Beggars Kids on Streets: दिल्ली में हर सिग्नल पर हाथ फैलाए खड़ा है बचपन…


नई दिल्लीः दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) को निर्देश दिया है कि वे दिल्ली की सड़कों पर भीख मांग रहे बच्चों को इससे रोकने और उनके पुनर्वास के लिए किए गए कामों का बारे में कोर्ट को बताएं। चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने कहा कि वह पिछले दो महीनों से दिल्ली में हैं और गाड़ी चलाते हुए उन्हें रोज सड़कों पर बच्चे भीख मांगते हुए दिखते हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए दो जजों की बेंच ने कहा कि अदालत सिर्फ दावे नहीं चाहती, जमीनी स्तर पर काम होते हुए देखना चाहती है। बेंच में जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद भी शामिल हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि मुझे दिल्ली आए लगभग दो महीने हो चुके हैं। मैं खुद कार चलाता हूं और मैं रोज सड़कों पर बच्चों को भीख मांगते हुए देखता हूं। आप (डीसीपीसीआर के वकील) एक दिन में नतीजों की बात कर रहे हैं। पिछले दो महीने से मैं देख रहा हूं।

​होती रहेगी मामले की निगरानी

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दरअसल, डीसीपीसीआर के वकील अंकित गुप्ता ने कहा था कि प्राधिकारी चौबीस घंटे काम कर रहे हैं और कदम उठा रहे हैं। नियमित रूप से ऐसे बच्चों को रेस्क्यू कराया जा रहा है। पर याचिकाकर्ता एक दिन में ही इस समस्या को हल होते हुए देखना चाहते हैं। बेहतर हो कि याचिका को हमें रिप्रेजेंटेशन के तौर पर दे दिया जाए। इस दलील पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि रिप्रेजेंटेशन देने से क्या होगा। संबंधित एजेंसी चार लाइनों का जवाब तैयार करके इस पर दे देगी। ऐसे बच्चों की पढ़ाई, उनके पुनर्वास की ज़िम्मेदारी कौन संभालेगा। कोर्ट ने साफ किया कि वह मामले की निगरानी करते रहेंगे।

​हम जमीनी हकीकत जानना चाहते हैं

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याचिकाकर्ता अजय गौतम ने भीख मांगने वाले बच्चों के पुनर्वास के लिए प्राधिकारियों को निर्देश देने और उन लोगों को गिरफ्तार करने का अनुरोध किया है, जो महिलाओं को शिशुओं, किशोरियों और छोटे बच्चों का इस्तेमाल कर भीख मांगने और अपराध में धकेल रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि युवतियों का शोषण हो रहा है। शहर के हर हिस्से में भिखारी होने के बावजूद प्राधिकारी इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्राधिकारियों ने कागजी काम बहुत शानदार किया है, लेकिन वह यह जानना चाहता है कि जमीनी हकीकत क्या है और इस संबंध में कौन से कदम उठाए जा रहे हैं। याचिका में दावा किया गया है कि छोटे बच्चों को लोगों की ज्यादा से ज्यादा हमदर्दी बटोरने के लिए जानबूझकर चोट पहुंचायी जाती है।

​कोर्ट ने जोनवाइज मांगी जानकारी

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हाई कोर्ट एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों को भिक्षावृत्ति से दूर रखने का अनुरोध किया गया है। इस मामले में केंद्र, दिल्ली सरकार और डीसीपीसीआर को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। कोर्ट ने मंगलवार को प्राधिकारियों से कहा कि वो नए सिरे से स्टेटस रिपोर्ट दायर करें और उसमे जोनवाइज जानकारी दें। रिपोर्ट में बताएं कि यहां सड़कों पर भीख मांगते पाए गए बच्चों को इससे रोकने और उनके पुनर्वास के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए। इसके लिए उन्हें आठ हफ्तों का समय दिया गया है। मामले पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

60 हजार से ज्यादा बेघर बच्चे, कैसे रुके भीख मांगना

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कोविड के बाद बाल मजदूरी और भीख मांगने वाले बच्चों की संख्या और ज्यादा बढ़ी है। कोविड के बीच कैलाश सत्यार्थी चिल्ड्रंस फाउंडेशन की 2021 की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 60 हजार से ज्यादा बेघर बच्चे हैं। फाउंडेशन ने एक सर्वे के बाद रिपोर्ट में बताया कि इनमें से 43% बच्चे बाजार, ट्रैफिक सिग्नल, रेलवे स्टेशन और लैंडफिल्स में देखे गए। 71% बच्चे 6 से 14 साल, 16% तीन से पांच साल और 12% 15 से 18 साल के मिले। फाउंडेशन का कहना है कि धार्मिक जगहों पर सबसे ज्यादा करीब 40 हजार बच्चे हैं, ट्रैफिक जंक्शन/फ्लाईओवर में 9 हजार से ज्यादा और रेलवे स्टेशन/बस स्टैंड पर 5 हजार से ज्यादा बच्चे हैं। फाउंडेशन का मानना है कि सरकार जब तक प्राथमिकता से रेस्क्यू और पुनर्वास पर काम नहीं करेगी, तब तक भीख मांगते बच्चों की संख्या घटेगी नहीं।



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