियां रोंगटे खड़े कर देती हैं, जिसमें घोड़े पर सवार हवा से बातें करते हुए युद्ध के मैदान में अपने दुश्मनों का खात्मा करते हुए अपनी जान की बाजी लगा देते हैं। पृथ्वीराज केवल साहसी और जांबाज राजा ही नहीं बल्कि नम्र और दयालु भी थे, जिन्होंने एक बार नहीं बल्कि मुस्लिम शासक सुल्तान मुहम्मद गौरी को एक बार नहीं बल्कि 15 बार युद्ध के मैदान में धूल चटाया था और हर बार उसे कैद करने के बाद रिहा भी कर दिया। खैर, यहां हम इतिहास के विषयों पर नहीं जाना चाहेंगे, बस एक ऑडियंस के रूप में उन पॉइंट्स पर जिसकी वजह से फिल्म इतनी बुरी पिटी है।

चंद्रप्रकाश द्विवेदी Exclusive: आखिर क्यों फ्लॉप हुई ‘सम्राट पृथ्वीराज’?

नहीं दिखा पाए पृथ्वीराज की वीरता और साहस
1. यदि आप फिल्म यह सोचकर देखने बैठ रहे हैं कि इस फिल्म में आपको इतिहास के किताबों की छपी पृथ्वीराज की वीरता और साहस की कहानियों को पर्दे पर जीता जागता देखने को मिलेगा तो भूल जाइए। फिल्म के 5 मिनट की शुरुआत रोमांच लाती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है आपको लगेगा कि आप बुरी तरह से ठगे गए हैं। और युद्ध के कुछ ऐसे सीन हैं भी तो वो उस लेवल के नहीं जितना उन कहानियों में हम सबने सुन रखा था।

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मानुषी छिल्लर की बतौर ‘डेब्यू’ फिल्म पर फोकस्ड
2. फिल्म ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में अक्षय कुमार के किरदार से कहीं अधिक मानुषी छिल्लर यानी रानी संयोगिता के किरदार पर मेहनत की है। शायद डायरेक्टर फिल्म में इस बात पर फोकस करना भूल गए कि यहां ‘पृथ्वीराज’ की वीरता पर ज्यादा मेहनत की जाए या फिर साल 2017 की मिस वर्ल्ड मानुषी छिल्लर की बतौर ‘डेब्यू’ फिल्म पर।

रानी संयोगिता के बेशकीमती लहंगे
3. मानुषी यानी रानी संयोगिता के कपड़े देख लीजिए, लगेगा जैसे पृथ्वीराज ने मनीष मल्होत्रा से डिजाइन करवाए होंगे।

‘हाउसफुल’ के बाला नजर आते हैं अक्षय
4. लगता है चंद्रप्रकाश द्विवेदी ने इन ऐक्टर्स के लिए केवल कपड़ों की व्यवस्था की, किरदारों के लिए काम बिल्कुल भूल गए। दरअसल पूरी फिल्म देखते हुए अक्षय कुमार आपको हर जगह पर शूरवीर पृथ्वीराज की जगह ‘हाउसफुल’ के बाला ही लगेंगे।

मुन्नाभाई की तरह सुनाई पड़ते हैं संजय दत्त
5. फिल्म में संजय दत्त पृथ्वीराज के काका कान्हा की भूमिका में दिखे हैं। इसमें कई शक नहीं कि युद्ध के मैदान में वह पृथ्वीराज का बायां हाथ नजर आते हैं, लेकिन आंखें बंद करके उनके डायलॉग को सुनिए तो लगेगा जैसे ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस’ के मुन्नाभाई की एंट्री हो गई है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि इसमें सर्किट आपको नजर नहीं आएगा।

डायलॉग्स का लेवल गली के गुंडों जैसा
6. फिल्म के डायलॉग्स सुनने के बाद जी करेगा सिर पीट लें। फिल्म के डायलॉग बिल्कुल उस लेवल पर नहीं हैं, जिस समय की कहानी दिखाने की इस फिल्म में कोशिश की गई है। यकीनन डायरेक्टर को इस फिल्म के लिए कहानी के साथ-साथ इसके डायलॉग्ज पर भी रिसर्च करना चाहिए था, जो ज़ीरो है।

रानी संयोगिता का बगावत
7. फिल्म में आधी कहानी रानी संयोगिता की लगती है और शायद यही वजह रही है कि यह ट्रैक से अलग हो गई। एक तरफ रानी संयोगिता को पर्दे के पीछे खड़ी होकर बातें करते देख अचानक पृथ्वीराज के लिए अपने पिता जयचंद से बगावत का अंदाज काफी अलग है। इसे रियल दिखाने के लिए कुछ और मेहनत की जानी चाहिए थी।

मिसिंग है वो लाइन
8. हर किताब किस्से में आपने वो लाइन जरूर पढ़ी होगी- चार बांस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण ता ऊपर सुल्तान है मत चूके चौहान, लेकिन इस फिल्म को देखते हुए सब भूल जाइए। पृथ्वीराज चौहान को बंदी बना लिया गया था और उनकी आंखें फोड़ दी गई थी, जिसके बाद उनके मित्र चन्द्रवरदाई ने काव्यात्म लहजे में ये पंक्तियां कही थी और इसी के बाद पृथ्वीराज की कमान से तीर सीधे मोहम्मद गौरी के गले में जा लगी।

अक्षय कुमार ने आंखें बंद करके की है फिल्म?

फिल्म की कहानी, स्क्रिप्ट, डायलॉग्स की बात पर ध्यान देने की बात तो मेकर्स की है, लेकिन अक्षय कुमार को क्या हो गया। क्या उन्हें इस फिल्म को बनाते हुए और फिर इसे पहली बार देखकर भी ये एहसास नहीं हुआ कि उन्होंने फिल्म में क्या से क्या कर डाला है?



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