दुनिया हमें कब तक प्रमाणपत्र बांटती रहेगी: मोदी – how long will the world continue to distribute certificates to us?


नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व भर में दूसरों की तुलना में अपने को महान बताने की प्रवृत्ति पर सोमवार को निशाना साधा और कहा कि वह भारत ही है जिसने दुनिया को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का मंत्र दिया।

मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार नौवीं बार संबोधन देते हुए यह भी सवाल किया कि ‘‘कब तक दुनिया हमें सर्टिफिकेट (प्रमाणपत्र) बांटती रहेगी? कब तक दुनिया के सर्टिफिकेट पर हम गुजारा करेंगे? क् या हम अपने मानक नहीं बनाएंगे? क् या 130 करोड़ का देश अपने मानकों को पार करने के लिए पुरुषार्थ नहीं कर सकता है। हमें किसी भी हालत में औरों के जैसा दिखने की कोशिश करने की जरूरत नहीं है।’’

मोदी ने कहा कि आजादी के इतने दशकों के बाद दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल गया है। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया भारत को गर्व से देख रही है, उम्मीद से देख रही है। दुनिया ने भारत की धरती पर समाधान तलाशना शुरू कर दिया है। दुनिया की सोच में यह बदलाव हमारे 75 साल के सफर का नतीजा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से हम संकल्प के साथ आगे बढ़े हैं, दुनिया देख रही है और दुनिया भी उम्मीद में जी रही है। दुनिया ने देखना शुरू कर दिया है कि उम्मीदों को पूरा करने की क्षमता कहां है।’’

मोदी ने आकांक्षा, पुन: जागृति और दुनिया की उन आशाओं की “त्रि-शक्ति” के बारे में भी बात की, जिन्हें पूरा करने में देश के लोगों की बड़ी भूमिका है।

उन्होंने कहा कि देश के 130 करोड़ लोगों ने कई दशकों के अनुभव के बाद एक स्थिर सरकार, राजनीतिक स्थिरता के महत्व के साथ ही यह भी देखा है कि इससे दुनिया में किस तरह की ताकत उत्पन्न हो सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘भारत ने नीतियों की ताकत दिखाई है, कैसे उन नीतियों के लिए दुनिया में विश्वास बनाया जाता है और दुनिया भी इसे समझ रही है। और जब राजनीतिक स्थिरता होती है, नीतियों में गतिशीलता होती है, निर्णयों में गति होती है … तब सभी विकास में भागीदार बनते हैं।’’

मोदी ने कहा कि देश ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ा, लेकिन लोगों ने ‘सबका विश्वास, सबका प्रयास’ से इसमें और रंग जोड़ दिये हैं।

मोदी ने कहा कि यह भारत है जिसने दुनिया को ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का मंत्र दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया में ‘तुझसे बड़ा मैं हूं’, की समस्या तनाव का कारण बन गई है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम वो लोग हैं जो दुनिया को कहते हैं ‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति।’’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हम वो लोग हैं जिसने दुनिया का कल्याण देखा है, हम जग कल्याण से जन कल्याण के राही रहे हैं। जन कल्याण से जग कल्याण की राह पर चलने वाले हम लोग जब दुनिया की कामना करते हैं, तब कहते हैं- सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः।’’



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