Tuesday, June 28, 2022
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famous mom dialogues: 4 hillarious dialogues bong mothers will say when they see their child after long ages – मांओं के ये डायलॉग सुनते-सुनते पक गए हैं बच्‍चे, फिर भी हर मां को अजीज हैं ये प्‍यारी बातें


‘मां’, जिनकी पूरी दुनिया अपने बच्‍चे के चारों ओर घूमती है। वो जो करती है, कहती है, सुनती है, सोचती है, सब कुछ उसके बच्‍चे से जुड़ा होता है। कहते हैं कि मां अपने बच्‍चे की शक्‍ल देखकर उसके दिल का हाल बता सकती है। वहीं मां के बिना हमारी जिंदगी भी अधूरी होती है। जब भी बच्‍चे को कोई तकलीफ होती है, तो उसके मुंह से सबसे पहले मां शब्‍द ही निकलता है। मां और बच्‍चे का रिश्‍ता होता ही इतना खास है कि इन्‍हें कुछ बोलकर बताने की जरूरत नहीं होती है। मां अपने बच्‍चे की हर बात बिना कहे ही जान लेती है और बच्‍चा भी बड़ा होने पर अपनी मां का सहारा बनता है।

हर मां अलग होती है और उनकी परवरिश का तरीका उनके धर्म, रहने की जगह और आसपास के माहौल से भी जुड़ा होता है। आज इस आर्टिकल में बंगाली मांओं की बात कर रहे हैं। जो बंगाली मांएं होती हैं, वो अपने बच्‍चों के लिए कुछ अलग डायलॉग बोलती हैं। जी हां, जब ये मांएं एक लंबे अर्से के बाद अपने बच्‍चे से मिलती हैं, तो उन्‍हें कुछ खास या एक ही तरह के डायलॉग मारती हैं। इनमें से कुछ डायलॉग के बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं।

​पतलेपन पर वार

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बंगाली मां ही नहीं बल्कि हर मां अपने बच्‍चे के से लंबे समय के बाद मिलने पर यही कहती है ‘सूखनो डंडा हो गया है, ये सरसों के तेल की तरह नहीं दिखता’। आपकी मां ने भी जिंदगी में कभी ना कभी आपको ये डायलॉग जरूर मारा होगा। अगर आप इस बात से सहमत हैं, तो नीचे कमेंट कर के जरूर बताएं।

​बोरोलिन पैक कर दूं

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बोरोलिन, बंगाली मांओं की सिल्‍वर बुलेट होती है। स्किन के साथ कुछ भी गलत हुआ, इनकी बोरोलिन निकल जाती है। एंटासिड, फेस पाउडर और हेयर ऑयल के साथ बंगाली मांएं बोरोलिन भी जरूर रखती हैं।

​पेट भर के खा

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मां का ये डायलॉग भले ही बंगाली में है लेकिन हर मां इसे बोलती है। ‘पेट भोरे खा, सोना, जमाई बाबू के लिए फिश करी पैक कर दी है’। जब आप अपनी मां से लंबे समय के बाद मिलते हैं, तो वो आपकी थाली में खूब सारा खाना परोस देती हैं।

​मुझसे कुछ मत छिपाओ

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अक्‍सर मांएं ये कहती हैं कि ‘ मुझसे कुछ मत छिपाना, मैं तुम्‍हारी मां हूं, मोने रा‍खिश’। अपनी मां का ये डायलॉग आपने भी हिंदी, गुजाराती या किसी और भाषा में सुना होगा।

भाषा चाहे कोई भी हो, अपने बच्‍चे के लिए मां की फीलिंग एक ही होती है। वो चाहती है कि उसका बच्‍चा भरपेट खाए, सुंदर दिखे और खुश रहे। मां के लिए बस यही उसकी दुनिया होती है।

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