a thursday actor karanvir sharma: Exclusive: a thursday actor karanvir sharma not afraid of rejections, says – Sometimes you definitely get success – Exclusive: रिजेक्शन से नहीं घबराते ‘ए थर्सडे’ ऐक्टर करणवीर शर्मा, बोले- कभी न कभी जरूर मिलता है फल

सिस्टम से झुंझलाई लड़की नैना की कहानी को ‘ए थर्सडे’ फिल्म में पिरोया गया है। यामी गौतम, करणवीर शर्मा, अतुल कुलकर्णी, डिंपल कपाड़िया और नेहा धूपिया जैसे कलाकारों से सजी ‘ए थर्सडे’ एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है जिसमें महिला हिंसा, रेप घटनाओं और प्रशासन की विफलताओं को दिखाया गया है। बेहजाद खंबाटा के निर्देशन में बनी ‘ए थर्सडे’ में करणवीर शर्मा अहम किरदार में नजर आए हैं जिन्होंने नैना (यामी गौतम) के मंगेतर का किरदार निभाया है। नवभारत टाइम्स के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में करणवीर शर्मा ने अपने किरदार, टीवी, ओटीटी, अपने प्रोजेक्ट्स और स्ट्रगल को लेकर बातचीत की।

बतौर कलाकार ‘ए थर्सडे’ फिल्म की सबसे अच्छी बात आपको क्या लगी?

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मुझे इस फिल्म में दो चीजें सबसे अच्छी लगी। पहला तो इस फिल्म की टीम। दरअसल मेरी पिछली फिल्म ‘ब्लैंक’ थीं और यही कोर टीम उस फिल्म से भी जुड़ी थी। पिछली फिल्म को ‘ए थर्सडे’ के निर्देशक बेहजाद खंबाटा ने डायरेक्ट किया था। दूसरा, मुझे इस फिल्म की कहानी बहुत पसंद आई जिसे सुनते ही मैंने फिल्म के लिए हामी भर दी। मुझे लगा था कि इस तरह की कहानी को दिखाया जाना चाहिए जिसे देख सब गर्व महसूस करें।

असल जिदंगी में क्यों जरूरी है ये किरदार?
मुझे लगता है कि ऐसे किरदार बहुत कम देखने को मिलते हैं जहां आप रियल लाइफ को दिखा पाएं। हम असल जिंदगी में भी ऐसे ही होते हैं। मैं खुद ऐसे ही समाज से आता हूं जहां ऐसे किरदार देखने को मिलते हैं। मैं इस किरदार से कनेक्ट कर पाया क्योंकि मैं ऐसी ही सोसाइटी से आता हूं।

यामी गौतम, अनुज कुलकर्णी और डिंपल कपाड़िया जैसे कलाकारों के साथ करने का कैसा रहा अनुभव?

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इन कलाकारों के साथ काम करने का एक्सपीरियंस बहुत शानदार रहा। ऐसे कलाकारों के साथ काम करना और आसान हो गया। मैं इन सभी ऐक्टर्स की तारीफ करना चाहूंगा जो अपने किरदारों और साथी कलाकारों को उतना महत्व देते हैं। ये एक टीम एफेर्ट्स था। मेरा मानना है कि कोई भी पिक्चर तभी चलती है जब टीम एफेर्ट्स हो। अगर फिल्म नहीं चलती तो यही एक कारण होता है। मैं खुशनसीब हूं कि उन्होंने मुझे इतना सपोर्ट दिया। सभी से इम्प्रवाइज करने का मौका मिला।

आजकल फीमेल कलाकारों को ध्यान में रखकर किरदार गड़े जा रहे हैं, इसे आप कैसे देखते हैं?

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मैं तो इस तरह के लेखन से पूरी तरह सहमत हूं। मैं ऐसे किरदारों का पूरी तरह से समर्थन भी करता हूं और सभी को इसे सपोर्ट करना चाहिए। मेरा तो मानना ही यही है कि महिलाएं इस दुनिया में राज करने के लिए आई हैं।

अगर आपको मौका मिले तो आप लॉक-अप या बिग बॉस किस रियालिटी शो में जाना चाहेंगे?
मैं नैना (यामी गौतम का किरदार) के शो में जाना चाहता हूं। यहां वह बच्चों का ध्यान रखती हैं। मेरी ख्वाहिश थी कि मुझे भी रखा जाता।

इंडस्ट्री में 10 साल का आपका अनुभव कैसा रहा?

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ये आसान नहीं था। मैं यही कहूंगा कि ये सफर काफी कठिन रहा है। जो अभिनेता या अभिनेत्री बनने का सपना देखते हैं, मैं उनसे मैं यही कहना चाहता हूं कि ये आसान नहीं है। अगर आप रिजेक्शन और डिजेक्शन (उदासी) का सामना कर सकते हैं तो कहीं न कहीं और कभी न कभी आपको इसका फल जरूर मिलेगा। मेरा फल जो मुझे मिला है, वो ये है कि मैंने अपनी कला को हर बार अलग-अलग किरदारों के मुताबिक निखारा है। मेरा स्ट्रगल हर बार उतना ही रहता है जितना पहली फिल्म में रहता है। मुझे हर बार खुद को प्रूफ करना होता है। नहीं तो बेहजाद (निर्देशक) को भी इतना कॉन्फिडेंस नहीं होता, हां हम बेशक अच्छे दोस्त हैं लेकिन जैसे मैंने हर बार खुद को निखारा है इसी से सभी को कॉन्फिडेंट हुआ और मुझे ये रोल भी मिला। मेरे हर स्ट्रगल और हर फेलियर के साथ मैंने कोशिश की है कि हर बार मेरी परफॉर्मेंस बेहतर हो।

टीवी, बॉक्स ऑफिस और ओटीटी, इन अलग अलग प्लेटफॉर्म पर काम करने का अनुभव कैसा रहा?

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सभी ऐक्शन और कट बोलते हैं। हम ऐक्टर को हर बार ही ऐक्टिंग करनी पड़ती है। यही चीज है जो कभी बदलती नहीं है। मुझे लगता है कि हर प्रोजेक्ट चुनौती से भरा है। हर बार डेट्स, किरदार, ऐक्शन, रोमांस और शूट्स का चैलेंज बना रहता है। फिर कोरोना के आने से एक नया चैलेंज का आ गया है। मैं खुशनसीब हूं कि मैंने इस महामारी में बेस्ट कलाकारों और प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। मेरा मानना है कि हर कलाकार को टेलीविजन पर एक बार जरूर उतरना चाहिए। ये आपको सब्र देता है। आपको वहां वक्त नहीं मिलता है। हर दिन हर घंटे आपको शॉट देने पड़ते हैं। समय सीमा नहीं होती है। मुझे ये सबसे बड़ा स्ट्रगल लगता है। पिक्चर्स और वेब सीरीज में वेटिंग काफी होते हैं। इसमें हम कुछ दिन काम करते हैं तो कभी कुछ दिन फ्री रहते हैं।

साउथ की फिल्मों के बढ़ते क्रेज को आप किस तरह देखते हैं?
मुझे लगता है कि जब हम अच्छी फिल्म बनाते हैं तो वह जरूर चलती है। पंजाबी हो, मराठी हो या फिर साउथ की कोई फिल्म हो, अच्छी कहानी दर्शकों को जरूर पसंद आती है।

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