Thursday, August 11, 2022
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बैन के बाद चाइनीज मांझे ने ली 6 की जान, नॉर्थ वेस्ट जिले में सबसे अधिक प्रतिबंधित मांझा बरामद – chinese manjha took 6 lives after ban, most banned manjha recovered in north west district


नई दिल्लीः जानलेवा होने की वजह से चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर 2017 में नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बावजूद ये मांझा धड़ल्ले से बिक रहा है और पतंगबाज खुलेआम पेंच लड़ा रहे हैं। लगातार पब्लिक और पक्षी जख्मी हो रहे हैं। दिल्ली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि 2017 में बैन लगने के बाद से जुलाई 2022 तक 6 लोगों की जान मांझा के गला रेतने से गई है। पुलिस की तरफ से गुरुवार को हाई कोर्ट में दाखिल किए जवाब में बताया गया कि 2017 के बाद से सरकारी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के 256 केस और 6 मामले एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एक्ट के तहत दर्ज किए हैं।

दिल्ली में 15 अगस्त तक पतंग उड़ाने का प्रचलन
दिल्ली में 15 अगस्त तक पतंग उड़ाने का प्रचलन है। पतंगबाज मजबूत मांझे की डिमांड करते हैं तो दुकानदार चाइनीज मांझा चोरी-छिपे बेचने का काम करते हैं। यही वजह है कि बैन के बावजूद इस जानलेवा मांझे का इस्तेमाल होता है। पुलिस अफसर बताते हैं कि पुलिस रिकॉर्ड में जख्मी लोगों की तादाद कम है, क्योंकि लोग मांझे से घायल होने के बाद भी कॉल नहीं करते हैं। चुपचाप प्राइवेट अस्पताल में इलाज करा लेते हैं। सरकारी अस्पताल में आने वाले भी रिपोर्ट नहीं लिखवाते हैं।

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नॉर्थ वेस्ट जिले से सबसे ज्यादा मांझे की बरामदगी
इसी साल 25 जुलाई को मौर्या एनक्लेव थाना इलाके में रोहिणी निवासी सुमित रंगा (32) की चाइनीज मांझे से गला कटने से मौत हो गई थी। इसके बाद से दिल्ली पुलिस ने ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। इससे पहले भी कई लोग जख्मी हो चुके थे। इस साल सबसे ज्यादा मांझे की बरामदगी नॉर्थ वेस्ट जिले ने की है, जिसने 7 केस में 11,923 चरखियां पकड़ीं। इसके बाद सेंट्रल दिल्ली ने सिर्फ दो मामलों में 1,325 चरखियां पकड़ी हैं। नई दिल्ली जिला इलाके में कोई मामला दर्ज नहीं हुआ है।

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बैन के बाद से अब तक का डेटा
जानलेवा मांझे पर एनजीटी ने 2017 में प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद से आईपीसी और एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन (ईपी) एक्ट के तहत मुकदमे दर्ज किए जाने लगे। 1 जनवरी 2017 से 31 जुलाई 2022 तक का रिकॉर्ड कुछ यूं हैः



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