Sunday, August 14, 2022
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अफ्रीकी देशों के समर्थन पाने के लिए महाद्वीप का दौरा कर रहे पश्चिमी और रूसी नेता – western and russian leaders touring continent to seek support from african countries


जोहानिसबर्ग, 28 जुलाई (एपी) रूस, फ्रांस और अमेरिका के नेता यूक्रेन में चल रहे युद्ध पर अपने रुख के लिए समर्थन जुटाने के वास्ते अफ्रीकी देशों का दौरा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अफ्रीकी महाद्वीप पर अपना प्रभाव बढ़ाने के उद्देश्य से रूस और पश्चिमी देशों द्वारा शीत युद्ध के बाद की जा रही यह सबसे बड़ी कवायद है। रूस के विदेश मंत्री सर्जेई लावरोव और फ्रांस के राष्ट्रपति एम्मानुएल मैक्रों इस सप्ताह कई अफ्रीकी देशों का दौरा कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय विकास के लिए अमेरिकी एजेंसी (यूएस-एड) की प्रमुख समांथा पावर ने गत सप्ताह केन्या और सोमालिया का दौरा किया। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की राजदूत लिंडा थॉमस-ग्रीनफील्ड अगले सप्ताह घाना और युगांडा के दौरे पर जाएंगी। सुशासन को प्रोत्साहन देने वाली संस्था ‘डेमोक्रेसी वर्क्स’ के निदेशक विलियम गुमेदे ने कहा, “ऐसा लगता है जैसे अफ्रीका में नया शीत युद्ध छिड़ गया है जहां प्रतिद्वंद्वी खेमे अपना प्रभाव कायम करने का प्रयास कर रहे हैं।” सूखे और भूख की मार झेल रहे अफ्रीकी महाद्वीप की यात्रा के दौरान लावरोव, पश्चिम को खलनायक की तरह पेश कर रहे हैं और उस पर भोजन की बढ़ती कीमतों का दोष मढ़ रहे हैं। वहीं, पश्चिमी देशों ने क्रेमलिन पर भोजन को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने और औपनिवेशिक तरीके से युद्ध लड़ने का आरोप लगाया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासनकाल में रूस कई वर्षों से अफ्रीका का समर्थन हासिल करने का प्रयास कर रहा है। इन कोशिशों का इतिहास लगभग आधी सदी पुराना है जब सोवियत संघ ने, औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के लिए लड़ रहे कई अफ्रीकी देशों में आंदोलन को समर्थन दिया था। गुमेदे ने कहा, “अब यह अभियान तेजी पकड़ रहा है।” अफ्रीका पर मास्को का असर मार्च में दिखाई पड़ा जब यूक्रेन पर रूस के हमले की निंदा पर संयुक्त राष्ट्र में मतदान किया जा रहा था। प्रस्ताव के पक्ष में 28 अफ्रीकी देशों ने मतदान किया था जबकि 25 सदस्य देशों ने या तो मतदान नहीं करने पर मत डाला या मतदान नहीं किया। रूस के शीर्ष राजनयिक ने इस सप्ताह मिस्र, कांगो, युगांडा और इथियोपिया की का दौरा किया और दोस्ती का वादा कर भोजन की बढ़ती कीमतों के लिए अमेरिका तथा यूरोपीय देशों की पर्यावरण की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। युगांडा के राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी ने लावरोव का स्वागत किया और यहां तक कहा कि चूंकि यूक्रेन रूस के प्रभाव क्षेत्र के भीतर है इसलिए वहां पुतिन की कार्रवाई का मतलब समझ में आता है। लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत करते हुए अफ्रीकी देशों को शामिल करने का समर्थन किया। युगांडा के राजनीतिक विशेषज्ञ आसुमन बिसीका ने कहा कि तीन दशकों से शासन कर रहे मुसेवेनी को रूस ने संबंध प्रगाढ़ करने के लिए चुना है। बिसीका ने कहा, “पूर्वी अफ्रीका में युगांडा एक महत्वपूर्ण देश है।” कोविड-19 महामारी फैलने की शुरुआत से ही मुसेवेनी सार्वजनिक तौर पर मास्क लगाने के नियम का कड़ाई से पालन कर रहे थे लेकिन लावरोव से मुलाकात के दौरान उन्होंने मास्क नहीं लगाया था। रूस, अफ्रीकी देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अपने सरकारी टीवी प्रसारक नेटवर्क ‘आर टी’ का भी सहारा ले रहा है। आर टी ने जोहानिसबर्ग में अपना नया ब्यूरो खोलने की घोषणा की है। गौरतलब है कि यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा रूस पर प्रतिबंध लगाने के बाद मार्च में आर टी को अफ्रीका के सबसे बड़े भुगतान टीवी मंच ‘मल्टीचॉइस’ से हटा दिया गया था। एपी यश माधवमाधव


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