Hepatitis A,B,C,D,E क्या है? डॉक्टर से जानिए किन्हें है लीवर की इस घातक बीमारी का खतरा – doctor explain various type of hepatitis know the cause symptoms and treatment


लीवर में सूजन को हेपेटाइटिस (hepatitis) कहा जाता है। हेपेटाइटिस एक वायरस होता है, जो अत्यधिक शराब के सेवन, विषाक्त पदार्थ, दवाएं और कुछ मेडिकल कंडीशन के वजह से शरीर में पनपने लगते हैं। लीवर आपके शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग होता है जो पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, खून को फिल्टर करने के साथ ही संक्रमण से लड़ता है। ऐसे में जब लीवर में सूजन या क्षति होती है, तो यह कार्य प्रभावित होने लगते हैं। अनुपचारित हेपेटाइटिस लीवर फेल या लीवर कैंसर कारण बन सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का अनुमान है कि वर्तमान में वैश्विक स्तर पर 354 मिलियन लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस बी और सी से पीड़ित हैं।

मुंबई के मेडिसिन सोमैया मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अमर आर. पजारे बताते हैं कि हेपेटाइटिस वायरस को काफी हद तक रोका जा सकता है। वायरल हेपेटाइटिस को भारत में, विशेषकर सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों में स्वास्थ्य की एक गंभीर समस्या माना जाता है। भारत की आबादी में लगभग 5 करोड़ लोग क्रोनिक हेपेटाइटिस से पीड़ित हैं।

​कई तरह के होते हैं हेपेटाइटिस के वायरस

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हेपेटाइटिस दो उप-समूहों के बाँटा गया है – संक्रामक हेपेटाइटिस और सीरम हेपेटाइटिस। संक्रामक हेपेटाइटिस में हेपेटाइटिस ए और हेपेटाइटिस ई शामिल होते हैं। वहीं, सीरम हेपेटाइटिस में हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और हेपेटाइटिस डी शामिल होते हैं। दोनों प्रकार के हेपेटाइटिस शरीर में विभिन्न वायरस से संक्रमित पदार्थों, जैसे कि पानी, जूस, भोजन, दूध आदि के सेवन के कारण होते हैं।

​संक्रामक हेपेटाइटिस लक्षण और कारण

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वायरल हेपेटाइटिस ए बच्चों में और हेपेटाइटिस ई सभी उम्र के लोगो में होता है। इन मरीजों में बुखार, मितली, उल्टी, भूख की कमी, अत्यंत कमजोरी, आँखों और पेशाब में पीलापन, पेट में दर्द, शरीर पर खुजली जैसे विविध लक्षण प्रकट होते हैं। कुछ मरीजों को मुँह से रक्तस्राव या त्वचा पर काले धब्बे हो सकते हैं। दुर्लभ मामलों में कोई-कोई मरीज कोमा में जा सकता है। जाँच में लिवर की असामान्य क्रिया की जाँच, बढ़ा हुआ और भंगुर (टेंडर) लिवर के लिए जाँच और सोनोग्राफी तथा वायरस के प्रकार के जाँच शामिल हैं।

​सीरम हेपेटाइटिस लक्षण और कारण

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सीरम हेपेटाइटिस डी एक अपूर्ण वायरस है और इसे जीवित रहने के लिए हेपेटाइटिस बी से मदद की ज़रुरत होती है। हेपेटाइटिस बी और सी रक्त या रक्त उत्पाद आधान (ट्रांसफ्यूजन), यौनिक या नसों में मादक पदार्थ लेने (सूई साझा करना) के माध्यम से संचारित होते हैं। इस हेपेटाइटिस में संक्रामक हेपेटाइटिस जैसे बुखार के लक्षण प्रकट नहीं होते, लेकिन आँखों और पेशाब में पीलापन जैसे अन्य लक्षण प्रकट होते हैं।

​हेपेटाइटिस का उपचार

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  • हेपेटाइटिस ए और ई के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है। यह अपने-आप सीमित होने वाली खराबी है। इसका उपचार लक्षण के आधार पर होता है।
  • हेपेटाइटिस बी ठीक नहीं होता है, इसलिए इसमें वायरस के प्रतिरूपण (रेप्लिकेशन) को नियंत्रित करने के लिए आजीवन उपचार की ज़रुरत हो सकती है। हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए हेपेटाइटिस बी का टीका लगवाने की सलाह दी जाती है।
  • हेपेटाइटिस सी पूरी तरह ठीक होने वाला रोग है। अगर लिवर की क्रिया में अव्यवस्था का कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं है तो हेपेटाइटिस सी की जाँच करा लेनी चाहिए। इसका उपचार केवल 3 महीने के लिए होता है और बहुत खर्चीला भी नहीं है।

​कितना खतरनाक है हेपेटाइटिस रोग

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हेपेटाइटिस ए और ई को उचित सावधानियों के साथ रोका जा सकता है। हेपेटाइटिस बी को भी वैक्सीन से रोका जा सकता है। आम तौर पर हेपेटाइटिस ए और ई के परिणाम अच्छे निकलते हैं। हेपेटाइटिस सी का उपचार अगर सिरोसिस (लिवर का कैंसर) होने के पहले हो जाता है तो इसके परिणाम भी अच्छे निकलते हैं। हेपेटाइटिस बी ऐसा रोग है जो एक्‍यूट हेपेटाइटिस होने पर जानलेवा हो जाता है। यह बढ़कर सिरोसिस में बदल जाता है जिसके लक्षण बुरे होते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।



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