भारतीयों को होगा लाभ, ब्रिटेन लागू करेगा नई वीजा नीति
December 26, 2018 • Editor Awazehindtimes

भारतीयों को होगा लाभ,
ब्रिटेन लागू करेगा नई वीजा नीति 

एच1 बी वीजा से श्रेष्ठ प्रतिभाओं का होगा चयन 

आवाज़ ऐ हिन्द टाइम्स संवादाता, दिसम्बर 2018 : यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद प्रतिभाशाली और श्रेष्ठ कर्मचारियों को आकर्षित करने की तैयारी ब्रिटेन ने अभी से शुरू कर दी है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री टेरीजा मे की सरकार ने ब्रेक्जिट के बाद वीजा और आव्रजन की अपनी रणनीति पर एक प्रस्ताव जारी किया है। इसमें उच्च कुशलता वाले विदेशी कर्मचारियों के लिए किसी तरह की शर्त नहीं रखी गई है। माना जा रहा है कि यूके के इस नए प्रस्ताव से भारतीय छात्रों और पेशेवरों को लाभ होगा। कांफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्रीज ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है।

ब्रिटेन के गृह मंत्री साजिद जाविद ने आव्रजन श्वेत पत्र के रूप में तैयार इस रणनीति को हाउस ऑफ कॉमंस में बुधवार को पेश किया। प्रधानमंत्री मे ने कहा कि यूरोपीय यूनियन से अलग होने के बाद बेरोकटोक आवाजाही खत्म हो जाएगी। यह एक ऐसी व्यवस्था होगी, जिसमें देश नहीं, बल्कि कर्मचारियों की उच्च कुशलता मायने रखेगी। यह प्रस्ताव दिसंबर, 2021 से लागू होगा। सीआइआइ के यूके इंडिया बिजनेस फोरम के अध्यक्ष और टीसीएस अधिकारी जिम ब्लिग ने कहा कि भारतीय उद्योग लंबे समय से कौशल आधारित आव्रजन नियमों की मांग कर रहा था, प्रस्ताव से कुछ हद तक उसकी मांग पूरी होगी।

अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने सांसद की एक शक्तिशाली कमेटी के सामने कहा कि एच1बी वीजा के जरिये श्रेष्ठ प्रतिभाओं का चयन किया जाना चाहिए। ट्रंप प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि अमेरिका में काम करने की अस्थायी अनुमति देने वाले इस वीजा के चलते स्थानीय लोगों को नुकसान नहीं होना चाहिए। भारतीय आइटी कंपनियां सबसे ज्यादा इस वीजा का इस्तेमाल करती हैं।

होमलैंड सिक्योरिटी सचिव केर्टजेन नीलसन ने सीनेट की न्यायिक कमेटी को बताया कि हर साल एच1बी वीजा के लिए निर्धारित संख्या से ज्यादा आवेदन आते हैं। इसलिए हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम इन आवेदनों में से अपने यहां काम करने के लिए श्रेष्ठ कर्मचारियों का चयन करें। उन्होंने कहा कि होमलैंड सिक्योरिटी विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि विदेश से सस्ते कर्मचारियों के चलते अमेरिकी लोगों की अनदेखी नहीं हो।

एच1बी वीजा एक गैर प्रवासी वीजा है, जो किसी कर्मचारी को अमेरिका में छह साल तक काम करने के लिए जारी किया जाता है। इसके जरिये अमेरिकी कंपनियों को ऐसे विदेशी कुशल कर्मचारियों को रखने की अनुमति दी जाती है जिनकी देश में कमी हो। लेकिन, आरोप लगता है कि अमेरिकी कंपनियां भारत और चीन से सस्ते में किसी भी तरह के कर्मचारियों को इस वीजा पर रख लेती हैं।

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