Saturday, July 2, 2022
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delhi new jail in narela: Delhi New Jail in Narela: नरेला में बनेगी दिल्ली की चौथी जेल, एलजी के दखल से सुलझा विवाद


नई दिल्ली: तिहाड़ जेल में कैदियों के बढ़ते बोझ को कम करने का रास्ता साफ हो गया है। इसके लिए डीडीए की ओर से दिल्ली के जेल डिपार्टमेंट को औपचारिक रूप से नरेला में 1.6 लाख स्क्वायर मीटर जमीन दे दी गई है। जहां जल्द ही नई जिला जेल बनाने का काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेल में क्षमता से कहीं अधिक रह रहे कैदियों को नई जिला जेल नरेला में शिफ्ट कर दिया जाएगा। मौजूदा समय में तिहाड़ जेल में क्षमता से करीब ढाई गुना अधिक कैदी बंद हैं।

करीब दो दशकों से डीडीए और जेल डिपार्टमेंट के बीच जमीन अलॉटमेंट को लेकर रस्साकशी चल रही थी। दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने इसके समाधान का रास्ता निकाला है। सूत्रों ने बताया कि इसके लिए एलजी ने 8 जून को डीडीए को आदेश दिए थे कि वह नरेला में जिला जेल बनाने के लिए जेल डिपार्टमेंट को लैंड हैंडओवर करे। डीडीए से इसकी रिपोर्ट 15 जून तक देने के लिए कहा गया। इसके बाद डीडीए ने 15 जून को नरेला की 1.6 लाख स्क्वायर मीटर जमीन जेल डिपार्टमेंट को हैंडओवर कर दी। इसके साथ ही अब यहां जिला जेल बनाने का रास्ता साफ हो गया।

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सूत्रों ने बताया कि तिहाड़, रोहिणी और मंडोली जेलों में 10 हजार 26 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेकिन इन तीनों जेलों में 30 मई को 19,691 कैदी बंद थे। यानी क्षमता से करीब दो गुना अधिक कैदी। इनमें भी नौ जेलों वाली तिहाड़ जेल में 5200 कैदियों को रखने की क्षमता है। लेकिन यहां 13,283 कैदी बंद हैं। जो क्षमता से करीब ढाई गुना अधिक है। इसी तरह से 1050 कैदियों की क्षमता वाली रोहिणी जेल में 2067 कैदी बंद हैं, जबकि 3,776 कैदियों की क्षमता वाली मंडोली जेल में 4,341 कैदी बंद हैं। सबसे बुरी स्थिति तिहाड़ जेल की है। जहां क्षमता से करीब ढाई गुना अधिक कैदी बंद हैं। ऐसे में ना तो यहां कैदियों की ठीक से निगरानी हो पा रही है और न ही कैदियों को मूलभूत सुविधाएं ही मिल पा रही हैं। ऐसे में अब नरेला में नई जिला जेल बनने के बाद तीनों जेलों पर कैदियों का बोझ कम हो सकेगा।

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सूत्रों ने बताया कि डीडीए से जमीन लेने के लिए 2003 में जेल डिपार्टमेंट ने डीडीए को 7.79 करोड़ रुपये दिए थे। इसके बाद डीडीए ने नरेला की इस जमीन के लिए जेल डिपार्टमेंट से करीब 128 करोड़ रुपये की रिवाइज डिमांड रखी। जिसे डिपार्टमेंट ने 2020 में पूरा कर दिया था। हालांकि, इस मामले में पेमेंट में देरी की वजह से 29 करोड़ 88 लाख रुपये ब्याज के तौर पर और मांगे गए हैं।



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