बीमा जो संवारे आपका आने वाला कल
December 22, 2018 • Shiv Mohan

बीमा जो संवारे आपका आने वाला कल

- जीवन बीमा के सन्दर्भ में -

आज के आधुनिक परिवेश और बढ़ते आर्थिक अस्थिरता के चलते भविष्य को लेकर चिंतित होना स्वाभाविक बात है। लेकिन इसके क्या करें और क्या न करें और कब करें इसमें उलझकर रह जाते हैं और ज्यादातर लोग पैसों की सेंविग करनें में ही अपनी समझदारी समझते हैं। किसी निवेश या बीमा की बात नहीं सूझती है। किसी निवेश की और ध्यान नहीं जाता, वैसे तो बीमा एक निवेश ही लेकिन यह जानकारी के अभाव में सिर्फ एक क्षतिपूर्ति का साधन मात्र ही लगता है।

बीमा की बात सामने आते ही हम अकसर यह सोचने लगते हैं कि बीमा कितने का और कितना होना चाहिये। बीमा हर व्यक्ति के लिए उसके अपने हालात और जरूरत पर निर्भर करता है।  फिर भी एक आम समीकरण के अनुसार आप एक वर्ष में जितना कमाते हैं उस का आठ गुना राशि निकाल लें।  इस में आप अपनी तरल संपत्तियां जैसे नकदी, बैंक जमा और म्यूचअल फंड आदि  को घटा दें और अपनी देनदारियां जैसे लोन, बच्चों की जिम्मेदारी, अन्य कोई जिम्मेदारी (जैसे घर का कोई अपंग सदस्य या बेटी या बहन की शादी का खर्चा जो आप पर निर्भर हो) को इस में जोड़ लें।  इस प्रकार जो राशि आयेगी उतनी राशि का बीमा आपको अवश्य लेना चाहिये। यही ध्यान देना चाहिए कि मुद्रास्फीति का असर क्या होगा। यदि आप चाहते हैं कि आप का परिवार किसी भी अनहोनी की अवस्था में इसी रहन सहन को हमेशा के लिये बनाए रखना चाहते हैं तो गिनकर देखिये आपको कितने बीमा की आवश्यक्ता है और क्यों है।

इससे पहले हम जान लेते हैं कि आखिर बीमा क्या है। बीमा सामान्यतः उस साधन को कहते हैं जिसके द्वारा कुछ शुल्क (जिसे प्रीमियम कहते हैं) देकर हानि का जोखिम दूसरे पक्ष (बीमाकर्ता) पर डाला जा सकता है। जिस पक्ष का जोखिम बीमाकर्ता पर डाला जाता है उसे 'बीमाकृत' कहते हैं।  बीमाकर्ता आमतौर पर एक कंपनी होती है जो बीमाकृत के हानि या क्षति को बांटने को तैयार रहती है और ऐसा करने में वह समर्थ होती है।

वास्तव में बीमा दो लोगों (बीमाकर्ता और बीमाकृत) के बीच एक अनुबंध है जिसमें बीमाकर्ता बीमाकृत से एक निश्चित प्रीमियम के बदले किसी निश्चित घटना के घटित होने (जैसे कि एक निश्चित आयु की समाप्ति या मृत्यु की स्थिति में) पर एक निश्चित राशि देता है या फिर बीमाकृत की जोखिम से होने वाले वास्तविक हानि की क्षतिपूर्ति करता है।

बीमा को एक तरह का सहयोग भी कहा जा सकता है। जिसमें सभी बीमाकृत लोग, जो जोखिम का शिकार हो सकते हैं, प्रीमियम अदा करते हैं जबकि उनमें से सिर्फ कुछ (बहुत कम) को ही, जो वास्तव में नुकसान उठाते हैं, मुआवजा दिया जाता है। वास्तव में जोखिम की संभावना वालों की संख्या अधिक होती है लेकिन किसी निश्चित अवधि में उनमें से केवल कुछ को ही नुकसान होता है। बीमाकर्ता (कंपनी) बीमाकृत पक्षों के नुकसान को शेष बीमाकृत पक्षों में बांटने का काम करती है।

बीमा किस स्थिति में हो सकता है?

बीमा हित का अर्थ व्यापक है। पति पत्नी के जीवित रहने में एक दूसरे का हित तो स्पष्ट ही है। कर्जदार के जीवन में महाजन का हित भी वैसा ही मान्य है। इसी प्रकार संपत्ति बीमा के लिए बीमाहित उस संपत्ति के स्वामी को तो है ही। यह हित उस व्यक्ति को भी उपलब्ध हो जाता है, जिसे किसी अनुबंध के अंतर्गत कोई संपत्ति उपलब्ध होती है। किसी अनुबंध द्वारा बीमा हित उत्पन्न होने का आधार उत्तरदायित्व अथवा हित दोनों हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जब कोई व्यक्ति कोई मकान किराए पर लेता है तो उस मकान की देखभाल का कोई उत्तरदायित्व उस पर नहीं होता लेकिन चूँकि उस अनुबंध से किराएदार को सुरक्षा की सुविधा उप्रलब्धि होती है अत: उस मकान की सुरक्षा के बीमे के लिए भी उस किराएदार को बीमा हित उपलब्ध हो जाता है।

बीमा अनुबंध का दूसरा प्रमुख आधार सद्भाव एवं निष्कपटता है। अत: यह आवश्यक है कि दोनों पक्ष (बीमा करनेवाला तथा बीमा करानेवाला) बीमा विषयक सभी तथ्य प्रस्तुत कर दें। प्रस्तुत का आशय यह हा कि जान बूझकर कुछ छिपाया न जाए। यदि कोई सार तथ्य प्रस्तुत न किया गया हो तो दूसरा पक्ष उक्त अनुबंध से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

जीवन बीमा क्या है?

जीवन बीमा बीमित व्यक्ति की मृत्यु की अवस्था में उसकी आय से होने वाली हानि से परिवार को सुरक्षा प्रदान करता है।  आज के दौर में जब शहरों में हर दूसरा व्यक्ति कर्ज लिये मकान में रहता है तो इस अवस्था में जीवन बीमा की अवश्यक्ता और भी बढ़ जाती है।

जीवन बीमा के प्रकार -

टर्म इन्शोरेंस  : टर्म इन्शोरेंस बेसिक और दूसरे जीवन बीमा प्लान्स के मुकाबले सस्ता इन्शोरेंस होता है जिसमें केवल जीवन बीमा कवर दिया जाता है और इसमें दिए गए प्रीमियम या प्रीमियम का कोई भाग निवेश नहीं किया जाता। टर्म इन्शोरेंस में एक निश्चित बीमा राशि बीमा धारक की मृत्यु होने की दशा में लाभार्थी को दी जाती है और पालिसी की अवधी पूरी होने पर पालिसी होल्डर के जीवित होने की स्थिति में कुछ भी भुगतान नहीं किया जाता है।

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