Sunday, June 26, 2022
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Mohammed Zubair: जानिए कौन हैं मोहम्मद जुबैर, जिनके खिलाफ हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार | know who is mohammad zubair against whom high court refused to quash the fir


Mohammed Zubair: इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ (Allahabad High Court Lucknow Bench) ने हिंदू नेताओं यति नरसिंहानंद सरस्वती, बजरंग मुनि और आनंद स्वरूप को ‘घृणा फैलाने वाले’ कहने के लिए एक फैक्ट-चेक वेबसाइट के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया है। मोहम्मद जुबैर की याचिका को खारिज करते हुए लखनऊ पीठ ने इस मामले में जांच की जरूरत बताई है। एपआईआर रद्द करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव की अवकाश पीठ ने कहा कि रिकॉर्ड के अवलोकन से पहली नजर में याचिकाकर्ता के खिलाफ इस स्तर पर अपराध का मामला बनता दिख रहा है। मामले में जांच के लिए पर्याप्त आधार प्रतीत होता है।

मोहम्मद जुबैर (Mohammed Zubair) एक फैक्ट चेकिंग वेबसाइट चलाते हैं। उन्होंने एक मामले में ट्विटर पर तीन हिंदू संतों-यति नरसिम्हा सरस्वती, महंत बजरंग मुनि और स्वामी आनंद स्वरूप को ‘हेट मांगर’ कहकर संबोधित किया था। इस मामले में 1 जून, 2022 को आईपीसी की धारा 295 (ए) और आईटी अधिनियम की धारा 67 के तहत सीतापुर जिले के खैराबाद पुलिस स्टेशन में ‘हिंदू नेताओं की धार्मिक भावनाओं को जानबूझकर ठेस पहुंचाने’ के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मोहम्मद जुबैर की ओर से इस एफआईआर को चुनौती दी गई। अब इस मामले में लखनऊ बेंच का फैसला सामने आया है। कोर्ट ने आरोपित मोहम्मद जुबेर के खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करने से इनकार कर दिया है।

कोर्ट ने बताई है जांच की जरूरत
कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी को देखने से प्रथम दृष्टया या जुबेर के खिलाफ अपराध का बनना प्रतीत होता है और इसकी विवेचना की जरूरत है। जुबैर की ओर से कहा गया था कि उसके ट्वीट से किसी वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होती हैं। उन्हें बेवजह परेशान करने की नीयत से उसके खिलाफ प्राथमिकी लिखी गई है। ज़ुबैर ने प्राथमिकी को चुनौती देते हुए कहा था कि उनके ट्वीट ने किसी वर्ग के धार्मिक विश्वास का अपमान या नीचा दिखाने का प्रयास नहीं किया था। कोर्ट में कहा गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ ‘सिर्फ परोक्ष उद्देश्य से उत्पीड़न के लिए’ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने उनकी दलील को नहीं माना।

जुबैर को बताया गया आदतन अपराधी
जुबैर की ओर से एफआईआर रद्द करने की याचिका का विरोध करते हुए राज्य सरकार के वकील ने उन्हें आदतन अपराधी करार दिया। वकील ने उसके खिलाफ चार आपराधिक मामलों का जिक्र कोर्ट में किया। राज्य की ओर से कहा गया कि एफआईआर में संज्ञेय अपराधों के मामलों का खुलासा हुआ है। इसलिए, इसे अलग रूप में नहीं देखा जा सकता है। कोर्ट ने इसके बाद याचिकाकर्ताओं की दलीलों को ठुकरा दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि याचिकाकर्ता की ओर से जो दलील दी जा रही है, वह उचित जांच से ही सत्यापित हो सकती है।

पीठ ने कहा कि इस मामले में जिन कानून के बिंदुओं का जिक्र किया गया है, उसे भी केवल ट्रायल कोर्ट की ओर से ही उचित तरीके से देखा जा सकता है। इस मामले में चार्जशीट दायर होने के बाद इस पर कोई बात कही जा सकती है। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब जुबैर पर शिकंजा कस सकता है।



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