राम रहीम सहित 4 को आजीवन कारावास छत्रपति हत्याकांड में 
January 19, 2019 • एडिटर आवाज़े हिन्द टाइम्स

कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से सुनाई सजा,
सभी पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी

पंचकूला। पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में 16 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने बृहस्पतिवार को डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम समेत चारों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई के दौरान चारों पर 50-50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया। जुर्माना नहीं देने पर दो-दो साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। दोषी निर्मल सिंह व कृष्ण लाल को आर्स एक्ट की धाराओं में भी 3-3 साल कैद व 5-5 हजार रुपये जुर्माना लगाया है। उनकी उम्रकैद और तीन साल की कैद साथ-साथ चलेगी। राम रहीम साध्वी दुष्कर्म में रोहतक की सुनारिया जेल में 20 साल की सजा काट रहा है। वह सजा पूरी होने के बाद यह उम्रकैद की सजा शुरू होगी। निर्मल सिंह, कृष्ण लाल व कुलदीप अंबाला जेल में बंद हैं। सीबीआई के वकील एचपीएस वर्मा ने बताया कि कोर्ट ने आदेश में दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाते समय किसी टर्म का इस्तेमाल नहीं किया है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के मुताबिक राम रहीम की ताउम्र कैद का मतलब पूरी उम्र सलाखों के पीछे रहना है।

छत्रपति हत्याकांड में पंचकूला की विशेष सीबीआई अदालत ने चारों को आईपीसी की धारा-302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) का दोषी ठहराया। निर्मल सिंह को आम्र्स एक्ट, 1959 की धारा-25 और कृष्ण लाल को धारा-29 के तहत भी दोषी करार दिया गया। आगे क्या : राम रहीम समेत चारों दोषी सीबीआई कोर्ट की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

दोषियों ने पत्रकार की हत्या कर जघन्य व घृणित अपराध किया

आधुनिक देश में मीडिया लोकतंत्र की निगरानी करता है। मीडिया बड़े पैमाने पर आम राय को प्रभावित करने की क्षमता के कारण किसी व्यक्ति, संगठन या संस्था को बनाया मिटा भी सकता है। पत्रकारिता बहुत ही गंभीर कारोबार है। इससे जुड़े लोग समाज, देश और दुनिया की बेहतरी के लिए सच को खंगाल कर रिपोर्ट पेश करते हैं। इस पेशे में मामूली ग्लैमर है। इसके एवज में पत्रकारों को कुछ खास हासिल नहीं होता। यह गंभीर संवेदना के साथ जनसेवा का काम है। दोषियों ने पत्रकार की हत्या कर एक जघन्य व घृणित अपराध किया है। - जस्टिस जगदीप सिंह

जज ने पूछा-क्या कुछ कहना चाहते हो । फैसला सुनाते समय जज जगदीप सिंह ने दोषी राम रहीम से पूछा कि तुम्हारे कितने बच्चे हैं। क्या तुम कुछ कहना चाहते हो। लेकिन राम रहीम ने कुछ भी नहीं कहा और जवाब दिया कि मेरे वकील ही मेरा पक्ष रखेंगे।

16 साल बाद मिला इंसाफ : अंशुल

16 साल बाद आए फैसले पर रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने कहा, हम चाहते थे कि राम रहीम को मौत की सजा हो। फिर भी कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। आज आए फैसले ने 16 साल के इंतजार की भरपाई कर दी। आज हमारी जीत हुई।

सजा सुन घुटनों के बल बैठ गया राम रहीम - रोहतक, उम्रकैद की सजा सुनने के बाद राम रहीम कॉन्फ्रेंसिंग रूम में ही घुटनों के बल बैठ गया। इसके बाद उसे बैरक ले जाया गया। सूत्रों की मानें तो वहां कुछ देर घूमने के बाद वह इस दौरान उसने किसी से बात नहीं की।