बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए एनडीएमसी ने कसी कमर
December 20, 2018 • Shiv Mohan

बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए एनडीएमसी ने कसी कमर

- स्मार्ट साइकिल के साथ स्मार्ट ई-स्कूटर भी चलेगा -

आवाज़ ऐ हिन्द टाइम्स संवादाता, नई दिल्ली, दिसम्बर 2018, बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए लुटियन दिल्ली में अब स्मार्ट साइकिल ही नहीं, स्मार्ट ई-स्कूटर भी चलेगा। एप आधारित इस स्कूटर से आप पूरी लुटियन की दिल्ली में घूम सकेंगे। एनडीएमसी ने इसका खाका तैयार कर लिया है। अगले साल मार्च-अप्रैल तक इस सुविधा की शुरुआत कर दी जाएगी। एनडीएमसी ने शनिवार को स्मार्ट साइकिल सेवा शुरू करने के दौरान स्मार्ट ई-स्कूटर चलाने की घोषणा की। एनडीएमसी की इस पहल से न केवल शहर का प्रदूषण कम होगा, बल्कि आम लोगों की सेहत में भी सुधार होगा।

सार्वजनिक वाहन के लिए घंटों इंतजार भी नहीं करना होगा। एनडीएमसी अध्यक्ष नरेश कुमार बताया कि ई-स्कूटर चलाने के लिए टेंडर का खाका तैयार कर लिया गया है। जल्द ही टेंडर जारी किया जाएगा और अगले साल मार्च-अप्रैल तक इस सुविधा को शुरू कर दिया जाएगा। एनडीएमसी की इलाके में विश्व स्तरीय बाइक सुविधा मुहैया कराने की योजना है। स्मार्ट साइकिल बेहतर तरीके से इस्तेमाल हो सके, इसके लिए एनडीएमसी फुटपाथ को बेहतर करेगा। एनडीएमसी इलाके में जितने भी रैंप हैं।

उन्हें और बेहतर किया जाएगा ताकि साइकिल सवार को परेशान न होना पड़े। लुटियन की दिल्ली में जितने भी गोलंबर (राउंड एबाउट) है, वहां भी स्मार्ट साइकिल सवारों के लिए बेहतर इंतजाम किया जाएगा। कनॉट प्लेस से मंडी हाउस तक बेहतर फुटपाथ व्यवस्था का खाका तैयार कर लिया गया है। स्मार्ट साइकिल स्टैंड पर प्लाजा भी बनेगा। विश्व में पहली तरह के इस प्लाजा में चाय-कॉफी और स्नैक्स की व्यवस्था होगी। अगर साइकिल की मांग ज्यादा होगी तो इस स्मार्ट साइकिल प्लाजा में लोग थोड़ी देर बैठकर इंतजार कर सकेंगे।

दिल्ली की हवा में पिछले कुछ साल के मुकाबले 10 से 15 प्रतिशत तक का सुधार देखा जा रहा है। सीपीसीबी के सदस्य सचिव प्रशांत गर्गव ने शनिवार को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में वायु प्रदूषण पर आयोजित सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और अन्य एजेंसियों द्वारा प्रदूषण को कम करने के दिशा में काम करने से वायु की गुणवत्ता सुधर रही है। गर्गवा ने कहा कि सीपीसीबी प्रदूषण को फैलाने वाले तीन प्रमुख कारकों पर ध्यान दे रही है। जिसमें पराली को जलाना और खाड़ी देशों से आने वाली धूल भरी हवा जैसे बाहरी कारक भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रदूषण के तीन प्रमुख कारकों में खाड़ी देशों से आने वाली धूल भरी हवा है जिससे दिल्ली की हवा में पीएम 10 की मात्रा खतरनाक स्तर तक बढ़ जाती हैं।

इसके अलावा उत्तर भारत में पराली को जलाए जाना और दिल्ली का स्थानीय कार्बन उत्सर्जन भी शामिल हैं। गर्गवा के अनुसार, बोर्ड इन तीन प्रमुख कारकों पर ध्यान दे रहा है। जिससे हवा की गुणवत्ता में अगले कुछ सालों में सुधार हो। वायु प्रदूषण पर आयोजित इस दो दिवसीय कार्यक्रम में कई अन्य एक्सपर्ट्स ने भी अपने विचार रखे। दिल्ली-एनसीआर की हवा में इस हफ्ते प्रदूषण में उतार-चढ़ाव जारी रहा। हफ्ते के शुरुआती दिन गंभीर प्रदूषण वाले रहे तो बूंदाबांदी के बाद वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ।

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