Saturday, August 13, 2022
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Indian Predator: मर्डर के बाद बॉडी टोकरी में तिहाड़ जेल के बाहर रख आता था वो दरिंदा, जानें अब कहां है हत्यारा – the real story behind indian predator the butcher of delhi on netflix where is the serial killer now

नेटफ़्लिक्स पर रिलीज़ हुई नई डॉक्यूमेंट्री सीरीज़ ‘इंडियन प्रिडेटर: बूचर ऑफ दिल्ली’ में बिहार के एक बर्बर हत्यारे की दिल दहला देने वाली कहानी है। यह कहानी है दिल्ली में हुई सीरियल मर्डर की उन घटनाओं की, जहां हत्या करने वाले ने लोगों के शव के टुकड़े-टुकड़े कर, उसका सिर काटा और फिर तिहाड़ जेल के सामने टोकरी में भरकर रख आया। ऐसा करके हुए वह पुलिस को खुली चैलेंज दे रहा था और कहता कि पकड़ सकते हो तो पकड़कर दिखाओ। कहानी 20 अक्टूबर साल 2006 की है जब दिल्ली के हरिनगर पुलिस स्टेशन में सुबह-सुबह फोन बजा और उधर से खुद हत्याके ने बताया कि तिहाड़ जेल के गेट नंबर-3 के ठीक बाहर टोकरी में एक लाश रखी है, जाओ जाकर उठा लो। इस हत्यारे का नाम था चंद्रकांत झा, जो मधेपुरा, बिहार का रहने वाला है। इसे ही नेटफ़्लिक्स की सीरीज़ Indian Predator: the Butcher of Delhi में दिल्ली का कसाई बताया गया है और तीन हत्या की कहानी है ।

मर्डर के बाद बॉडी टोकरी में तिहाड़ जेल के बाहर रख आता था वो दरिंदा
चंद्रकांत झा के फोन ने पुलिस स्टेशन में जैसे हड़कंप मचा दी थी। दिल्ली का तिहाड़ जेल, कहते हैं कि यहां पुलिस की मर्जी के बगैर परिंदा भी पर नहीं मार पाता और ऐसे में कोई शख्स वहां इंसान को काटकर टोकरी में रख जाता है, इस पर यकीन करना हर किसी के लिए असंभव था, लेकिन ये हो रहा था। नेटफ्लिक्स की इस सीरीज़ Indian Predator: the Butcher of Delhi में हत्यारे चंद्रकांत झा की दरिंदगी की दिल दहला देने वाली कहानी है। साल 2006 से लेकर 2007 के बीच उन दिनों दिल्ली में कई मर्डर हुए और पहले मर्डर के बाद बॉडी को टुकड़ों में काटकर तिहाड़ जेल के गेट नंबर-3 पर टोकरी में रखा गया था और पुलिस को बकायदा फोन पर इस हत्या की सूचना भी हत्यारे ने फिल्मी अंदाज में दे दी। उसने कहा- जाओ, लाश उठा लो और खुद को पकड़ने के लिए भी चैलेंज दे डाला। इस घटना के ठीक 6 महीने बाद एक बार फिर ऐसा ही मर्डर हुआ और इस बार भी तिहाड़ जेल के बाहर लाश रख दी गई। उस बॉडी से सिर और हाथ-पैर गायब थे। किसी आदमी को काटकर उस हत्यारे ने उसका सिर यमुना नदी में फेंक दिया था। लाश को बांधने का अंदाज भी वही था। इन हत्याओं ने दिल्ली में हड़कम्प मचा दिया था और पुलिस की नींदें अब पूरी तरह से उड़ चुकी थीं।

लाश के साथ एक चिट्ठी हर बार छोड़ी जाती थी
दिल्ली पुलिस इस केस की छानबीन में जुटी ही थी कि करीब एक महीने बाद फिर वही कांड दोहराया गया और एक बार फिर तिहाड़ के बाहर लाश रखी गई। लाश के साथ एक चिट्ठी हर बार छोड़ी जाती थी। इस चिट्ठी पर एक बात लिखी होती थी- दिल्ली पुलिस का जीजा या दिल्ली पुलिस का बाप, चिट्ठी लिखने वाले की जगह नाम लिखा होता था- सीसी।

तिहाड़ के सामने लाश रखने का एक मकसद था
नेटफ्लिक्स की इस मिस्ट्री डॉक्यूमेंट्री की कहानी काफी फिल्मी है। इस डॉक्यूमेंट्री में उस चिट्ठी की भी झलक है, जिसमें हत्यारे ने लिखा है, ‘अबतक मैं नाजायज केस झेलता रहा हूं, लेकिन इस बार मैंने सच में मर्डर किया है। तुम लोग मुझे कभी भी नहीं पकड़ पाओगे, मुझे केस खुलने का डर नहीं है। मुझे केस खुलने का डर नहीं है। मुझे पकड़ सको तो पकड़ कर दिखाओ, तुम्हारे इंतज़ार में तुम लोगों का बाप और जीजाजी- सीसी।’ पुलिस ने पहले तो इस चिट्ठी को मीडिया से दबाने की कोशिश की थी लेकिन बाद में यह सामने आ ही गया। जिस वक्त एक पर एक ये हत्याएं हो रही थीं दिल्ली पुलिस के सुंदर सिंह यादव थे जो इस केस को देख रहे थे। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री में बताया है कि तिहाड़ के सामने लाश रखने का एक खास मकसद होता था।

जेल में कॉन्स्टेबल के व्यवहार से खुन्नस में था चंद्रकांत
बताया जाता है कि चंद्रकांत झा को किसी मामले में जेल हुई, जहां कॉन्स्टेबल बलबीर ने उसे परेशान किया, नंगा किया और खाना भी नहीं मिलता था। बस इसी बात को लेकर उसपर सनक सवार था। चंद्रकांत झा हर मर्डर से पहले उस कॉन्स्टेबल की ड्यूटी चेक करता और फिर लाश टोकरी में रखकर उसी गेट के पास वाले नंबर पर फोन करता था जहां बलबीर की ड्यूटी होती थी।

गांव के लोगों ने कहा- उसने 44 मर्डर किए
चंद्रकांत ने कुल कितने मर्डर किए इसका वास्तव में कोई हिसाब नहीं है। साल 1998 में पहली बार चंद्रकांत का नाम पुलिस की रडार पर आया था। पैसों को लेकर वेंडर असोसिएशन के हेड मंगल सैन पंडित की हत्या का वो पहला मामला था। बताया जाता है कि चंद्रकांत घोषई, मधेपुरा का था और दिल्ली आने से पहले ही वह हत्या कर चुका था। वह बिहार से ही दिल्ली आनेवाले लोगों को अपना दोस्त बनाता, उसके साथ रहता था और फिर अगर थोड़ी सी भी कुछ गड़बड़ हो जाती थी वह मौत के घाट उतार देता था। डॉक्यूमेंट्री में उसके इस गांव के लोगों ने भी कहा कि उसने 44 मर्डर किए थे और जब कई चंद्रकांत से झूठ बोलता तो वह उसकी जान ले लेता था।

इस सीरीज में चंद्रकांत के तीन मर्डर का जिक्र
नेटफ्लिक्स की इस सीरीज में चंद्रकांत के तीन मर्डर का जिक्र है, जिसमें अनिल मंडल (20 अक्टूबर 2006), उपेंद्र (25 अप्रैल 2007) और दलीप (18 मई 2007) की हत्या की कहानी दिखाई गई है।

इस तरह से पकड़ा गया वो हत्यारा
दिल्ली पुलिस इस सीरियल मर्डर केस से परेशान हो चुकी थी, लेकिन तीसरे मर्डर से पुलिस को एक रास्ता जरूर मिला। दरअसल चंद्रकांत किसी डॉक्टर के पास जाता था और दिल्ली पुलिस उस डॉक्टर तक पहुंचने में सफल हो गई। इसके बाद उसका स्केच तैयार किया गया और फिल्मी अंदाज में उसे पकड़ने की घटना को अंजाम दिया गया। पुलिस ने अपना हुलिया बदला और डॉक्टर के आसपास जाल बिछा दिया और फिर साल 2007 में ही उसे पुलिस ने दबोच लिया।

अब कहां है हत्यारा चंद्रकांत
चंद्रकांत को पहले फांसी की सजा हुई, जिसे बाद में उम्र कैद में बदला गया। जनवरी 2022 की बात है जब चंद्रकांत पैरोल पर निकलना चाह रहा था लेकिन उसकी इस याचिका को ठुकरा दिया गया। चंद्रकांत सलाखों के पीछे उसी तिहाड़ जेल में सड़ रहा है जिसके सामने उसने लाशों की ढेर लगाई थी।



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