भारी धातु के कण भी जहरीली बना रहे दिल्ली-एनसीआर की हवा को 
January 18, 2019 • Editor Awazehindtimes

आर्सेनिक, मैगनीज और बेटियम आदि की मात्रा तय मानकों से कई गुना अधिक मिली, लंग केयर फांउडेशन ने दिल्ली- गुरुग्राम से 7 नमूने एकत्र किए थे

राजधानी में 30 स्थानों की हवा गंभीर श्रेणी में सीपीसीबी ने गुरुवार को दिल्ली की वायु गुणवत्ता सूचकांक 440 दर्ज किया, जो बुधवार को दर्ज सूचकांक 371 से 69 अधिक है। प्रदूषण के समग्र सूचकांक में बढोतरी होने के साथ ही 30 स्थानों की वायु गुणवत्ता भी गंभीर श्रेणी में दर्ज की गईहै। इसमें सबसे अधिक प्रदूषण का सूचकांक 480 मुंडका में दर्ज किया गया। सर्फ एनएसआईटी द्वारका में सूचकांक 399 व आया नगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 372 दर्ज की गई, जोकि बेहद खराब की श्रेणी मानी जाती है।

अध्ययन -

विशेष संवाददाता, दिल्ली- गुरुग्राम की हवा को पीएम 10 व पीएम 2.5 जैसे धूल कणों के साथ ही भारी धातु के कण भी जहरीली बना रहे हैं। अमेरिका की एक प्रयोगशाला में हुए अध्ययन में दिल्ली- गुरुग्राम की हवा से आर्सेनिक, मैगनीज, बेरियम, निकेल, सिलिकॉन और लेड जैसी जहरीली धातुओं के कण तय मानकों से कई गुना अधिक मिले हैं। लंग केयर फांउडेशन की तरफ से अध्ययन के लिए दिल्ली - गुरुग्राम से सात नमूने एकत्रित किए गए थे। फाउंडेशन के ट्रस्टी जुड़े डॉ अरविंद कुमार के अनुसार दिवाली से पहले, दिवाली वाले दिन और उसके अगले दिन की वायु गुणवत्ता की जांच के लिए गुरुग्राम और दिल्ली के सफदरजंग क्षेत्र से सात नमूने लिए गए थे। जिनकी जांच के लिए अमेरिका स्थिति एक प्रयोगशाला में भेजा गया था। जिसकी रिपोर्ट हाल ही में आई है। बेरियम तय मानक से 20 गुना अधिक मिला : डॉ. अरविंद कुमार के अनुसान दिवाली के दौरान दिल्ली- गुरुग्राम की हवा में बेरियम का स्तर 20 गुना अधिक मिला है।

 

उन्होंने रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि दिवाली से पहले वाले दिन पटाखे जलाए जाने के बाद हवा में बेरियम का स्तर 21.5 रहा, जबकि दिवाली वाले दिन 5.8 और उसके अगले दिन 2.4 रहा। जबकि तय मानकों के अनुरूप हवा में इसकी मात्रा 0.05 से अधिक नहीं होनी चाहिए। मैगनीज और लेड दिमाग के लिए खतरनाकः डॉ अरविंद कुमार के अनुसार दिल्ली-गुरुग्राम की हवा में मैगनीज, निकेल व लेड मिला है, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से कई अधिक है। मैगनीज, लेड और निकेल से मस्तिष्क को नुकसान पहुचता है। वहीं, लेड का सबसे ज्यादा प्रभाव बच्चों पर पड़ता है। लेड की हल्की मात्रा भी बौद्धिक क्षमता, व्यवहार और याददाश्त को कमजोर बनाती है। यह बेहद चिंता का विषय है कि सांस के जरिए ऐसी जहरीली धातुएं बच्चों के अंदर जा रही है।