Sunday, July 3, 2022
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mental health tips by psychologist: clinical psychologist puroitree majumdar shared 4 tips to becoming mentally strong? – Mental Health: चिंता-तनाव, आत्मविश्वास की कमी बिगाड़ देती है मेंटल हेल्थ, एक्सपर्ट ने बताए मानसिक रूप से मजूबत होने के 4 उपाय


मानसिक रूप से मजबूत (Mentally Strong) होने का मतलब यह नहीं है कि आप अंदर से कमजोर हो और खुले तौर मजबूत होने का दिखावा कर रहें हों। इसका मतलब यह भी नहीं है कि जब आपको मदद की सख्त जरूरत हो, तो तभी आप अकेले ही उस समस्या से जुझ रहे हो। वास्तव में, इमोशनल वेलनेस का मतलब है, हर चीज को अपनाने और उसका सामना करने के लिए तैयार रहना। हर दिन आप इतने मजबूत बने रहें ये जरूरी नहीं है। मानसिक रूप से मजबूत महिलाओं में जो लक्षण समान्य रूप से देखे जा सकते हैं, वह हैं अपनी ताकत और कमियों के बारे में जागरूक होना, यह स्वीकार करना कि विभिन्न भावनाएं उन्हें कैसे प्रभावित करती हैं। और वे इसे नियंत्रित करने के लिए क्या कर सकती हैं।

मेंटल हेल्थ को लेकर Your Dost की वरिष्ठ क्लीनिकल साइकाइट्रिस्ट पुरोइत्री मजूमदार ने अपने विचारों को हमारे साथ साझा किया है। और महिलाओं में मानसिक और भावनात्मक स्तर पर चल रहे लड़ाई को शांत करने के कारगर उपाय भी बताए हैं। वह कहती हैं कि दूसरों व अपने प्रति व्यक्ति की धारणा, उत्पादकता उनके रिश्ते और भावनात्मक भलाई से जुड़ी होती है। तनाव, चिंता, कम आत्मसम्मान, रिलेशन अफेयर्स और खराब वर्क लाइफ बैलेंस किसी व्यक्ति को उस बिंदु तक प्रभावित करते हैं जहां वह अपना बेस्ट नहीं दे पाते हैं। इसलिए, किसी के भावनात्मक स्वास्थ्य का उतना ही ध्यान रखना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है, जितना हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हैं। इसे करने के कुछ तरीकों में शामिल हैं।

​खुद के फैसलों पर डाउट न करें

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एक्सपर्ट के अनुसार, महिलाएं हमेशा अपनी पसंद और फैसलों पर सवाल उठाती रहती है। यह न केवल हमारी फैसले लेने की समझ को प्रभावित करता है बल्कि निरंतर अपराध के बोध को भी जन्म देता है। अपने भीतर के संदेह को शांत करने और अपनी मन की आवाज पर विश्वास करने के लिए खुद को तैयार करें। इस प्रक्रिया को आप आंकलन करने के साथ शुरू कर सकते हैं। खुद से सवाल करें कि क्या आप निष्पक्ष हैं, क्या कोई विकल्प आपके मूल्यों के साथ संरेखित है? ध्यान रखिए, जो आपको सही लगता है, उसे बोलने के लिए माफी न मांगें।

​माइंडफुलनेस का अभ्यास करें

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अनुसंधान से पता चलता है कि भावनात्मक स्तर खुलने के लिए माइंडफुलनेस का अभ्यास जरूरी होता है। इसके तरीको के माध्यम से आप अपने मस्तिष्क के तार्किक और भावनात्मक केंद्रों को मजबूत कर सकते हैं। इसका अभ्यास करने से हम वर्तमान क्षण में अधिक जागरूक हो जाते हैं। साथ ही जल्दबाजी में इमोशनल होकर फैसले लेने कि अपनी आदत को भी नियंत्रित कर सकते हैं।

​दूसरों और अपने प्रति सराहना का भाव रखें

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कृतज्ञता(Gratitude)का अभ्यास करें। यह आपके भीतर सकारात्मक भावनाओं को बढ़ावा देता है। साथ ही आपके अंदर भावानात्मक स्तर में सुधार करता है। केवल दूसरो प्रति ही नहीं बल्कि स्वयं के प्रति भी सराहना का भाव रखें। जब भी आप कुछ अचीव करते हैं, या किसी की मदद करते हैं इसके लिए खुद को धन्यावाद दें।

​मदद मांगने में संकोच न करें

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एक्सपर्ट बातती हैं कि सहारा मांगना कमजोर होने की निशानी नहीं होती है। बल्कि ताकत की निशानी है। जब आप प्रोफेशनल मदद लेते हैं, तो आप वास्तव में यह आपको बेहतर इंसान बनाने के लिए होता है। इसक मतलब होता है कि आप एक बेहतर बनना चाहते हैं और आप उस दिशा में कदम उठा रहे हैं। अपनी वास्तविक क्षमता को उजागर करने के लिए वह कदम उठाने से न हिचकिचाएं!

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।



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