दिल्ली में आबकारी नीति पर घमासान, बीजेपी का अरविंद केजरीवाल पर हल्लाबोल, कांग्रेस को होगा फायदा?

नई दिल्ली: दिल्ली की नई आबकारी नीति पर (Delhi Excise Policy)पर सीबीआई एक्शन में है। आम आदमी पार्टी (AAP) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में जोरदार तकरार चल रही है। सिसोदिया के खिलाफ कार्रवाई के बीच सभी राजनीतिक दल अपना नफा-नुकसान आंकने में जुटे हैं। दिल्ली की नई शराब नीति का बीजेपी शुरू से विरोध करती रही है। इधर, AAP का कहना है कि उसने इस नीति में कुछ भी गलत नहीं क्या। इन सबके बीच कभी दिल्ली में लगातार 15 साल तक सरकार चला चुकी कांग्रेस पार्टी की ‘चुप्पी’ भी चौंका रही है। कांग्रेस AAP का विरोध तो कर रही है लेकिन उसके कार्यकर्ता सड़कों पर नहीं है जबकि बीजेपी के वर्कर्स सड़क पर अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के खिलाफ मोर्चा खोल रखे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या 2025 में राज्य विधानसभा के होने वाले चुनाव में बीजेपी आप सरकार को हिला देगी? आइए समझते हैं सारे समीकरण।

आप को हिला देगी बीजेपी?
नई आबकारी नीति को लेकर बीजेपी आप पर लगातार हमलावार है। पार्टी इस मुद्दे पर केजरीवाल को घेर रही है। तो क्या पिछली तीन बार से आप के हाथों पराजित हो रही बीजेपी 2025 में राज्य में कोई करिश्मा कर पाएगी? फिलहाल अभी इसपर कोई टिप्पणी करनी जल्दबाजी होगी। लेकिन एक हकीकत ये भी है इस साल हुए राजेंद्रनगर उपचुनाव में आप को बीजेपी के खिलाफ बड़ी जीत मिली थी। पर क्या जब राज्य के चुनावों में बीजेपी पूरी तरह उतरेगी तो नतीजे बदलेंगे? विश्लेषक इसपर बंटे हुए हैं। लेकिन बीजेपी राज्य में आप को हिलाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाह रही है।

विवाद के बाद और मजबूत हुई AAP

पंजाब विधानसभा चुनाव के दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर पार्टी के संस्थापक सदस्य रहे कुमार विश्वास ने खालिस्तान समर्थकों का साथ देने के आरोप लगाए थे। हालांकि, केजरीवाल ने विश्वास के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि ये सारे भ्रष्टाचारी मुझे आतंकवादी बोल रहे हैं। मैं दुनिया का पहला आतंकवादी हूं जो लोगों के लिए स्कूल बनवाता है। अस्पताल बनवाता है और बिजली ठीक करता है। उन्होंने कहा कि मैं दुनिया का पहला ‘स्वीट आतंकवादी’ हूं। इसके बाद पंजाब विधानसभा चुनाव के जो नतीजे आए उसमें विपक्षी दल साफ हो गए और आप की आंधी आई थी। आप ने 117 में से 92 सीटों पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी 2, बीएसपी 1, कांग्रेस 18, SAD-3 और निर्दलीय 1 सीट ही मिली थी। यानी केजरीवाल पर हुए विवाद का पंजाब चुनाव में कोई असर नहीं पड़ा।

गोवा में भी आप को मिली थी सफलता
गोवा में भी आप को बीजेपी और कांग्रेस भाव नहीं दे रही थी। लेकिन AAP ने अपनी रणनीति से दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस जीत के बाद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा था कि ‘गोवा में ईमानदार राजनीति की शुरुआत’। यानी आप को विवादों से चुनाव परिणामों के लिहाज से नुकसान होता नहीं दिखा है।

2020 में बीजेपी ने लगाई थी ताकत पर मिली थी हार
2020 के दिल्ली चुनाव में भी आप के खिलाफ बीजेपी ने मोर्चा खोल दिया था। शाहीन बाग के मुद्दे को उठाते हुए बीजेपी आप पर हमले बोले थे। भगवा दल ने पूरी दिल्ली में जोरदार प्रचार अभियान चलाया था। लेकिन चुनाव नतीजे बीजेपी के लिए अच्छे नहीं रहे। 70 विधानसभा सीटों में आप को 62 सीटों पर जीत मिली थी जबकि बीजेपी महज 8 सीटों पर ही जीत सकी थी। कांग्रेस का तो राज्य में सूपड़ा ही साफ हो गया था।

तो अब कांग्रेस की ‘चुप्पी’ का क्या मतलब
इस बीच कांग्रेस के नेता नई आबकारी नीति के विरोध में ट्वीट तो कर रहे हैं लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता खुलकर सड़कों पर उतर नहीं है। दरअसल, कांग्रेस की चुप्पी के भी मायने निकाले जा रहे हैं। दरअसल, अगर आप को दिल्ली में थोड़ा भी नुकसान होता है तो कांग्रेस को फायदा हो सकता है। कांग्रेस की दूर से मुस्कुराहट की वजह भी यही है। बीजेपी के विरोध के दम पर कांग्रेस को फायदा हो सकता है।



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