Tuesday, June 28, 2022
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delhi cricket team: एस.एस. लीः चल बसा दिल्ली का ‘गुमशुदा’ चीनी क्रिकेटर – ss lee delhi cricketer passes away


विवेक शुक्ला
उन्होंने गुजरे करीब कुछ सालों में सारी दुनिया से अपने को अलग कर लिया था। कह सकते हैं कि उन्होंने अपने घर की चिटकनी ही लगा ली थी, लेकिन दिल्ली में एस. एस. ली को उनके दोस्त और चाहने वाले बार-बार मिला करते थे। हालांकि वे किसी से मिलने के लिए तैयार नहीं थे। दिल्ली क्रिकेट का एक बेहद खास नाम था ली। उनका बीते मंगलवार को निधन हो गया। वह 71 साल के थे। राजधानी के क्रिकेट को 1970 से 1990 के दशक तक देखने वालों के लिए ली की मीडियम तेज गेंदबाजी और बैटिंग देखने का अपना एक अलग अनुभव होता था। वे कमाल के फील्डर भी थे।

क्रिकेटर से अधिक बॉडी बिल्डर
ली क्रिकेटर से अधिक बॉडी बिल्डर लगते थे। हैंडसम और जिंदादिल ली का लाल चेहरा और बलिष्ठ भुजाएं उन्हें विशेष बनाती थीं। वे दिल्ली की रणजी ट्रोफी टीम से बार-बार खेलते रहे। हरफनमौला क्रिकेटर ली चीनी मूल के थे। ली का परिवार राजधानी में सन 1925 के आसपास साउथ चीन के कैंटोन प्रांत से आ गया था। उनका जन्म दिल्ली में हुआ था। उनका ज्यादातर वक्त साउथ एक्सटेंशन में गुजरा। कुछ साल मयूर विहार में भी रहे। ली अपने समाज के शायद अकेले नौकरीपेशा और शिव भक्त थे।

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दो टीमों की कप्तानी भी की
एस. एस. ली फ्रेंक एंथनी स्कूल, सेंट स्टीफंस कॉलेज और दिल्ली यूनिवर्सिटी से खेले। सेंट स्टीफंस क़ॉलेज और दिल्ली यूनिवर्सिटी क्रिकेट टीमों के कप्तान भी रहे। ली मिस्टर दिल्ली यूनिवर्सिटी भी रहे हैं। उनके साथ सालों दिल्ली क्रिकेट लीग में खेले रणजी ट्रोफी प्लेयर पवन अरोड़ा ने बताया कि ली बड़ी मुश्किल से फोन उठाते थे। उन्हें किसी कार्यक्रम में बुलाया जाता तो वे वादा करने के बावजूद नहीं आते थे। उन्हें फिरोजशाह कोटला या रोशनआरा क्लब में देखे हुए भी एक जमाना गुजर गया था। दिल्ली जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) की वेबसाइट पर यहां के सभी रणजी खिलाड़ियों का संक्षिप्त परिचय फोटो के साथ है, लेकिन ली की फोटो यहां भी नहीं है। एक बार हमने उनसे पूछा कि वे अपनी फोटो क्यों नहीं दे देते? ली ने बस इतना कहा- “फोटो देकर क्या होगा। अब मेरी कोई दिलचस्पी नहीं है।”

समाज के पास भी नहीं जानकारी
हमेशा बुलेट चलाने वाले ली की गतिविधियों की राजधानी के चीनी समाज से भी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाती है। उनके कनॉट प्लेस में रहने वाले एक संबंधी ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि ली अपने बेहद करीबी रिश्तेदारों के सुख-दुख में भी भाग नहीं लेते थे। ली से करीब एक साल पहले फोन पर बात हुई। उन्होंने फौरन पूछा, ” बेटा, मेरा नंबर किसने दिया?” फिर अपनी ‘गुमशुदगी’ के बारे में बताने लगे, ” अब क्रिकेट टीवी पर भी नहीं देखता। कोटला भी नहीं जाता।”

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20 साल खेला दिल्ली लीग
ली सेंटर वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन (सीडल्यूसी) की टीम से लगभग 20 साल तक दिल्ली लीग खेले। उन्होंने दिल्ली की तरफ से करीब 25 रणजी मैच बिशन सिंह बेदी की कप्तानी में खेले। बेदी के प्रति उनके मन में बहुत सम्मान था। वह कहते थे, “बेदी पाजी ने मुझे छोटे भाई की तरह प्यार दिया।” कहने वाले कहते हैं कि ली जब दिल्ली से खेल रहे थे तब यहां पर एक से बढ़कर एक बेहतरीन प्लेयर थे। ली का फर्स्ट क्लास क्रिकेट करियर लंबा हो सकता था अगर वे किसी अन्य राज्य से खेल रहे होते।



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