मेट्रो कोच का उत्पादन करेगा रेलवे बड़े पैमाने पर
March 29, 2019 • एडिटर आवाज ए हिन्द टाइम्स

तकनीक हस्तांतरण प्रक्रिया जारी रेल मंत्रालय में 

चीन में निर्मित मेट्रो कोच से 40 फीसदी सस्ते होंगे भारतीय कोच

नई दिल्ली, मार्च। देश भर में बढ़ रहे मेट्रो नेटवर्क के लिए कोच आपूर्ति करने के लिए जहां भारतीय रेल एक ओर तैयारी कर रही है वहीं दूसरी ओर विदेशी बाजार की ओर भी उसकी निगाहें हैं। रेल मंत्रालय ने इस दिशा में आगे कदम बढ़ाते हुए विश्व स्तरीय मेट्रो तकनीक के हस्तांतरण के बाद मेट्रो कोच उत्पादन को तेजी से शुरू करने की तैयारियां पूरी कर ली हैं।

तकनीक हस्तांतरण अभी अंतिम चरण में है और जैसे ही तकनीक मिल जाएगीरेलवे बड़े पैमाने पर मेट्रो कोच का उत्पादन करेगा। ये भारतीय कोच चीन में निर्मित मेट्रो कोच से 40 फीसदी सस्ते होंगे। रेल मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार विदेश मेट्रो कोच 10 से 12 करोड़ की लागत में बनते हैं जबकि एमसीएफ महज आठ करोड़ में तैयार होंगे। तकनीक के मामले में भारतीय कोच, विदेशी मेट्रो कोच से कहीं अधिक बेहतर होंगे।

अभी मेट्रो में एमेरजेंसी के दौरान निकास की व्यवस्था नहीं है लेकिन नए कोच में ऐसे प्रबंध किए गए हैं कि यात्री आधुनिक कोच इमरजेंसी गेट से निकल इसमें मेट्रो के सबसे आगे व पीछे हवाई जहाज की तर्ज पर स्लाइडिंग स्लोप बनाए जाएंगे।

हालांकि इसका कंट्रोल ड्राइवर व कंट्रोल यूनिट के पास होगा और आपात हालात में इसे खोलकर किसी भी अनहोनी से तुरंत बचाया जा सकेगा। अधिकारियों ने पिछले दिनों बताया कि पहली बार एमसीएफ में निर्यात के लिए एल्युमिनियम कोच भी बनाए जांएगे। वरिष्ठ आधिकारिक सूत्रों के अनुसार मॉर्डन कोच फैक्ट्री, रायबरेली में उत्पाद क्षमता बढ़ाने के लिए विस्तार और आधुनिकीकरण का कार्य 2018 में पूरा कर लिया गया है।

एमसीएफ में रोबोटिक व ऑटोमेशन तकनीक से कोच को उत्पादन किया जा रहा है। एमसीएफ में चालू वित्तीय वर्ष में 1420 कोच बनाए जांएगे जबकि पूर्व में यह आंकड़ा 710 से 711 था। वर्ष 2019-20 में 2000 कोच सालाना और इसके अगले साल यह आंकड़ा चार से पांच हजार कोच बनेंगे।

रेलवे ने सेमी हाई स्पीड वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन-18 के कोच निर्यात करनेकी भी तैयारी की हैं। रेल मंत्रालय पहली बार एल्युमिनियम कोच, मेट्रो कोच व ट्रेन-18 कोच विश्व के अन्य देशों में निर्यात करना शुरू देगा। रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अब वंदे भारत के कोच विश्व के दूसरे देशों में निर्यात किए जाएंगे।

सेमी हाई स्पीड ट्रेन-18 का एक कोच 6.25 करोड़ में बनकर तैयार हुआ है। एक ट्रेन महज 100 करोड़ में तैयार हुई है।