मानहानि के मामले में सुलह की संभावना तलाशें: अदालत ने कैलाश गहलोत, विजेंद्र गुप्ता से कहा – explore the possibility of reconciliation in the defamation case, the court told kailash gehlot to vijender gupta

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक विजेंद्र गुप्ता के वकीलों से बुधवार को कहा कि वे डीटीसी की ‘लो-फ्लोर’ बसों की खरीद में अनियमितता के आरोपों को लेकर दायर मानहानि के मामले में सुलह की संभावना तलाशें।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर और न्यायमूर्ति तारा वी. गंजू की पीठ ने कहा कि नेताओं से जुड़े मानहानि के मामले ‘‘केवल दिखावा’’ होते हैं। पीठ ने कहा, ‘‘पक्षकारों के वकील सुलह की संभावना तलाशें।’’

पीठ एक एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ आम आदमी पार्टी(आप) के नेता गहलोत द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी। एकल न्यायाधीश ने आप नेता को गुप्ता के खिलाफ उनके मानहानि मुकदमे पर अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था।

गहलोत ने पिछले साल गुप्ता के खिलाफ अपने दीवानी मानहानि के मुकदमे के साथ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) द्वारा 1,000 ‘लो-फ्लोर’ बसों की खरीद को लेकर अपमानजनक बयान देने का आरोप लगाते हुए भाजपा नेता गुप्ता से हर्जाने में पांच करोड़ रुपये की मांग की थी।

मंत्री ने पहले दलील दी थी कि गुप्ता ने एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा उन्हें क्लीन-चिट दिए जाने के बावजूद बसों की खरीद के संबंध में उनकी ईमानदारी पर संदेह करते हुए ट्वीट किए।

अदालत ने बुधवार को मामले की आगे की सुनवाई 20 दिसंबर के लिए सूचीबद्ध कर दी और पक्षकारों से चार सप्ताह में अपनी लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा।



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