Himalayan baba yogi may actually be former bureaucrat from Finance Ministry says source – Business News India


NSE Scam: देशभर में इन दिनों नेशनल स्टाॅक एक्स्चेंज (NSE) का मामला सुर्खियों में हैं। इस मामले की जांच सेबी (SEBI), इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और सीबीआई (CBI) भी कर रही है और आए दिन चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। 59 साल की चित्रा रामकृष्ण (Chitra ramkrishna) अपने कार्यकाल के दौरान एनएसई के सारे फैसले हिमालय पर बैठे रहस्यमय बाबा योगी (Himalayan Yogi) के आदेश पर लेती थीं। चित्रा के बयान के मुताबिक, योगी के इशारे पर कई सालों तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बड़े फैसले लिए गए। लेकिन योगी कौन हैं इसके बारे में कुछ भी पता नहीं चल पा रहा है, हालांकि जांच एजेंसियां पूरी तैयारी के साथ रहस्यमय योगी के बारे में पता लगाने में जुटीं हैं। 

वित्त मंत्रालय के पूर्व ब्‍यूरोक्रेट पर शक

इस बीच सूत्रों के हवाले के खबर है कि कथित योगी वित्‍त मंत्रालय का ही कोई ब्‍यूरोक्रेट हो सकता है। सूत्रों की मानें तो अदृश्य योगी का न तो हिमालय से कोई संबंध है और न ही वे कोई बाबा हैं। संभावना है कि ये वित्त मंत्रालय का कोई ब्‍यूरोक्रेट था, जो चित्रा रामकृष्‍ण पर मेहरबान था। चित्रा की करियर को चमकाने में उसका हाथ था।

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आंनद सुब्रमण्यम पर भी शक की सुई

EY, सलाहकार जिसने इस मामले की फोरेंसिक रिपोर्ट दी, उसके मुताबिक आनंद सुब्रमण्यम और रहस्यमय योगी एक ही व्यक्ति हैं। वहीं, कुछ अन्य रिपोर्ट्स की मानें तो सीक्रेट योगी कोई तीसरा व्यक्ति है। हालांकि, चित्रा और सुब्रमण्यम के बीच ‘केमिस्ट्री’ एनएसई कर्मचारियों के बीच मिस्ट्री थी। एनएसई के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि वह और सुब्रमण्यम दोनों ज्योतिष और रूढ़िवादी रीति-रिवाजों में विश्वास करते थे और उनका उन पर मजबूत पकड़ था। वह बिना किसी डांटे-फटकारे अपने वरिष्ठ साथियों के साथ बदतमीजी करता था। चित्रा ने कुछ प्रशासनिक नियमों को बदल दिया था ताकि सुब्रमण्यम, अलाउंसेस (प्रथम श्रेणी की हवाई यात्रा, व्यावसायिक यात्राओं पर आवास) का आनंद ले सकें। 

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कौन हैं चित्रा रामकृष्ण और आनंद सुब्रमण्यम? (Who is chitra ramkrishna and anand subramanian?)

चित्रा रामकृष्ण साल 2013 से लेकर 2016 तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सीईओ और एमडी रहीं। 2013 में उन्हें सीईओ पद सौंप दिया गया। हालांकि, 2016 में उन्हें पद के गलत इस्तेमाल और एक घोटाले से नाम जुड़ने के बाद एनएसई से निकाल दिया गया था। चित्रा पर आरोप हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाम के दौरान कई ऐसे फैसले लिए, जो कि शेयर बाजार के हित से नहीं जुड़ा था। इनमें एक फैसला था आनंद सुब्रमण्यम की नियुक्ति का, जिनके लिए चित्रा ने एनएसई में अधिकारी स्तर का पद तैयार किया था। साथ ही चित्रा ने अपने कार्यकाल के दौरान हर बार आनंद सुब्रमण्यम को प्रमोशन दिया। आनंद सुब्रमण्यम एनएसई में शामिल होने से पहले बामर एंड लॉरी नाम की एक कंपनी में काम करते थे। जहां उनकी सैलरी केवल 15 लाख रुपये सालाना थी और शेयर बाजार और उससे संबंधित काम का कोई अनुभव नहीं था। बावजूद आंनद सुब्रमण्यम को 1.68 करोड़ रुपये का सैलरी पैकेज दिया गया। 

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