सवाँरे भविष्य एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट बनकर 
January 28, 2019 • एडिटर आवाज़े हिन्द टाइम्स

आज के समय में लोग जिस प्रकार का जीवन व्यतीत कर रहे हैं उसके कारण वे बहुत सी बीमारियों का घर बनते जा रहे हैं। अमूमन देखने में आता है कि अपनी बीमारियों का इलाज करने के लिए लोग दवाइयों पर निर्भर रहते हैं और लंबे समय तक दवाइयों का सेवन आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होता है। ऐसे में अगर आप लोगों की बीमारी का इलाज बिना दवाई के ही प्राकृतिक तरीके से करना चाहते हैं तो आप बतौर एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट बनकर ऐसा कर सकते हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें आप पैसे के साथ-साथ लोगों की दुआएं भी कमाते हैं।

क्या है एक्यूप्रेशर थेरेपी -

एक्यूप्रेशर द्वारा शरीर की मांसपेशी तंतुओं में भी लचक पैदा हो जाती है, जिससे खून का संचार आसानी से होता है। और यह अस्थिपंजर तक की बीमारी को दूर करता है। भारत में एक्यूप्रेशर का जन्म 5 हजार साल पहले हुआ था। एक्यूप्रेशर के लगभग 669 बिंदुओं की सूची दी गई है और चार्ट में 1000 प्वॉइन्ट दिए गए हैं लेकिन रोजाना प्रयोग में आने वाले प्वॉइन्ट 100 से 200 ही होते हैं। इसके इलाज में प्रमुख काम उगलियों का ही होता है क्योंकि इसमें रोगी को बिना किसी दवाई और पेनरिलीफ के ठीक करना होता है। इसमें शरीर के कुछ खास प्वॉइंट पर प्रेशर करना होता है। एशियन मेडिकल फिलोसफी के अनुसार शरीर के प्वाइंट को प्रैशर के द्वारा ठीक किया जाता है, ताकि शरीर में चलने वाला खूब का प्रवाह सही गति में धमनियों में चल सके। इससे बॉडी की टेंशन, खास अंगो का दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है। चिकित्सा शास्त्र की इस पद्दति का मानना है कि शरीर में हजारों नसों ,रक्त धमनियों ,मांसपेसियों ,स्नायू और हड्डियों के साथ कई अन्य चीजे मिलकर इस शरीर रूपी मशीन को चलाते हैं।

स्किल्स  -

एक बेहतरीन एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट को सबसे पहले तो सिर से लेकर पैर तक शरीर में मौजूद विभिन्न प्वाइंट्स के बारे में सही तरह से जानकारी होनी चाहिए। उसे यह मालूम होना चाहिए कि शरीर के किस बिन्दु पर दबाव देने से आपके शरीर का कौन सा हिस्सा प्रभावित होता है। आपको बता दें

कि एक्यूप्रेशर में शरीर में लगभग 1000 प्वाइंट्स के बारे में बताया गया है। एक एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट को इन सभी प्वाइंट्स के बारे में पर्याप्त रूप से जानकारी होनी चाहिए। इसके अतिरिक्त आपमें अपने कार्य के प्रति लगन, ईमानदारी, धैर्य व संवेदनशीलता जैसे गुणों का होना भी बेहद आवश्यक है, तभी आप इस क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

कोर्स - 

एक एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट बनने के लिए आप 12वीं के बाद एक्यूप्रेशर प्रोग्राम में पहले ग्रेजुएशन करें। इसके बाद आप पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स भी कर सकते हैं। वैसे आजकल कुछ संस्थान एक्यूप्रेशर में सर्टिफिकेट कोर्स भी चलाते हैं, जिनमें शरीर के इन प्वाइंट्स के बारे में जानकारी दी जाती है।

संभावनाएं -

एक एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट विभिन्न स्पा, क्लीनिक्स, वेलनेस सेंटर, हॉस्पिटल आदि में जॉब की तलाश कर सकता है। इसके अतिरिक्त कुछ अनुभव के बाद आप खुद का क्लीनिक खोलकर भी लोगों की सेवा कर सकते हैं।

आमदनी -

जो छात्र इस क्षेत्र में कदम रखने का मन बना रहे हैं, वे शुरूआती दौर में आसानी से 25 से 30 हजार रूपए प्रतिमाह कमा सकते हैं। समय के साथ अनुभव बढ़ने पर आपकी आमदनी भी बढ़ती है। इसके अतिरिक्त अगर आपका खुद का क्लीनिक है, तो आपकी आमदनी आपके क्लाइंट्स की संख्या पर निर्भर करेगी।

प्रमुख संस्थान - 

नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ एक्यूप्रेशर रिसर्च, ट्रेनिंग एंड ट्रीटमेंट,चंडीगढ़, क्यूप्रेशर ट्रेनिंग नादीपैथी एक्यूप्रेशर हेल्थ केयर सेंटर, काकीनाडासुजोक एक्यूपंक्वर और एक्यूप्रेशर, नई दिल्लीएक्यूपंक्कर कैम थेरेपी इंस्टीट्यूट, देहरादून, क्यूप्रेशर रिसर्च, ट्रेनिंग एंड ट्रीटमेंट संस्थान, इलाहाबाद।