क्या था डिप्टी सीएमओ हत्याकांड, जिससे जुड़े NRHM घोटाले की गूंज से बसपा सरकार हिल गई थी – nrhm scam and deputy cmo murder case, when bsp government came under question


लखनऊ : यूपी में मायावती सरकार के दौरान हुए एनआरएचएम (NRHM) घोटाले के आरोपी रहे डॉक्टर वाईएस सचान की 2011 में लखनऊ जेल में संदेहास्पद स्थितियों में मौत हो गई थी। तब जेल प्रशासन ने दावा किया था कि सचान ने सर्जिकल ब्लेड से अपने बदन पर तमाम जगह नसों को काटकर खुदकुशी कर ली है, लेकिन बाद में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इसे खुदकुशी की जगह हत्या और साजिश माना। सोमवार को इस मामले में सीबीआई की विशेष कोर्ट ने तत्कालीन डीजीपी करमवीर सिंह, आईजी जेल वीके गुप्ता, आईजी जोन सुबेश कुमार सिंह तत्कालीन जेलर रहे बीएस मुकुंद और डिप्टी जेलर सुनील कुमार सिंह को कोर्ट ने तलब किया है। वहीं मामले में मुख्य कैदी वार्डन के बंदी रक्षक बाबू राम दुबे और बंदी रक्षक पहिंद्र सिंह को भी कोर्ट के सामने पक्ष रखने के लिए तलब किए गया है। 11 साल पहले हुई डिप्टी सीएमओ वाईएस सचान की संदिग्ध मौत के रहस्य से अब तक पर्दा नहीं उठ सका है। वहीं मायावती के शासनकाल में हुई इस घटना से बसपा सरकार की बहुत किरकिरी हुई थी।

डिप्टी सीएमओ की मौत की खबर से मच गया था हड़कंप
डिप्टी सीएमओ डॉ. वाईएस सचान की 22 जून 2011 को लखनऊ की जिला जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर से हड़कंप मच गया था। उस वक्त बताया गया था कि डॉक्टर सचान ने जेल की पहली मंजिल में बने एक टॉयलेट में आत्महत्या कर ली है। डॉक्टर सचान पर बहुचर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले और सीएमओ डॉक्टर बीपी सिंह हत्याकांड मामले का आरोप लगा था। डॉ. सचान पहले गबन के आरोप में गिरफ्तार किए गए थे बाद में पुलिस ने उन पर सीएमओ डॉक्टर बीपी सिंह और डॉक्टर विनोद आर्य की ह्त्या के षड्यंत्र में शामिल होने का भी आरोप लगाया था। बताया जाता है कि अपनी मौत के दिन से एक दिन बाद ही डॉक्टर सचान को अदालत में बयान देना था। चर्चाएं थीं कि वो ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन घोटाले और सीएमओ हत्याकांड मामले में अदालत में कुछ बड़े पर्दाफाश कर सकते थे।

पत्नी ने लिखवाई FIR
जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई डॉ. सचान की मौत पर गोसाईगंज थाने में 26 जून 2011 को अज्ञात के खिलाफ उनकी पत्नी की तरफ से एक एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई थी। डॉ. सचान के परिवार वालों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत से पूर्व की चोटों का हवाला देते हुए इसे ह्त्या करार दिया था। वहीं 11 जुलाई 2011 को न्यायिक जांच रिपोर्ट में भी डॉ. सचान की मौत को हत्या बताया गया था। लेकिन बाद में एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 14 जुलाई को मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक डॉ. सचान के आर्टरीज में 8 जगह कट पाए गए थे जो कि 8 से 9 इंच तक गहरे थे। जानकारी के मुताबिक उनके गले पर जो बेल्ट थी उसे मौत के बाद उनके गले से बांधा गया था।

फोरेंसिक जांच में आत्महत्या साबित हुई थी सचान की मौत

27 सितंबर 2012 को कई महीनों की जांच पड़ताल के बाद सीबीआई ने अदालत को बताया कि फोरेंसिक जांच में डॉ. सचान की मौत, आत्महत्या साबित हुई है। सीबीआई ने हत्या के सबूत नहीं मिलने की बात कही थी। सीबीआई ने कहा कि उसके पास सुबूत हैं कि पूर्व में दो मेडिकल अधिकारियों की मौत में उनकी भूमिका के खुलासे के बाद डॉक्टर सचान इतने दबाव में थे कि उन्होंने खाना लेना भी बंद कर दिया था। जिसके चलते पहले डॉ. सचान ने आधे ब्लेड से खुद पर घाव किए लेकिन उन्हें आशंका थी कि अगर किसी ने उन्हें ऐसी हालत में देख लिया तो उन्हें अस्पताल ले जाया जाएगा। इसलिये डॉक्टर सचान ने फांसी लगा ली थी।

बताया जा रहा है कि सीबीआई को डॉ. सचान की मौत के बाद एक नोट की फोटोकॉपी मिली थी जिसमें लिखा था कि मैं ये बताना चाहता हूं कि मैं निर्दोष हूं मुझे जेल प्रशासन के अधिकारियों व बंदियों से तथा मेरे समस्त परिवार से कोई शिकायत नहीं है। सीबीआई के मुताबिक नोट पर लिखावट डॉक्टर सचान की थी और ऐसा लगता है कि डॉक्टर सचान ने मीडिया को पत्र लिखने के बाद आत्महत्या कर ली।

CBI रिपोर्ट को सचान की पत्नी ने दी थी चुनौती

एक जानकारी के मुताबिक, अपने पति डॉ. सचान को न्याय दिलाने के लिये उनकी पत्नी ने 27 सितंबर को सीबीआई की रिपोर्ट को चुनौती दी थी। वहीं 9 अगस्त 2017 को सीबीआई ने आत्महत्या बताते हुए अपनी फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर दी थी। बाद में 19 नवंबर 2019 को कोर्ट ने सीबीआई को झटका देते हुए उनकी फाइनल रिपोर्ट को खारिज कर दिया था। अब 12 जुलाई 2022 यानी करीब 11 साल बाद सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने इसे हत्या और साजिश माना है।

बसपा सरकार की जमकर हुई थी किरकिरी
मायावती के शासनकाल में हुई डॉ. सचान की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत को लेकर बसपा सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं सांसद लालजी टडंन ने परिवार कल्याण विभाग के उप मुख्य चिकित्साधिकारी वाई एस सचान की लखनऊ जेल में हुई मौत को हत्या बताते हुए इस घटना की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। बीजेपी सांसद ने कहा था कि दो चिकित्साधिकारियों की मौत के आरोपी डा. सचान ने आत्महत्या नहीं की है बल्कि करोड़ों रुपए के दवा घोटाले को जमींदोज करने के लिए उनकी हत्या कर दी गई है। यह एक व्यक्ति की आत्महत्या अथवा हत्या का सवाल नहीं है बल्कि भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबी व्यवस्था पर प्रश्नचिंह है।



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