सूखे की मार किसान पर पड़ने की सम्भावना 
April 4, 2019 • awazehindtimes@gmail.com

ये है अनुमान - 30 फीसदी संभावना सामान्य बारिश, 55 फीसदी सामान्य से कम बारिश की, 15 फीसदी संभावना देशभर सूखे की, 0 फीसदी संभावना अधिक बारिश की, 0 फीसदी संभावना अत्यधिक वर्षा की

नई दिल्ली, अप्रैल। मौसम पूर्वानुमान जारी करने वाली निजी कंपनी स्काईमेट ने अलनीनो प्रभाव के कारण इस साल मानसून के कमजोर रहने और इस दौरान औसत से सात प्रतिशत कम बारिश का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। स्काईमेट की बुधवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रहेगा और मानसून के चार महीने में जून से सितम्बर के बीच औसत का 93 प्रतिशत बारिश होगी।

इस प्रकार इस साल औसत से सात प्रतिशत कम बारिश का अनुमान है। पिछले साल मानसून के दौरान औसत से नौ प्रतिशत कम बारिश हुई थी।

प्रशांत महासागर औसत से काफी ज्यादा गर्म - स्काईमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह ने कहा कि प्रशांत महसागर औसत से काफी ज्यादा गर्म हो गया है। मार्च से मई के दौरान अलनीनो की संभावना 80 प्रतिशत है।

जून से अगस्त के दौरान इसकी संभावना 60 प्रतिशत रह जाती है। इस प्रकार इस साल धीरे-धीरे अलनीनो का प्रभाव कम होता जाएगा, हालांकि यह पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। इसलिए, इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रहने की आशंका है।

स्काईमेट को अपना पहला पूर्वानुमान बदलना पड़ा- रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में दीर्घावधि औसत का 77 प्रतिशत, जुलाई में औसत का 91 प्रतिशत, अगस्त में औसत का 102 प्रतिशत और सितम्बर में औसत का 99 प्रतिशत बारिश होने की संभावना है।

कंपनी ने फरवरी में जारी अपनी रिपोर्ट में इस साल मानसून सामान्य रहने की बात कही थी, लेकिन अब इसका कहना है कि इस दौरान काफी बदलाव आया है जिसके कारण उसे अपना पूर्वानुमान बदलना पड़ा है।

विकास की रफ्तार पर पड़ेगा असर, बाजार लुढका - इससे देश के भीतर अच्छी कृषि और 2.6 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी वाले देश में विकास के अनुमानों को झटका लग सकता है।

इस खबर के बाद शेयर बाजार लाल निशान में आ गया, जो इससे पहले मजबूती के साथ कारोबार कर रहा था। भारत में साल भर होने वाली बारिश में मानसून सीजन का योगदान लगभग 70 प्रतिशत रहता है और एशिया की तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी में कृषि क्षेत्र की सफलता के लिहाज से यह खासा अहम है।

भारतीय की अर्थव्यवस्था कृषि पर केंद्रित -

करीब दो लाख करोड़ डॉलर से अधिक की भारतीय अर्थव्यवस्था कृषि केंद्रित है, जो पूरी तरह से मानसून पर निर्भर है। भारत में सालाना होने वाली बारिश में मानसून की हिस्सेदारी 70 फीसद से अधिक होती है।

जून से शुरुआत होने वाले मानसून सीजन के दौरान 50 सालों के औसत 89 सेंटीमीटर से अधिक बारिश होने को सामान्य कहा जाता है, जो 96 फीसद से 104 फीसद के बीच होता है।