Sunday, August 14, 2022
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Monkeypox: अफ्रीकी देशों से मिलता-जुलता है भारत का क्लाइमेट, इसलिए मंकीपॉक्स से सावधानी जरूरी – india climate is similar to african countries careful with monkeypox


नई दिल्ली: भारत में मंकीपॉक्स के मामले बढ़ने लगे हैं। विभिन्न राज्यों में चार मामले आ चुके हैं। दिल्ली के एलएनजेपी में एक मरीज पहले से भर्ती है और एक संदिग्ध मरीज कल भर्ती हुआ हैं। ऐसे में ज्यादा डर उन युवाओं में है, जिनको स्मॉल पॉक्स की वैक्सीन नहीं लगी। डॉक्टरों की मानें, तो बाहर निकलने से पहले थोड़ी सावधानी बरतें। दूसरों से दूरी बनाकर रखें। हाथ साफ करते रहें।

जीटीबी अस्पताल के एमडी डॉक्टर सुभाष गिरी का कहना है कि मंकीपॉक्स जिन देशों में देखा गया था, वहां का ट्रॉपिकल क्लाइमेट था। अब ठंडे देशों में फैल रहा है। क्लाइमेट का इतना ज्यादा असर देखने को नहीं मिल रहा है। मगर, भारत का क्लाइमेट अफ्रीकी कंट्रीज से मिलता जुलता है। ऐसे में भारत में मंकीपॉक्स फैला तो संक्रमित मरीजों की मामले बढ़ भी सकते हैं। घबराने की बात नहीं है पर सावधानी जरूरी है। लक्षण दिखने पर खुद को आइसोलेट जरूर कर लें। मंकीपॉक्स और स्मॉल पॉक्स में अंतर है कि मंकीपॉक्स जानवरों से इंसानों में फैला है। स्मॉल पॉक्स में ऐसा नहीं था। हालांकि दोनों एक ही पॉक्स वायरस से जुड़े हैं। बाहर के देशों में मंकीपॉक्स को लेकर दवा बनी हुई है। देखना है कि भारत में वो दवा कब आती है।

पुरुषों को किया प्रभावित

स्वामी दयानंद अस्पताल के सीनियर मेडिसिन डॉक्टर ग्लैडविन त्यागी ने बताया कि अब तक की रिसर्च में पाया गया है कि बायसेक्सुअल और गे लोगों में ज्यादा मामले आए हैं। वायरस ने ज्यादा प्रभावित पुरुषों को किया है, जिनकी उम्र 31 से 43 की बीच है। वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में फैलता है इसलिए जरूरी है कि संक्रमित मरीज परिवार के सदस्यों से दूर रहे। स्मॉल पॉक्स की तुलना में मंकीपॉक्स के लक्षण अलग है, मगर एक ही वायरस है। ऐसे में स्मॉल पॉक्स की वैक्सीन इसके लिए भी असरदार मानी जा रही है। उन लोगों को यह बीमारी हो रही है, जिन्हें स्मॉल पॉक्स की वैक्सीन नहीं लगी है।

गंभीर मामले कम
डब्ल्यूएचओ के अनुसार 16,016 में से 99% फीसदी मामले मध्य आयु वाले पुरुषों (उम्र 31 से 43 के बीच) में मिले। 18 से 44 के पुरुषों में 77% मामले देखने को मिले। 1% फीसदी से कम मामले 0-17 की उम्र वालों में मिले। 319 हेल्थ केयर वर्कर भी संक्रमित पाए गए। ज्यादातर को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ी। 90% मरीज घर पर ठीक हो गए। डॉ ग्लैडविन त्यागी का कहना है कि बीमारी इतनी खतरनाक नहीं है। लेकिन, भारत में पहली बार मंकीपॉक्स के मामले देखने को मिल रहे हैं। इसलिए सावधानी जरूरी है।



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