Delhi Monkeypox News: दिल्ली में डॉक्टर अलर्ट, मंकीपॉक्स के पहले मरीज का क्या है हेल्थ अपडेट – delhi monkeypox patient health update all latest news


नई दिल्ली: दिल्ली में मंकीपॉक्स के मिले पहले मामले के बाद राजधानी में डॉक्टर्स से लेकर मेडिकल एजेंसिया अलर्ट पर हैं। इस बीच, दिल्ली के 34 वर्षीय मरीज की स्थिति स्थिर बताई जा रही है। इस बीच, राज्य सरकार ने इस बीमारी से निपटने के लिए बड़ी तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि पीड़ित शख्स अपने दोस्तों को साथ हिमाचल प्रदेश गया था। इसके बाद उसे कुछ दिनों तक बुखार आया था। प्रशासन शख्स के संपर्क में आए लोगों को आइसोलेट कर चुकी है।

दिल्ली के पीड़ित शख्स का हेल्थ अपडेट
वह इस वक्त लोक नायक अस्पताल में भर्ती है और डॉक्टर उसकी निगरानी कर रहे हैं। अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि पश्चिम दिल्ली के रहने वाले पीड़ित शख्स को अभी बुखार नहीं है उसके शरीर के कई हिस्सों में बड़े घाव निकल आए हैं। मरीज का इलाज कर रहे एक डॉक्टर ने बताया कि शख्स ने जैसे ही खुद को मंकीपॉक्स होने की बात सुनी तो वह घबरा गया था। हालांकि, उसकी काउंसलिंग की जा रही है। अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर ने कहा कि मरीज की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। उसे अब बुखार नहीं है। हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर भी नॉर्मल है। सभी पैरामीटर सही से काम कर रहे हैं। फिजिशियन, स्किन स्पेशलिस्ट सहित डॉक्टरों की एक टीम मरीज के इलाज में जुटी है। उसकी रिकवरी अच्छी हो रही है, उसे किसी भी प्रकार की कोई कंप्लीकेशन नहीं है।
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क्या मंकीपॉक्स का इलाज है?
लोकनायक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ सुरेश कुमार ने बताया कि मंकीपॉक्स का कोई इलाज नहीं है। हम केवल लक्षण के आधार पर इलाज करते हैं। जैसे घाव के इलाज के लिए लोशन का इस्तेमाल और मल्टी विटामिन दी जाती है। गौरतलब है कि लोक नायक अस्पताल को दिल्ली में मंकीपॉक्स के इलाज के लिए नोडल अस्पताल बनाया गया है।

भारत में मंकीपॉक्स के कितने मरीज

भारत में मंकीपॉक्स के चार मरीज मिले हैं। तीन मरीज केरल में मिले हैं जबकि एक मरीज राजधानी दिल्ली से मिला है। केरल के मरीजों का विदेश यात्रा की हिस्ट्री रही है जबकि दिल्ली का मरीज विदेश नहीं गया था। दिल्ली में मिला मरीज जून के आखिरी हफ्ते में अपने दोस्तों के साथ हिमाचल प्रदेश गया था। इसके बाद उसे बुखार आया था। शुरुआत में दिल्ली के शख्स को लगा कि ये सीजनल बुखार है।
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दुनिया में मंकीपॉक्स के कितने पेशेंट
दुनियाभर में मंकीपॉक्स के 16 हजार से ज्यादा मरीज मिले हैं। पिछले 7 महीने के दौरान ये मरीज मिले हैं। इसे देखते हुए ही विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दी थी।

मंकीपॉक्स की बीमारी किसे
अभी तक मिले ज्यादातर केस पुरुषों में मिले हैं। और ये बीमारी उन्हें हुई हैं जो गे, बाइसेक्सुअल और अन्य पुरुषों के साथ सेक्स किया है। इस तरह के लोगों को इस बीमारी को लेकर जागरूक करने की जरूरत है। एक्सपर्ट की माने तो छोटे बच्चे खासकर जिनकी इम्युनिटी कमजोर है उनके इस बीमारी से प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, एचआईवी पेशेंट भी इस बीमारी के खतरे की जद में हैं।
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मंकीपॉक्स के बारे में जानें सबकुछ

मंकीपॉक्स पर्सन टु पर्सन से हो सकता है अगर
-मंकीपॉक्स वाले शख्स के सीधे संपर्क में आ जाएं। उसके घाव से संपर्क हो जाए। या फिर सेक्सुअल कंटेक्ट हो।
-मरीज के कपड़े, बिस्तर, टॉवेल आदि का कोई दूसरा शख्स इस्तेमाल करे।
-मंकीपॉक्स के मरीज के कफ या छींक के संपर्क में कोई शख्स आ जाए।

मंकीपॉक्स के लक्षण
-हाई फीवर
-सिरदर्द
-मांसपेशियों में दर्द
-पीठ दर्द
-ग्लैंड में सूजन
-ठंड लगना
-हरारत या थकान

किसे डरने की जरूरत नहीं
-अगर आप किसी मंकीपॉक्स से पीड़ित शख्स के सीधे संपर्क में नहीं आए हैं तो।
-आपने किसी ऐसे देश में की हाल में यात्रा नहीं की जहां मंकीपॉक्स के मामले ज्यादा मिले हों।

क्या करें
-अपने हाथ को साबुन और पानी से रेग्युलर तौर पर धोते रहें। अल्कोहल वाले हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल करें।
-सेक्सुअल हेल्थ के बारे में अपने माता-पिता से बात करें और कोई सिम्टम हैं तो उन्हें बताएं।
-अगर आपको मंकीपॉक्स के लक्षण हैं तो सेक्स न करें।

क्या न करें

-मंकीपॉक्स के पीड़ित शख्स के बेड और टॉवेल को किसी दूसरे को न दें।
-मंकीपॉक्स से पीड़ित शख्स के एक मीटर के दायरे में आने से बचें।
-वैसे देशों की यात्रा के दौरान जहां मंकीपॉक्स के मरीजों की संख्या ज्यादा हैं वहां जानवरों के पास जाने से बचें जो बीमार लग रहा हो या मरा हो।

मंकीपॉक्स का इलाज क्या है?

-इस बीमारी के लक्षण 2-3 सप्ताह के भीतर खुद ही चले जाते हैं।
-कुछ लोगों को एंटीबॉयटिक्स देने की जरूरत पड़ सकती है। या दर्द या अन्य किसी दूसरे इंफेक्शन रोकने के लिए दवा दी जाती है।
-मंकीपॉक्स को रोकने के लिए एक नई वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। स्मॉलपॉक्स वैक्सीन को भी इसे रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। हालांकि ऐसी वैक्सीन अभी बड़े पैमाने पर नहीं मिल रही है।



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