नियंत्रण हो वायु प्रदूषण के स्रोत पर 
January 31, 2019 • Editor Awazehindtimes

निजी भूमि पर हो अधिक से अधिक हरियाली,
टीटीजैड क्षेत्र में वायु प्रदूषण के स्रोतों की हो पहचान

आगरा। ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) यान आगरा, मथुरा, हाथरस, भरतपुर (राजस्थान) में वायु प्रदूषण के क्या स्त्रोत हैं, इसकी स्पष्ट पहचान किया जाना सबसे अहम मुद्दा है। इन स्त्रोतों से होने वाले प्रदूषण को रोकना होगा। यह कहना हैम्यामी (अमेरिका) से आई पर्यावरण अभियन्ता कोकिल बंसल का। वे आगरा डवलपमेन्ट फाउण्डेशन की बैठक को संबोधित कर रही थीं। इंजीनियर बंसल ने बताया कि जब तक हमें यह नहीं मालूम होगा कि कौन-कौन से वायु प्रदूषण के कारण हैं और उनका क्या योगदान है, हम वायु प्रदूषण से लड़ने की प्रभावी रणनीति नहीं बना सकते हैं। आईआईटी कानपुर द्वारा जो आगरा के वायु प्रदूषण को लेकर अध्ययन किया जा रहा है, उसकी रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

वायु प्रदूषण के जो स्त्रोत अध्ययन से निकल कर आयें, उन पर रोक लगानी होगी। स्त्रोतों पर रोक लगने से ही वायु प्रदूषण की विकराल समस्या का हल संभव होगा। ताजमहल को बचाने के लिए बनाया जाने वाला विजन प्लान बिना वायु प्रदूषण के कारणों को जाने नहीं बनाया जा सकता है। बंसल द्वारा यह बात भी रखी गई कि पी0एम0-2.5 व पी0एम0-10 तरह-तरह के होते हैं और उनकी प्रभाव भी अलग-अलग होता है और यह अध्ययन किया जाना आवश्यक है कि ये किस प्रकार के हैं। आगरा की सड़कों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि इन सड़कों की पटरियाँ पक्की होनी चाहिए और सड़कों के दोनों ओर की खाली भूमिय भी हरियाली युक्त होनी चाहिए। सड़कों की पटरियाँ और उनके आसपास की भूमि धूल का कारण बनती हैं, जो वाहनों से निकलने वाली प्रदूषित वायु से मिलकर हानिकारक बन जाती है।

सड़कों की धूल को न्यूयॉर्क व अन्य शहरों में बड़ी बड़ी मशीनों से इकट्ठा किया जाता है और इसी तरह से आगरा की सड़कें भी उसी तर्ज पर साफ होनी चाहिए। वहां सड़क सफाई का निर्धारित समय होता है और उस समय वाहनों का पार्किंग में खड़ा किया जाना भी मना होता है। वायु प्रदूषण से बचने के लिए एक्टिवेटिड कार्बन मास्क के प्रयोग की बात भी बंसल द्वारा रखी गई जो हैवी मैटल को एबजॉर्ब कर लेते हैं। औद्योगिक संस्थानों में बैग हाउस फिल्टर लगाये जाने की बात भी रखी गई। बैठक में एडीएफ सचिव के सी जैन ने बताया कि आगरा के उत्तर व उत्तर-पूरब से आने वाली हवायें ताजमहल को नुकसान पहुंचाती हैं। इसलिए विन्ड-ब्लॉकर के रूप में इस दिशा में बड़े-बड़े पेड़ों की ग्रीन बेल्ट बननी चाहिए।

आगरा में वन क्षेत्र 6-7 प्रतिशत ही हैंऔर जब तक निजी भूमि पर सघन वृक्षारोपण नहीं होगा, वायु प्रदूषण को नहीं रोका जा सकता है, जिसके लिए निजी भूमि पर वृक्षों के काटने की स्पष्ट अनुमति हो। इस सम्बन्ध में राजकुमार चाहर द्वारा बताया गया कि गांवों में खेतों की मेड़ों पर अब किसानों ने वृक्ष लगाना बंद कर दिया है, क्योंकि पार्टीबन्दी के चलते वे पेड़ों को काट नहीं पाते हैं। बैठक में हेमन्त जैन द्वारा यह कहा गया कि टी0टी0जेड0 क्षेत्र में वाहनों का प्रवेश न हो, इसके लिए टी0टी0जेड0 क्षेत्र के बाहर पैरोफैरल बाईपास का निर्माण होना चाहिए, जैसा कि दिल्ली में है और जो वाहन टी0टी0जेड0 क्षेत्र से निकलें उनसे बड़ा शुल्क लिया जाना चाहिए ताकि वे इस क्षेत्र में प्रवेश ही न करें।

इंजीनियर ऋषि जैन द्वारा कूड़ा व अलाव जलाये जाने को रोकने की बात रखी गई ताकि उससे निकलने वाला धुंआ वायु को प्रदूषित न करे । किशोर खन्ना द्वारा वायु प्रदूषण को लेकर घटती हुई आयु और बढ़ती हुई बीमारियों के प्रति चिंता व्यक्त की। वायु प्रदूषण के विरुद्ध बड़े स्तर पर जागरुकता उत्पन्न करने और व्यापक अभियान छेड़ने की बात रखी गई। बैठक में हिमांशु अग्रवाल, अनिल अग्रवाल आदि भी उपस्थित थे।