बिजली की पीक डिमांड 7400 मेगावॉट के पार जा सकती है 
March 16, 2019 • Editor Awazehindtimes

गर्मियों में सूरज की तपिश के लिए तैयार रहे दिल्लीवासी

मेघालय, सिक्किम की बिजली के साथ ही डिस्कॉम्स
मौसम को भांप कर करेंगे आपूर्ति

नई दिल्ली, मार्च। लंबी सर्दियों के बावजूद कंपकंपा देने वाली ठंड दिल्ली से दूर रही लेकिन अब इस बार, गर्मियों में सूरज की तपिश के लिए तैयार रहें। इसे देखते हुए दिल्ली में बिजली की पीक डिमांड 7400 मेगावॉट के आंकड़े को पार कर सकती है। पिछले साल दिल्ली की पीक पावर डिमांड 7016 मेगावॉट थी।

पिछले साल गर्मियों में अकेले बीआरपीएल इलाके में बिजली की पीक डिमांड 3081 मेगावॉट और बीवाईपीएल क्षेत्र में 1561 मेगावॉट थी। इस साल गर्मियों में पीक डिमांड 3205 मेगावॉट और बीवाईपीएल इलाके में 1642 मेगावॉट पहुंचने की उम्मीद है।

बिजली की मांग दिल्ली हर साल बढ़ रही है व मुंबई और चेन्नई के पीक डिमांड को अगर मिला दें, तो भी वह दिल्ली की पीक डिमांड से कम है। बीएसईएस ने बिजली की बढ़ती डिमांड को देखते हुए इसकी पर्याप्त व्यवस्था का दावा करते हुए कहा कि 42 लाख उपभोक्ताओं को परेशानी न हो इसके लिए एनटीपीसी, दिल्ली के ऊर्जा संयंत्रों के साथ साथ हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और सिक्किम से भी लंबी अवधि के लिए पावर परचेज अग्रीमेंट्स व पावर बैंकिंग अरेंजमेंट्स किए गए हैं।

पावर बैंकिंग के माध्यम से बीएसईएस को 865 मेगावॉट बिजली मिलेगी। इसी साल अप्रैल से 100 मेगावॉट विंड पावर भी मिलनी शुरू हो जाएगी। अगर अप्रत्याशित कारणों से बिजली की मांग में और भी इजाफ होता है, तो डिस्कॉम्स शॉर्ट टर्म आधार पर पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदेगी।

नेटवर्क का सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण किए जाने की जानकारी देते हुए कहा कि ज्यादातर काम पूरा हो चुका हैऔर बचा हुआ कार्य भी जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। नेटवर्क को मजबूत बनाने से यह गर्मियों में यह पहले के मुकाबले अधिक बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और बिजली का अधिक लोड भी उठा पाएगा।

बिजली की मांग का लगभग सटीक अनुमान लगाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, इसमें मौसम का अनुमान लगाने वाली तकनीक भी शामिल है, उल्लेखनीय है कि लोड का लगभग सटीक अनुमान लगाने में तापमान, बारिश, बादल, हवा की गति, हवा की दिशा और उमस आदि की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में टेक्नोलॉजी की भूमिका की बात करते हुए बीएसईएस प्रवक्ता ने कहा कि बीएसईएस एडवांस्ड स्टैटिस्टिकल फोरकास्टिंग मॉडल्स, अत्याधुनिक वेदर फेरकास्टिंग सोल्यूशंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निग का इस्तेमाल कर रही है।