Delhi AIIMS Becomes 2nd Govt Hospital To Conduct Lung Transplant From Brain Dead Soldier – हादसे के बाद सैनिक ब्रेन डेड हो गया था, उसका फेफड़े से किसी और की जिंदगी बच गई, एम्‍स ऐसा करने वाला देश का दूसरा सरकारी अस्‍पताल


दुर्गेश नंदन झा, नई दिल्‍ली: एम्‍स देश का दूसरा सरकारी अस्‍पताल बन गया है जहां लंग ट्रांसप्‍लांट किया गया। इस सर्जरी में मरीज के एक या दोनों बीमार फेफड़े निकाले जाते हैं और उनकी जगह किसी डोनर का स्‍वस्‍थ फेफड़ा लगाया जाता है। अब तक चंडीगढ़ का PGIMER ही इकलौता सरकारी अस्‍पताल था जहां लंग ट्रांसप्‍लांट हो चुका है। एम्‍स में जिस महिला को नया फेफड़ा मिला, उसकी उम्र 30-40 साल के बीच है। उसे भारतीय सेना के सैनिक मुरली मनोहरन का फेफड़ा लगाया गया। मनोहरन को एक रोड एक्‍सीडेंट के बाद सेना अस्‍पताल ने ब्रेड डेड घोषित कर दिया था। मनोहरन की पत्‍नी कौशल्‍या ने अंगदान पर रजामंदी दी। मुरली के अंगों से गंभीर रूप से बीमार तीन मरीजों को नई जिंदगी मिली है। इसके अलावा वह अपनी आंखों से दो लोगों को देखने की क्षमता भी देकर गए हैं।

दो साल से वेंटिलेटर पर थी महिला
फेफड़ों का ट्रांसप्‍लांट एम्‍स में किया गया जबकि दिल का मुंबई के जसलोक अस्‍पताल और लिवर का दिल्‍ली के इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बाइलरी साइंसेज में। आर्मी हॉस्पिटल के ग्रुप कैप्‍टन सुमेश कायस्‍थ ने कहा कि यह पहली बार था जब ब्रेन डेड डोनर के फेफड़े लिए गए। उन्‍होंने कहा, ‘मरीज को सिस्टिक फाइब्रोसिस था जो फेफड़ों को डैमेज कर देता है, इस वजह से वह ठीक से सांस नहीं ले पा रही थीं। वह करीब दो साल तक नॉन-इनवेसिव वेंटिलेटर सपोर्ट पर रहीं।’ AIIMS डायरेक्‍टर डॉ रणदीप गुलेरिया ने बताया कि मरीज निगरानी में है। उन्‍होंने कहा कि अगले कुछ दिन क्र‍िटिकल हैं। गुलेरिया ने ट्रांसप्‍लांट सर्जरी करने वाले डॉक्‍टर्स को उनकी उपलब्धि पर बधाई दी।

लंग ट्रांसप्‍लांट करने वाला दूसरी सरकारी अस्‍पताल बना AIIMS
फेफड़ों की बीमारी के एंड स्‍टेज से जूझ रहे मरीजों का एक ही इलाज होता है- लंग ट्रांसप्‍लांट। इसकी डिमांड तेजी से बढ़ी है लेकिन उचित डोनर और ऑपरेशन के बाद देखभाल का खर्च ज्‍यादा होने की वजह से कम ट्रांसप्‍लांट ही होते हैं। दिल की तरह फेफड़ों का ट्रांसप्‍लांट भी किसी मृत डोनर के अंग से ही किया जाता है। अभी तक दुनियाभर में ऐसे 4,000 ऑपरेशन हुए हैं जिनमें से करीब 200 भारत में किए गए। AIIMS से पहले, भारत में केवल PGIMER ही ऐसा सरकारी संस्‍थान था जिसने लंग ट्रांसप्‍लांट किया था।

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मरीजों को नई उम्‍मीद मिली
प्राइवेट अस्‍पतालों में लंग ट्रांसप्‍लांट की लागत 20 से 30 लाख रुपये के बीच है। इसके बाद पूरी जिंदगी दवाइयां लेनी पड़ती हैं जिनपर हर साल लाखों रुपये खर्च होते हैं। AIIMS और PGI चंडीगढ़ जैसे सरकारी अस्‍पतालों में सर्जरी मुफ्त होती है। उनकी सफलता से एंड स्‍टेज बीमारियों के मरीजों को नई उम्‍मीद मिली है। AIIMS की योजना फॉलो-अप दवाएं भी मुफ्त में देने की है।



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