5 साल में निमोनिया फिर धीरे-धीरे खराब हो गए फेफड़े, एम्स में पहली बार हुए लंग्स ट्रांसप्लांट के बाद सपना को मिली नई जिंदगी – world organ donation day 2022 aiims first lung transplant 36 year old sapna live successful life after surgery


नई जिंदगी मिलने की यह कहानी सपना की है। जब वह 5 साल की थीं, तभी उन्हें पहली बार निमोनिया हुआ और यह बीमारी इस कदर बढ़ती चली गई कि उनके फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया। 2 साल का लंबा इंतजार और कोविड को भी मात देकर वह अपनी बीमारी से लड़ते हुए आगे बढ़ रही थीं। तभी किस्मत का फिर चमत्कार हुआ और एक अनजान परिवार ने अपने बच्चे की मौत को भूल कर अंगदान करने का फैसला किया और उनके फैसले से एम्स के इतिहास में पहली बार लंग्स ट्रांसप्लांट हुआ और सपना की सर्जरी की गई। ट्रांसप्लांट पूरी तरह से सफल रहा और अब सपना अपनी जिंदगी आराम से जी रही हैं।

पहले निमोनिया फिर टीबी और अस्थमा
एनबीटी से खास बातचीत में सपना ने नई जिंदगी मिलने की बातें साझा की। उन्होंने बताया कि पहले निमोनिया हुआ और बाद में टीबी भी हो गया। 12 से 25 साल की उम्र तक एलर्जी की शिकार रही। अपने जीवन के 17 साल चेन्नै में रहने के बावजूद भी उन्हें बार बार एलर्जी होती रही है। टीबी का इलाज कराया, पूरा कोर्स किया लेकिन इसके बाद उन्हें अस्थमा की बीमारी हो गई और यहां से उन्हें सांस की तकलीफ शुरू हुई और फिर एक फेफड़े ने काम करना बंद कर दिया।

organ transplant

परिवार और रिश्तेदारों ने दिया हौंसला
सपना ने बताया कि 2017 के बाद वो शादी करके गुरुग्राम में रहने लगी। 2017 और 2018 अच्छा बीता। फरवरी 2019 में फिर निमोनिया हुआ। लुधियाना में दिखाया तो पता चला कि फंगस हो गया है। जुलाई 2018 में फिर से अटैक आया है, 15 दिन ऑक्सीजन पर रही, फिर ठीक हुई। नवंबर 2019 से एम्स में इलाज कराना शुरू किया। 28 जुलाई 2020 को एम्स में एक महीने भर्ती रही। फंगस की बीमारी गंभीर हो गई। सपना ने कहा कि परिवार और सभी ने हौसला दिया और एम्स की टीम ने काउंसलिंग शुरू की। मुझे लंग्स ट्रांसप्लांट के लिए तैयार किया जा रहा था। एम्स के डॉक्टर, नर्स और बाकी स्टाफ ने काफी हिम्मत दी।

navbharat timesसेना के जवान में धड़कने लगा अमरेश का दिल, जाते-जाते 5 लोगों को दे गए नई जिंदगी
कोरोना हुआ तो डॉक्टर भी डर गए
18 मई 2021 को मुझे कोरोना हुआ तो हमारे डॉक्टर भी डर गए, लेकिन मैं नहीं डरी, जब मुझे ज्यादा असर नहीं हुआ। आखिरकार एक परिवार ने अंग दान करने का फैसला किया और मेरा लंग ट्रांसप्लांट 6 मई,2022 को हुआ। तीन दिन बाद मुझे होश आया और 20 जुलाई को मेरी छुट्टी हुई। सपना ने कहा कि अगर अंगदान नहीं होता तो मेरा बचना मुश्किल था। इसलिए अंगदान को बढ़ावा मिलना चाहिए और इसके प्रति लोगों को और जागरूक करने की जरूरत है।

navbharat timesOrgan Donation: संदीप के अंगदान से 4 लोगों को मिली नई जिंदगी, एम्स में हुआ हार्ट, लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट
आसानी से जी पा रही हूं जिंदगी
सपना ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद मैं अपनी जिंदगी आसानी से जी पा रही हूं। अपना रोज का काम मैं खुद करती हूं। बीपी की जांच करती हूं और अपनी रिपोर्ट रोज अपने डॉक्टर को भेजती हूं। इसके बाद डॉक्टर के बताए कुछ एक्सरसाइज करती हूं। बीमारी के दौरान मेरा वजन कम हुआ है तो हेल्दी डाइट पर ध्यान देती हूं।

navbharat times7 साल की बच्ची के अंगदान से 6 लोगों को मिल गई नई जिंदगी, ब्रेन में गोली लगने से हुई थी बच्ची की मौत
एम्स में बढ़े अंगदान और ट्रांसप्लांट
एम्स ट्रॉमा सेंटर के अंगदान प्रोग्राम की अगुवाई करने वाले न्यूरोसर्जन डॉक्टर दीपक गुप्ता ने बताया कि पिछले तीन-चार महीनों में इसमें इजाफा हुआ है। अप्रैल से लेकर अब तक 9 डोनेशन हो चुके हैं। इससे 25 से 30 लोगों को नई जिंदगी मिली है। एम्स में हार्ट ट्रांसप्लांट के बाद अब लंग्स ट्रांसप्लांट भी होने लगा है। पहली बार एम्स में डोनेशन में फेफड़ा निकाला गया और एम्स में ही ट्रांसप्लांट हुआ। उन्होंने कहा कि देश में हर तीन मिनट पर सड़क हादसे में एक की मौत होती है। इसका एक चौथाई भी लोग अगर अंगदान कर दे तो जो जरूरत है वह पूरी हो सकती है।



Source link

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this: