Monday, August 15, 2022
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Chinese Manja Ban: चाइनीज ही नहीं, दूसरे मांझे भी हैं खतरनाक, जानें क्या कहते हैं मांझों पर बने नियम और क्या होती है सजा – why chinese manja ban is not effective and what are the action for violations know all about chinese manja ban


विशेष संवाददाता, नई दिल्ली: हर बार चाइनीज मांझे से किसी की मौत के बाद इस जानलेवा चलन पर खूब शोर मचता है, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात नजर आ रहा है। आइए जानें कि आखिरकार मांझों को लेकर किस तरह के नियम और सजा के प्रावधान तय किए गए हैं:

क्या कहते हैं नियम

  • दिल्ली पर्यावरण विभाग के तहत राजधानी में 10 जनवरी 2017 को नोटिफिकेशन जारी किया गया। इसके मुताबिक राजधानी में पतंग उड़ाने के लिए नायलॉन, प्लास्टिक और अन्य तरह के सिंथेटिक सामान से तैयार मांझों की बिक्री, उत्पादन, स्टोरेज, सप्लाई और उसे आयात करने पर पूरी तरह बैन लगाया गया है। इसके अलावा पतंग उड़ाने के लिए राजधानी में किसी भी तरह के शार्प मांझे जैसे- कांच, मेटल या अन्य शार्प चीजों से तैयार मांझों पर भी रोक लगाई गई है।
  • पतंग उड़ाने के लिए लोग सूती मांझों का इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन इन सूती मांझों में किसी तरह के शार्प मेटल, कांच, चिपचिपा पदार्थ, मांझों को सीधा रखने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सामान का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।

उल्लंघन पर क्या सजा
पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम-1986 की धारा-5 या इसके अंतर्गत बनाए गए नियमों के तरह इन मांझों के इस्तेमाल करने और बेचने वालों पर कार्रवाई हो सकती है। इसमें पांच साल तक की जेल, एक लाख रुपये का जुर्माना या दोनों भी हो सकते हैं।

कौन करता है कार्रवाई
इस पर डीपीसीसी (दिल्ली प्रदूषण कंट्रोल कमिटी) के अलावा जिला प्रशासन की टीमें भी काम करती हैं। साथ ही एमसीडी की टीमें भी बाजारों पर नजर रखती हैं।

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इस साल क्या है तैयारी
राजधानी में पतंग उड़ने का सिलसिला तीज और 15 अगस्त पर अधिक रहता है। इस दौरान लगातार पतंगें उड़ती हैं। 15 अगस्त पर तो राजधानी के कई हिस्सों में पूरा आसमान पतंगों से पटा रहता है। यही वजह है कि मांझों पर कार्रवाई भी इसी दौरान होती है। हालांकि इस साल के लिए तैयारियां अभी शुरू ही हो रही हैं। डीपीसीसी के अनुसार, इसे लेकर कुछ मीटिंग्स हुई हैं। जल्द ही लोगों, विक्रेताओं को जागरूक करने का काम शुरू होगा। करीब एक हफ्ते में टीमों की मॉनिटरिंग शुरू हो जाएगी। अगर किसी यूनिट में प्रतिबंधित मांझों का उत्पादन मिलेगा या यह बिकता दिखेगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं करीब चार एसडीएम से इसे लेकर बात की गई। उनका कहना था कि पिछले कुछ सालों से मांझों को लेकर कार्रवाई होती आई है। लेकिन अभी तक इसे लेकर कोई निर्देश नहीं मिले हैं। निर्देश मिलने पर उसके अनुरूप ही कार्रवाई की जाएगी।

क्या आती है समस्या
राजधानी में मांझों के उत्पादन पर भी रोक है, लेकिन आसपास के जिलों में यह बहुतायत से तैयार होते हैं। आउटर क्षेत्र में भी मांझों का खूब काम होता है। चाइनीज मांझे तो फिर भी कुछ सालों में कम हुए हैं, लेकिन कांच व धातु लगे मांझे अब भी बाजारों में भरे पड़े हैं। लोगों के अनुसार, सूती मांझे इतने हल्के होते हैं कि उससे पतंग ज्यादा ऊंचाई पर और देर तक उड़ाई नहीं जा सकती। पेच लगाने व काटने में भी यह मजा नहीं देती। राजधानी में ऊंची-ऊंची बिल्डिंग होने व वजह से निचले स्तर पर व कई छतों पर पतंग उड़ाने के लिए हवा की गति पर्याप्त नहीं मिलती है। ऐसे में सूती मांझों में पतंग उड़ाना काफी मुश्किल होता है।

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पिछले साल हुई बड़ी कार्रवाई
पिछले साल जुलाई महीने में मध्य दिल्ली में छह किलो चाइनीज मांझा जब्त किया गया। अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान यह मांझा जब्त किया था। हौज काजी मार्केट में जूट के बैग के अंदर यह मांझा रखा गया था। शक होने पर व्यक्ति बैग छोड़कर फरार हो गया। इसलिए कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी। अगस्त 2021 में पेटा (पीपल्स फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स) की शिकायत पर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लाल कुआं की कई दुकानों से कई किलो अवैध मांझा जब्त किया था। चार लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था।

चाइनीज मांझे की जगह दूसरे खतरनाक धागे
पतंग विक्रेताओं के अनुसार, बाजार में चाइनीज मांझे नहीं मिल रहे। लेकिन नायलॉन, सिंथेटिक मांझे बिक रहे हैं। इन्हें कांच और धातु से शार्प किया जाता है। इसकी वजह से यह पक्षियों और इंसानों के लिए खतरनाक होते हैं। सूती मांझे आसानी से टूट जाते हैं। विक्रेताओं के अनुसार नायलान के मांझे को मजबूत बनाने के लिए उस पर केमिकल की परत चढ़ाई जाती है। यह मांझे को मजबूती देने के साथ उसे धार भी देती है। वहीं सूती मांझा चावल के आटे और कुछ देशी मसालों को मिलाकर बनाया जाता है।



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