थायराइड समस्या व समाधान

थायराइड तन और मन दोनों का पोषण करता है। इसके तकलीफ में होने पर हमारी क्या दशा हो सकती है, वह सहज ही सोची जा सकती है। आयर्वेद में इस रोग का उपचार है। कछ हमें अपने खान-पान का ध्यान रखना है, कुछ औषधियां जो हमें इस रोग से बचाने में मदद करती हैं।

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थायराइड ग्रंथि ग्रीवा में स्वरयंत्र के ठीक नीचे श्वास प्रणाली के दाहिनी और बाईं ओर दोनों तरफ तितली के पंख के समान फैली रहती है। मानव शरीर में थायराइड ग्रंथि के तीन प्रमुख कार्य माने गए हैं, जिनमें पहला धातुओं का सम्यक पाक करना, दूसरा शरीर का पोषण करना तथा तीसरा मन को पुष्टि देना है। इस प्रकार यह ग्रंथि हमारे समस्त मनोदैहिक पोषण का कार्य करती है।

कारण –

  • कुछ रोगियों में ऑटो-इम्यून-डिसऑर्डर।
  • वंशानुगत कारण। शरीर में अन्यत्र हार्मोनों का असंतुलन। • शल्य-क्रिया के पार्श्व-प्रभाव। • रेडिएशन। • औषधीय दुष्प्रभाव।

थायराइड ग्रंथि की अल्प-सक्रियता (हाइपोथायरायडिज्म) के लक्षण

• टी.एस.एच. बढ़ना। • वजन अचानक बढ़ना। • बहुत ज्यादा थकान। कमजोरी। उदासी। •मांसपेशियों पर सूजन एवं खिचाव। •स्मरण-शक्ति कम पड़ जाती है। मानसिक मंदता। • आंखों के नीचे चर्बी तथा द्रव संचित रहने लगता है, जिससे आंखें सूजी हुई प्रतीत होती हैं। •हृदय की गति कम हो जाना। कब्ज होना। त्वचा रूखी, मोटी। बाल बेजान तथा रूखे। नाखून मोटे और धीरे-धीरे बढ़ने लगना। •माहवारी अनियमित, भारी स्रावयुक्तमाहवारी। •असहनीय सर्दी महसूस करना। शरीर का तापमान कम होना। • रक्त की कमी। यौन क्षमता में गिरावट। •आवाज मोटी होना। •पसीना कम आना। नाखून टूटने लगते हैं।

थायराइड ग्रंथि की अल्प-सक्रियता (हाइपोथायरायडिज्म) में पथ्यापथ्य-

सेवन करें- प्याज, चुकंदर, कचनार, काला नमक, मूली, शलगम, ब्राह्मी, कमल-ककड़ी, कमलनाल, ताजा फल, सिंघाड़ा, हरी-सब्जियां, हल्दी, फूल मखाने, अनार, सेब, मौसमी, आंवला, जामुन, पाइनऐप्पल, करेला, टमाटर, पालक, आलू, मटर, टिंडा, परवल, पनीर, दूध, दही, लस्सी।

सेवन नहीं करें- पत्तागोभी, बंदगोभी, ब्रोकली, केला, काज, सुपारी, सरसों का साग, पीला शलजम, मूंगफली। थायराइड से पीड़ित ऐसे रोगी जिनके शरीर में कैल्शियम की कमी हो गई है, उन्हें खूबानी, खजूर, किशमिश, बादाम, मलाई निकाला हुआ दूध, पनीर, प्याज, लहसुन, अखरोट, नारियल, अंजीर, चुकंदर, पालक, टमाटर, गाजर, आंवला तथा दही का सेवन करना चाहिए।

सेवनीय औषधियां – ब्राह्मी, गुग्गुलु, मघ पीपल, कालीमिर्च, त्रिफला, दाख (मुनक्का), दशमूल इत्यादि का नियमित रूप से सेवन करें, क्योंकि ये सब हार्मोनल असंतुलन को दूर करते हैं।

थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता (हाइपरथायरायडिज्म) के लक्षण इस अवस्था को हाइपरथायरायडिज्म भी कहा जाता है। इसमें हमारा शरीर बहुत तेजी से गतिशील होने लगता है। चयापचय बहुत अधिक बढ़ जाता है। टी-3 एवं टी-4 बढ़ जाते हैं। आयुर्वेद के अनुसार यह पित्त-दोष प्रधान व्याधि है। धडकनें बढ़ना, घबराहट व हृदय की गति बढ़ना। थकान, नसों में तनाव, हाथों में कंपन, नींद नहीं आना। मस्तिष्क में बेचैनी तथा विचारों की परेशानी, चिड़चिड़ापन, चिता। बार-बार पेशाब आना, हाथ-पैरों में पसीना आना। श्वास लेने में तकलीफ। अत्यधिक गर्मी का अहसास, गर्मी सहन नहीं होना। भूख लगने के बावजूद वजन में कमी। मांसपेशियां कमजोर पड़ना महिलाओं में माहवारी ज्यादा एवं अनियमित।

थायराइड ग्रंथि की अति सक्रियता में पथ्यापथ्य सेवन करें- कमल नाल, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, चांदी का बरक लगाकर आंवले का मुरब्बा, गुलकंद व गुलाब से बने हुए शर्बत।

सेवन न करें- समुद्री नमक का सेवन बंद करदें। काला- नमक अथवा सँधेया लाहौरी नमक का सेवन शुरू कर दें।

सेवनीय औषधियां नुस्खा- मुक्ता-पिष्टी छह ग्राम, रजत-भस्म दो ग्राम, प्रवाल-पिष्टी दस ग्राम, प्रवाल-पंचामृत रस-दस ग्राम, योगेंद्र-रस दो ग्राम- इन सब औषधियों को एक साथ मिलाकर रखें तथा साठ पुड़िया बनालें। एक एक पुड़िया सवेरे-सायं खाली पेट शहद के साथ सेवन करें और चंद्रप्रभावटी दो-दो गोलियां दिन में तीन बार लें।

– वैद्य अनुराग विजयवर्गीय (लेखक शिमला-हिमाचल प्रदेश, में वरिष्ठ चिकित्साधिकारी-आयुर्वेद हैं)

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