चेयरपर्सन, प्रबंध निदेशक पदों को अलग करने के नियम को स्वैच्छिक बनाने के फैसले का स्वागत – welcoming the decision to make the rule of separation of chairperson managing director posts voluntary


नयी दिल्ली, 15 फरवरी (भाषा) उद्योग जगत ने सेबी के सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पदों को अलग-अलग करने को स्वैच्छिक बनाने के निर्णय का स्वागत किया है। उद्योग जगत ने मंगलवार को कहा कि कंपनियों में नेतृत्व व्यवस्था उनके निदेशक मंडल और शेयरधारकों का मामला है तथा इसे उन्हीं पर छोड़ देना बेहतर है।

पूंजी बाजार नियामक सेबी ने मंगलवार को कहा कि सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पदों को अलग-अलग करना अब अनिवार्य नहीं होगा। इसे स्वैच्छिक आधार पर लागू किया जाएगा।

शीर्ष 500 सूचीबद्ध इकाइयों के लिये इन पदों को अप्रैल, 2022 की समयसीमा से पहले अलग करना अनिवार्य था।

भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, ‘‘सीआईआई ने कहा था कि गैर-कार्यकारी चेयरपर्सन और एमडी / सीईओ की भूमिकाओं को अलग करने के संबंध में संशोधन से नियमन का घालमेल हो सकता है और यह अनुकूल कारोबारी माहौल में बाधा बन सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘चेयरपर्सन और एमडी/सीईओ संबंधित नहीं होने चाहिए का प्रावधान परेशानी पैदा करने वाला हो सकता है। मौजूदा व्यवस्था में संतुलन के पुख्ता इंतजाम है, ऐसे में इस प्रकार के प्रावधान की जरूरत नहीं है….।’’

बनर्जी के अनुसार यह बेहतर है कि इस मामले में निर्णय निदेशक मंडल और शेयरधारकों पर छोड़ दिया जाए।

फिक्की के महानिदेशक अरुण चावला ने कहा, ‘‘हम सूचीबद्ध कंपनियों में चेयरपर्सन और प्रबंध निदेशक/मुख्य कार्यपालक अधिकारी के पदों को अलग-अलग करने की अनिवार्यता से जुड़े मुद्दों को लेकर उद्योग की बातों को सुनने के लिये नियामक के आभारी हैं।’’

उन्होंने कहा कि कंपनियों के नेतृत्व का निर्णय बेहतर होगा कि शेयरधारकों के विवेक पर छोड़ दिया जाए। यह कंपनी की बेहतर कारोबारी गतिविधियों के लिये उचित है।

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