ayushman bharat yojna: ट्रांसजेंडर्स को हाशिये से मुख्यधारा की ओर लाने की पहल, आयुष्मान टीजी और स्कॉलरशिप योजनाएं


केंद्र सरकार की ओर से देश की ट्रांसजेंडर कम्युनिटी को मुख्यधारा में लाने के लिए शनिवार से शुरू की जा रही पहल सराहनीय है। इसके तहत आयुष्मान भारत टीजी और ट्रांसजेंडर बच्चों को पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप जैसी योजनाओं का लाभ इस समुदाय के लोगों तक पहुंचाते हुए उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयास किए जाने हैं। आयुष्मान भारत टीजी (ट्रांसजेंडर) योजना के जरिए लिंग परिवर्तन सर्जरी और उससे जुड़े तमाम पहलुओं को कवर किया जाता है। अब सपोर्ट फॉर मार्जिनलाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज यानी स्माइल योजना की दो उपयोजनाओं में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों तथा भीख मांगने के कार्य में लगे व्यक्तियों के पुनर्वास के कदम भी शामिल हैं। बताया गया है कि उन्हें आयुष्मान भारत टीजी योजना के तहत आईडी कार्ड भी मुहैया कराया जाएगा। इन योजनाओं के पीछे इरादे बेशक नेक हैं, लेकिन इनका वास्तव में कितना फायदा इस समुदाय के लोगों तक पहुंचता है यह साफ होने में थोड़ा वक्त लगेगा। इसमें दो राय नहीं कि आज भी इस समुदाय के लोगों को समाज में हर स्तर पर भेदभाव और अक्सर दुर्व्यवहार का भी सामना करना पड़ता है। कुछ ऐसे उदाहरण जरूर मिलते हैं जिनमें इनकी असाधारण उपलब्धियों को मान्यता मिलती नजर आती है, लेकिन वे अभी अपवाद रूप में ही हैं।

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Transgender लोगों के लिए सरकार ला रही है SMILE योजना, स्वास्थ्य बीमा से लेकर स्कॉलरशिप तक का मिलेगा लाभ

आम तौर पर पढ़ाई से लेकर रोजगार तक इन्हें या तो अपनी असली पहचान छुपानी पड़ती है या फिर कदम-कदम पर अपमान सहना पड़ता है। ऐसे में अगर सरकार ऐसी कोई पहल करती है, जिससे इस समुदाय के लोगों की स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित हो और वे पढ़ाई करके योग्यता के अनुरूप रोजगार हासिल कर सकें तो इससे अच्छी बात दूसरी नहीं हो सकती। लेकिन वास्तव में इन योजनाओं का लाभ इस समुदाय के सभी लोगों तक पहुंचाना कितना मुश्किल है, इसका अंदाजा लॉकडाउन के दौरान मिले अनुभव से होता है। उस दौरान सरकार ने घोषणा की थी कि ट्रांसजेंडर समुदाय के हर व्यक्ति के खाते में 1500 रुपये डायरेक्ट ट्रांसफर किए जाएंगे। गौरतलब है कि लाखों की संख्या में होने के बावजूद तब मात्र 5,711 ट्रांसजेंडर्स को रकम भेजी जा सकी। वजह यही रही कि इस समुदाय के ज्यादातर लोगों के पास न तो किसी तरह का सर्टिफिकेट है, न बैंक अकाउंट। ऐसे में किसी भी सरकारी योजना का लाभ उठाना इनके लिए खासा मुश्किल होता है। मौजूदा पहल के साथ भी यह शर्त रखी गई है कि इसका लाभ उन्हीं को मिलेगा जिनके पास मिनिस्ट्री ऑफ सोशल जस्टिस एंड एंपावरमेंट की ओर से जारी टीजी सर्टिफिकेट है। सरकारी पोर्टल के माध्यम से अब तक दिए गए टीजी सर्टिफिकेट की बात करें तो यह संख्या है 4,921 मात्र। साफ है कि योजना कागजी या नाम मात्र की बनकर न रह जाए, इसके लिए समुदाय के सभी लोगों तक पहुंचने या उन्हें इससे जोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास करने होंगे।

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